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Maharajganj News: किसानों का गन्ने से हो रहा मोह भंग...घट गया रकबा
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चीनी मिल तक गन्ना पहुंचाने में जुटे हैं किसान, 20 हजार हेक्टेयर में बोई गई है गन्ने की फसल
पिछले वर्ष 20,400 हेक्टेयर में गन्ना बोया गया था गन्ना, 400 हेक्टेयर घट गया रकबा
महाराजगंज। नकदी फसल होने के बावजूद किसानों का मोह गन्ना बुवाई के प्रति कम हो रहा है। इस बार भी जिले में गन्ना बोवाई का रकबा करीब 400 हेक्टेयर घट गया है। जिले में संचालित दो निजी चीनी मिलों में गन्ने की पेराई का काम शुरू हो चुका है। किसान अपनी गन्ने की फसल को चीनी मिलों तक पहुंचाने में जुटे हैं। जिले में करीब 20 हजार हेक्टयर कृषि भूमि में गन्ने की बोवाई की गई है। पिछले वर्ष 20,400 हेक्टेयर में गन्ना बोया गया था।
करीब-करीब 40 हजार किसान गन्ने की खेती से जुड़े हुए हैं। जिले के दो ही तहसीलों में प्रमुख रूप से गन्ना बोया जाता है। निचलौल क्षेत्र में करीब 15 हेक्टेयर में जबकि महराजगंज तहसील में करीब 5 हजार हेक्टेयर में किसान गन्ने की खेती करते हैं। इसके बावजूद गन्ना किसानों की दुश्वारियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। खराब मौसम की समस्याओं से तो उन्हें जूझना ही पड़ता है साथ ही उन्हें व्यवस्थागत समस्याओं से भी जूझना पड़ता है। इसमें गन्ने की आपूर्ति के बाद गन्ना मूल्य में भुगतान में देरी की समस्या प्रमुख है। इसके अलावा गन्ना किसानों को खेती में लगने वाले लेबरों की समस्या से भी जूझना पड़ता है। इन सब परेशानियों के बावजूद बहुत से किसान गन्ने की खेती कर रहे हैं।
जिला गन्ना अधिकारी ने बताया कि सिसवा क्षेत्र में कुछ किसानों ने इस साल गन्ने की खेती नहीं की। उस क्षेत्र में जिन किसानों की जमीन नीची है उन्हें गन्ने की खेती में समस्याओं का सामना करना पड़ता था। उन्होंने बताया कि अभी तक लगभग 20 प्रतिशत गन्ने की फसल चीनी मिलों तक पहुंच चुकी है। गन्ना पेराई का यह सत्र करीब 25 मार्च तक चलेगा।
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बंद पड़ी हैं दो सरकारी चीनी मिलें
जिले में इस समय दो चीनी मिलें चल रहीं हैं जबकि दो सरकारी चीनी मिलें बंद पड़ी है। फरेंदा क्षेत्र में वस्त्र मंत्रालय से संचालित चीनी मिल फरवरी 1994 से बंद पड़ी है। जबकि घुघली में कारपोरेशन से संचालित चीनी मिल 1999 से बंद है। इन मिलों को चलाने का प्रयास किया गया लेकिन मिलें चल नहीं पाईं।
भुगतान में देरी पर गड़ौरा चीनी मिल को नोटिस
वर्तमान सत्र में गन्ना किसानों को भुगतान में देरी करने पर जिलाधिकारी ने गड़ौरा चीनी मिल को नोटिस दी है। गड़ौरा चीनी मिल ने 8 दिसंबर 2025 के बाद से किसानों को गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं किया है। चीनी मिल पर इस समय करीब 631.65 लाख रुपये का बकाया है। जिला गन्ना अधिकारी ओम प्रकाश सिंह यादव ने बताया कि पिछले सत्र के बकाए गन्ना मूल्य का भुगतान दोनों चीनी मिलों ने कर दिया है। सिसवा क्षेत्र की चीनी मिल इस सत्र के भी गन्ना मूल्य का भुगतान कर चुकी है जबकि गड़ौरा चीनी मिल को नोटिस जारी कर शीघ्र भुगतान के लिए कहा गया है।
