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Maharajganj News: छात्र-छात्राओं को बताए औषधीय पौधों के गुण
Sun, 28 May 2023 01:12 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Sun, 28 May 2023 01:12 AM IST
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आईटीएम आयुर्वेदिक मेडिकल कालेज में औषधि बगीचा में जानकारी देती डॉ. शमना।संवाद
आईटीएम आयुर्वेदिक मेडिकल काॅलेज में कार्यशाला का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। आईटीएम आयुर्वेदिक मेडिकल काॅलेज के द्रव्यगुण व रसशास्त्र विभाग में प्रायोगिक कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें बीएएमएस के प्रथम व द्वितीय बैच के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। बरसात में हर घर में औषधीय पौधे लगवाने संकल्प लिया गया।
रसशास्त्र विशेषज्ञ डॉ. किरण ने बताया कि पलास बहुत गुणकारी है। इसका बीज पुराने एक्जिमा व समस्त चर्म रोगों को जड़ से समाप्त करता है। अर्जुन की छाल को हृदय रोग व मोटापा घटाने में गुणकारी बताया।
द्रव्यगुण विशेषज्ञ डॉ. शमना ने कहा कि सिंदूर के पौधे में औषधीय गुण होने के बावजूद इसका कास्मेटिक गुण भी है। इस पौधे को घर में लगाया जा सकता है। प्रायोगिक कार्यशाला में तुलसी, ऐलोवेरा, लाजवंती, स्टीविया आदि का स्वरस निकालना सिखाया गया। उन्होंने कहा कि पुनर्नवा तराई क्षेत्र में अत्यधिक पाया जाता है। इसका उपयोग लिवर की बीमारियों में रामवाण है। यदि लिवर का तीन चौथाई हिस्सा भी नष्ट हो गया है तो इस औषधि से लिवर को पुनर्जीवित किया जा सकता है।
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प्रोफेसर डॉ. परमेश्वर ने बताया कि इस मौसम में आयुर्वेद के दोष वात पित्त कफ में वात व पित्त दोष की अधिकता रहती है, जिससे विषम ज्वर, पेचिस, उदर शूल, सिर शूल आदि रहता है। प्रथम बैच के आकाश यादव, कृपाशंकर, माहेनूर, पल्लवी, आकाश, रजक, वर्षा, अनामिका, सोनम पाठक, द्वितीय बैच के कृष्णा, सौर्य, अंजलि, प्रतिभा, संजू, मंतशा आदि मौजूद रहीं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। आईटीएम आयुर्वेदिक मेडिकल काॅलेज के द्रव्यगुण व रसशास्त्र विभाग में प्रायोगिक कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें बीएएमएस के प्रथम व द्वितीय बैच के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। बरसात में हर घर में औषधीय पौधे लगवाने संकल्प लिया गया।
रसशास्त्र विशेषज्ञ डॉ. किरण ने बताया कि पलास बहुत गुणकारी है। इसका बीज पुराने एक्जिमा व समस्त चर्म रोगों को जड़ से समाप्त करता है। अर्जुन की छाल को हृदय रोग व मोटापा घटाने में गुणकारी बताया।
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द्रव्यगुण विशेषज्ञ डॉ. शमना ने कहा कि सिंदूर के पौधे में औषधीय गुण होने के बावजूद इसका कास्मेटिक गुण भी है। इस पौधे को घर में लगाया जा सकता है। प्रायोगिक कार्यशाला में तुलसी, ऐलोवेरा, लाजवंती, स्टीविया आदि का स्वरस निकालना सिखाया गया। उन्होंने कहा कि पुनर्नवा तराई क्षेत्र में अत्यधिक पाया जाता है। इसका उपयोग लिवर की बीमारियों में रामवाण है। यदि लिवर का तीन चौथाई हिस्सा भी नष्ट हो गया है तो इस औषधि से लिवर को पुनर्जीवित किया जा सकता है।
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प्रोफेसर डॉ. परमेश्वर ने बताया कि इस मौसम में आयुर्वेद के दोष वात पित्त कफ में वात व पित्त दोष की अधिकता रहती है, जिससे विषम ज्वर, पेचिस, उदर शूल, सिर शूल आदि रहता है। प्रथम बैच के आकाश यादव, कृपाशंकर, माहेनूर, पल्लवी, आकाश, रजक, वर्षा, अनामिका, सोनम पाठक, द्वितीय बैच के कृष्णा, सौर्य, अंजलि, प्रतिभा, संजू, मंतशा आदि मौजूद रहीं।