{"_id":"692b4e9d1a83be2e040672f3","slug":"eyewash-in-the-name-of-cleaning-of-minors-and-canals-maharajganj-news-c-206-1-mhg1007-165448-2025-11-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Maharajganj News: माइनर और रजवाहों की सफाई के नाम पर खानापूरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Maharajganj News: माइनर और रजवाहों की सफाई के नाम पर खानापूरी
विज्ञापन
परतावल क्षेत्र में माइनर और रजवाहो की सफाई के नाम पर खानापूर्ति।
परतावल। क्षेत्र के रजवाहों और माइनर की उचित सफाई न होने से किसानों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। खेतों तक पानी नहीं पहुंचने की आशंका ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। किसानों का आरोप है कि विभाग का सफाई कार्य केवल कागजों तक सीमित है। जमीन पर नजर डालें तो नालियों में जमा सिल्ट हटाने की बजाय केवल ऊपर की घास काटकर खानापूर्ति की जा रही है। पानी का बहाव प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। इसका सीधा असर रबी की फसलों पर पड़ेगा।
सबसे गंभीर स्थिति अमवा माइनर की बताई जा रही है। यहां लंबे समय से सिल्ट जमा होने के कारण पानी का बहाव सुचारू रूप से नहीं हो पा रहा है। किसानों का कहना है कि इस माइनर की टेल तक पानी पहुंचने की संभावना बेहद कम है। यदि समय रहते सफाई नहीं कराई गई तो पिपरिया, बसहिया बुजुर्ग, अमवा, बसहिया खुर्द, मुहम्मदपुर, श्यामदेउरवा, रामपुर समेत कई गांवों की फसलें प्रभावित होंगी। इन गांवों की सिंचाई पूरी तरह अमवा माइनर पर ही निर्भर है।
किसान अखिलेश, छोटेलाल, लहरी, वाजिद, श्रवण ने बताया कि उन्होंने कई बार विभागीय अधिकारियों से सही तरीके से सफाई कराने की मांग की गई लेकिन केवल आश्वासन ही मिला है। जब तक नालियों में जमा सिल्ट की सही ढंग से खोदाई नहीं होगी, तब तक पानी खेतों तक पहुंचना मुश्किल है। किसान बताते हैं कि हर साल इसी तरह सफाई के नाम पर खानापूर्ति की की जाती है और पानी माइनर की टेल तक नहीं पहुंचता। किसानों में इस बात को लेकर भी असंतोष है कि विभागीय कर्मचारी मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति का जायजा नहीं लेते। केवल औपचारिकता निभाकर सफाई का दावा कर दिया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे गंभीर स्थिति अमवा माइनर की बताई जा रही है। यहां लंबे समय से सिल्ट जमा होने के कारण पानी का बहाव सुचारू रूप से नहीं हो पा रहा है। किसानों का कहना है कि इस माइनर की टेल तक पानी पहुंचने की संभावना बेहद कम है। यदि समय रहते सफाई नहीं कराई गई तो पिपरिया, बसहिया बुजुर्ग, अमवा, बसहिया खुर्द, मुहम्मदपुर, श्यामदेउरवा, रामपुर समेत कई गांवों की फसलें प्रभावित होंगी। इन गांवों की सिंचाई पूरी तरह अमवा माइनर पर ही निर्भर है।
विज्ञापन
किसान अखिलेश, छोटेलाल, लहरी, वाजिद, श्रवण ने बताया कि उन्होंने कई बार विभागीय अधिकारियों से सही तरीके से सफाई कराने की मांग की गई लेकिन केवल आश्वासन ही मिला है। जब तक नालियों में जमा सिल्ट की सही ढंग से खोदाई नहीं होगी, तब तक पानी खेतों तक पहुंचना मुश्किल है। किसान बताते हैं कि हर साल इसी तरह सफाई के नाम पर खानापूर्ति की की जाती है और पानी माइनर की टेल तक नहीं पहुंचता। किसानों में इस बात को लेकर भी असंतोष है कि विभागीय कर्मचारी मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति का जायजा नहीं लेते। केवल औपचारिकता निभाकर सफाई का दावा कर दिया जाता है।
विज्ञापन