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पिछले वर्ष 20,400 हेक्टेयर में गन्ना बोया गया था गन्ना, 400 हेक्टेयर घट गया रकबा
महाराजगंज। नकदी फसल होने के बावजूद किसानों का मोह गन्ना बुवाई के प्रति कम हो रहा है। इस बार भी जिले में गन्ना बोवाई का रकबा करीब 400 हेक्टेयर घट गया है। जिले में संचालित दो निजी चीनी मिलों में गन्ने की पेराई का काम शुरू हो चुका है। किसान अपनी गन्ने की फसल को चीनी मिलों तक पहुंचाने में जुटे हैं। जिले में करीब 20 हजार हेक्टयर कृषि भूमि में गन्ने की बोवाई की गई है। पिछले वर्ष 20,400 हेक्टेयर में गन्ना बोया गया था।
करीब-करीब 40 हजार किसान गन्ने की खेती से जुड़े हुए हैं। जिले के दो ही तहसीलों में प्रमुख रूप से गन्ना बोया जाता है। निचलौल क्षेत्र में करीब 15 हेक्टेयर में जबकि महराजगंज तहसील में करीब 5 हजार हेक्टेयर में किसान गन्ने की खेती करते हैं। इसके बावजूद गन्ना किसानों की दुश्वारियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। खराब मौसम की समस्याओं से तो उन्हें जूझना ही पड़ता है साथ ही उन्हें व्यवस्थागत समस्याओं से भी जूझना पड़ता है। इसमें गन्ने की आपूर्ति के बाद गन्ना मूल्य में भुगतान में देरी की समस्या प्रमुख है। इसके अलावा गन्ना किसानों को खेती में लगने वाले लेबरों की समस्या से भी जूझना पड़ता है। इन सब परेशानियों के बावजूद बहुत से किसान गन्ने की खेती कर रहे हैं।
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जिला गन्ना अधिकारी ने बताया कि सिसवा क्षेत्र में कुछ किसानों ने इस साल गन्ने की खेती नहीं की। उस क्षेत्र में जिन किसानों की जमीन नीची है उन्हें गन्ने की खेती में समस्याओं का सामना करना पड़ता था। उन्होंने बताया कि अभी तक लगभग 20 प्रतिशत गन्ने की फसल चीनी मिलों तक पहुंच चुकी है। गन्ना पेराई का यह सत्र करीब 25 मार्च तक चलेगा।
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बंद पड़ी हैं दो सरकारी चीनी मिलें
जिले में इस समय दो चीनी मिलें चल रहीं हैं जबकि दो सरकारी चीनी मिलें बंद पड़ी है। फरेंदा क्षेत्र में वस्त्र मंत्रालय से संचालित चीनी मिल फरवरी 1994 से बंद पड़ी है। जबकि घुघली में कारपोरेशन से संचालित चीनी मिल 1999 से बंद है। इन मिलों को चलाने का प्रयास किया गया लेकिन मिलें चल नहीं पाईं।
भुगतान में देरी पर गड़ौरा चीनी मिल को नोटिस
वर्तमान सत्र में गन्ना किसानों को भुगतान में देरी करने पर जिलाधिकारी ने गड़ौरा चीनी मिल को नोटिस दी है। गड़ौरा चीनी मिल ने 8 दिसंबर 2025 के बाद से किसानों को गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं किया है। चीनी मिल पर इस समय करीब 631.65 लाख रुपये का बकाया है। जिला गन्ना अधिकारी ओम प्रकाश सिंह यादव ने बताया कि पिछले सत्र के बकाए गन्ना मूल्य का भुगतान दोनों चीनी मिलों ने कर दिया है। सिसवा क्षेत्र की चीनी मिल इस सत्र के भी गन्ना मूल्य का भुगतान कर चुकी है जबकि गड़ौरा चीनी मिल को नोटिस जारी कर शीघ्र भुगतान के लिए कहा गया है।