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Maharajganj News: महिला प्रधान के डिजिटल सिग्नेचर से परिजन नहीं कर सकेंगे भुगतान
Wed, 30 Apr 2025 12:42 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Wed, 30 Apr 2025 12:42 AM IST
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महाराजगंज। महिला ग्राम प्रधानों के सशक्तीकरण के लिए शासन ने एक अहम कदम उठाया है। अब किसी भी महिला प्रधान के पति, बेटा या अन्य परिजन उनके स्थान पर डिजिटल सिग्नेचर के माध्यम से ग्राम पंचायत के खाते से भुगतान नहीं कर सकेंगे।
भुगतान प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और वास्तविक प्रधान की भूमिका को सुनिश्चित करने के लिए पंचायतों में नई व्यवस्था लागू की जा रही है। जानकारी के अनुसार, जिले में कुल 882 ग्राम पंचायतें हैं। इसमें वर्तमान में 393 महिला ग्राम प्रधान हैं। शासन के निर्देश पर अब ग्राम पंचायतों के खातों से भुगतान केवल तब संभव होगा जब ग्राम प्रधान व पंचायत सचिव दोनों की पहचान उनके चेहरों के मिलान प्रणाली और पंचायत भवन की लोकेशन के जरिए सत्यापित हो जाएगी।
वर्तमान में ग्राम पंचायतों में भुगतान के लिए गेटवे प्रणाली लागू है। इसके बावजूद कई स्थानों पर पंचायत भवन के बाहर से भी लाखों रुपये के भुगतान किए जाते रहे हैं। इस व्यवस्था में सुधार के उद्देश्य से पंचायती राज निदेशक ने सभी जिलों के डीपीआरओ को प्रधानों, पंचायत सचिवों और पंचायत सहायकों की प्रोफाइल यूपीपीआरडी पोर्टल पर तैयार कराने का निर्देश दिया है।
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इसमें प्रोफाइल में संबंधित व्यक्ति का नाम, फोटो और मोबाइल नंबर अपलोड किया जा रहा है। इसके लिए पंचायत गेटवे एप का उपयोग किया जा रहा है। इसे प्रधान, सचिव और पंचायत सहायक को अपने-अपने मोबाइल फोन पर इंस्टॉल करना अनिवार्य होगा। पंचायत सचिव अपनी तथा प्रधान और पंचायत सहायक की प्रोफाइल तैयार करेगा। प्रत्येक प्रोफाइल पर तीनों के चेहरे के फोटो अपलोड किए जाएंगे, जिनका सत्यापन एडीओ पंचायत द्वारा किया जाएगा।
प्रोफाइल बनने के बाद ग्राम पंचायतों में लोकेशन आधारित भुगतान व्यवस्था लागू होगी। इसका ग्राम पंचायत के खाते से भुगतान तभी हो सकेगा, जब प्रधान और सचिव दोनों पंचायत भवन में मौजूद रहेंगे और उनके चेहरे का मिलान कंप्यूटर पर हो जाएगा। अब बाहर से या बिना प्रधान की वास्तविक उपस्थिति के भुगतान संभव नहीं होगा।
इससे महिला प्रधानों के पति, बेटे या अन्य परिजन प्रधान की पहचान का दुरुपयोग नहीं कर पाएंगे। सूत्रों की माने तो जिले में कुल 393 ग्राम पंचायतों में महिला प्रधान हैं। इसमें कई ऐसी महिला प्रधान हैं जिनके डिजिटल सिग्नेचर का इस्तेमाल कर उनके पति या परिवार के अन्य सदस्य लाखों रुपये के भुगतान करते रहे हैं। जबकि स्वयं प्रधानों को इसकी जानकारी तक नहीं रहती थी।
नई व्यवस्था लागू होने से महिला प्रधानों को वास्तविक नेतृत्व का अवसर मिलेगा।
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भुगतान प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और वास्तविक प्रधान की भूमिका को सुनिश्चित करने के लिए पंचायतों में नई व्यवस्था लागू की जा रही है। जानकारी के अनुसार, जिले में कुल 882 ग्राम पंचायतें हैं। इसमें वर्तमान में 393 महिला ग्राम प्रधान हैं। शासन के निर्देश पर अब ग्राम पंचायतों के खातों से भुगतान केवल तब संभव होगा जब ग्राम प्रधान व पंचायत सचिव दोनों की पहचान उनके चेहरों के मिलान प्रणाली और पंचायत भवन की लोकेशन के जरिए सत्यापित हो जाएगी।
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वर्तमान में ग्राम पंचायतों में भुगतान के लिए गेटवे प्रणाली लागू है। इसके बावजूद कई स्थानों पर पंचायत भवन के बाहर से भी लाखों रुपये के भुगतान किए जाते रहे हैं। इस व्यवस्था में सुधार के उद्देश्य से पंचायती राज निदेशक ने सभी जिलों के डीपीआरओ को प्रधानों, पंचायत सचिवों और पंचायत सहायकों की प्रोफाइल यूपीपीआरडी पोर्टल पर तैयार कराने का निर्देश दिया है।
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इसमें प्रोफाइल में संबंधित व्यक्ति का नाम, फोटो और मोबाइल नंबर अपलोड किया जा रहा है। इसके लिए पंचायत गेटवे एप का उपयोग किया जा रहा है। इसे प्रधान, सचिव और पंचायत सहायक को अपने-अपने मोबाइल फोन पर इंस्टॉल करना अनिवार्य होगा। पंचायत सचिव अपनी तथा प्रधान और पंचायत सहायक की प्रोफाइल तैयार करेगा। प्रत्येक प्रोफाइल पर तीनों के चेहरे के फोटो अपलोड किए जाएंगे, जिनका सत्यापन एडीओ पंचायत द्वारा किया जाएगा।
प्रोफाइल बनने के बाद ग्राम पंचायतों में लोकेशन आधारित भुगतान व्यवस्था लागू होगी। इसका ग्राम पंचायत के खाते से भुगतान तभी हो सकेगा, जब प्रधान और सचिव दोनों पंचायत भवन में मौजूद रहेंगे और उनके चेहरे का मिलान कंप्यूटर पर हो जाएगा। अब बाहर से या बिना प्रधान की वास्तविक उपस्थिति के भुगतान संभव नहीं होगा।
इससे महिला प्रधानों के पति, बेटे या अन्य परिजन प्रधान की पहचान का दुरुपयोग नहीं कर पाएंगे। सूत्रों की माने तो जिले में कुल 393 ग्राम पंचायतों में महिला प्रधान हैं। इसमें कई ऐसी महिला प्रधान हैं जिनके डिजिटल सिग्नेचर का इस्तेमाल कर उनके पति या परिवार के अन्य सदस्य लाखों रुपये के भुगतान करते रहे हैं। जबकि स्वयं प्रधानों को इसकी जानकारी तक नहीं रहती थी।
नई व्यवस्था लागू होने से महिला प्रधानों को वास्तविक नेतृत्व का अवसर मिलेगा।