{"_id":"684f19f3cc6828be1f0e090d","slug":"even-after-36-years-the-department-did-not-get-the-gpf-amount-maharajganj-news-c-206-1-sgkp1021-151928-2025-06-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Maharajganj News: 36 वर्ष बाद भी विभाग को नहीं मिली जीपीएफ की रकम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Maharajganj News: 36 वर्ष बाद भी विभाग को नहीं मिली जीपीएफ की रकम
Mon, 16 Jun 2025 12:37 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Mon, 16 Jun 2025 12:37 AM IST
विज्ञापन
महराजगंज। जिला गठन होने के बाद 36 वर्ष बीत गए, लेकिन विभागीय लचरता और प्रशासनिक अधिकारियों की तत्परता में कमी के कारण शिक्षकों के जीपीएफ कटौती की राशि जनपद में नहीं आंतरित हो सकी।
यह राशि 100 करोड़ रुपये तक जा पहुंची है, लेकिन जिले को आंतरित न होने के कारण इसका उपयोग न तो शिक्षक कर सके हैं और न ही उनके परिवार को इसका लाभ मिल सका है। विभाग और सीडीओ ने इसे लेकर प्रयास शुरू किया है, जिसकी सफलता की कामना शिक्षक कर रहे हैं।
वर्ष 1989 में गोरखपुर से काटकर महराजगंज जनपद की स्थापना की गई। शिक्षक संगठन से जुड़े लोगों की मानें तो उस समय 1500 रुपये की कटौती शिक्षकों के जीपीएफ मद में होती थी।
विज्ञापन
जब जनपद अलग हुआ उस समय कटौती 12 करोड़ रुपये के लगभग थी। नियमत के अनुसार यह राशि जिले को आंतरित होनी चाहिए, जिससे शिक्षक इसका उपयोग कर सकें। लेकिन यह अबतक नहीं हुआ। जिन शिक्षकों की यह कटौती राशि है, उसमें से तमाम सेवानिवृत होने के साथ मृत्यु को प्राप्त हो गए, लेकिन कटौती की राशि न उन्हें और न ही उनके परिवार को ही मिल सकी।
विज्ञापन
यह राशि 100 करोड़ रुपये तक जा पहुंची है, लेकिन जिले को आंतरित न होने के कारण इसका उपयोग न तो शिक्षक कर सके हैं और न ही उनके परिवार को इसका लाभ मिल सका है। विभाग और सीडीओ ने इसे लेकर प्रयास शुरू किया है, जिसकी सफलता की कामना शिक्षक कर रहे हैं।
विज्ञापन
वर्ष 1989 में गोरखपुर से काटकर महराजगंज जनपद की स्थापना की गई। शिक्षक संगठन से जुड़े लोगों की मानें तो उस समय 1500 रुपये की कटौती शिक्षकों के जीपीएफ मद में होती थी।
विज्ञापन
जब जनपद अलग हुआ उस समय कटौती 12 करोड़ रुपये के लगभग थी। नियमत के अनुसार यह राशि जिले को आंतरित होनी चाहिए, जिससे शिक्षक इसका उपयोग कर सकें। लेकिन यह अबतक नहीं हुआ। जिन शिक्षकों की यह कटौती राशि है, उसमें से तमाम सेवानिवृत होने के साथ मृत्यु को प्राप्त हो गए, लेकिन कटौती की राशि न उन्हें और न ही उनके परिवार को ही मिल सकी।