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Maharajganj News: लिट्रेचर चयन में अंग्रेजी का लहराया परचम, हिंदी पीछे
Wed, 16 Jul 2025 01:20 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Wed, 16 Jul 2025 01:20 AM IST
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महराजगंज। स्नातक में प्रवेश प्रक्रिया महाविद्यालय व डिग्री काॅलेज, पीजी काॅलेज में इन दिनों गतिमान है। कला संवर्ग में विषय चयन में पहले की अपेक्षा इस बार बदलाव देखने को मिल रहा।
डाॅ. आंबेडकर राजकीय महाविद्यालय धनेवा-धनेई में कला संवर्ग में राजनीति शास्त्र प्रवेश लेने वालों की पहली पसंद है, जबकि पहले समाजशास्त्र के प्रति अधिक रुझान होता था। इसके अलावा प्राचीन इतिहास के प्रति भी रुचि देखी जा रही है।
इसके पीछे कारण जानने का प्रयास करें तो अब सिर्फ उत्तीर्ण होने के लिए विषय चयन विद्यार्थी नहीं कर रहे, बल्कि विषय में क्या भविष्य है इसपर भी फोकस कर रहे हैं। लिट्रेचर चयन में हिंदी की जगह अंग्रेजी का दबदबा इस बार देखा जा रहा है।
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स्नातक पाठ्यक्रम की प्रवेश प्रक्रिया प्रभावी है। इस बार प्रवेश से पहले पंजीकरण प्रक्रिया अनिवार्य की गई थी। 30 जून तक समर्थ पोर्टल पर पंजीकरण कराने के उपरांत ही प्रवेश की शर्त ने प्रवेश लेने की प्रक्रिया धीमी कर रखी है। बावजूद डाॅ. आंबेडकर राजकीय महाविद्यालय में प्रवेश प्रक्रिया तेज बनी हुई है। यहां स्नातक स्तर पर कला, विज्ञान व व्यवसायिक वर्ग की 320 सीटों की दर से 960 सीट तय है, जिनमें से 513 सीटों पर प्रवेश पूर्ण हो चुका है।
वाणिज्य व विज्ञान के पाठ्यक्रम तो लगभग तय हैन, लेकिन कला वर्ग में जहां पहले ऐसे विषय चुनने का चलन था जिसमें अतिरिक्त श्रम करने की जरूरत न हो, लेकिन इस वर्ष विषय चयन में बदलाव देखने को मिल रहा है। पहले लिट्रेचर पर हिंदी पसंदीदा था, लेकिन इस बार कला संवर्ग में हुए 180 प्रवेश में 130 ने लिट्रेचर अंग्रेजी चयन किया है।
50 की संख्या में ही विद्यार्थियों ने हिंदी का चयन किया है। 70 विद्यार्थियों ने राजनीति शास्त्र विषय चयन किया है, लेकिन समाजशास्त्र सिर्फ 35 ने ही चयनित किया। प्राचीन इतिहास को 43 ने पसंद किया है, जबकि भूगोल को 23 ने तवज्जो दिया है। कला संवर्ग में अभी 140 सीटों पर प्रवेश होना है। वहीं विज्ञान व व्यावसायिक में किसी विशेष परिवर्तन की स्थिति नहीं देखी जा रही।
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पिछली बार की तुलना में इस बार पंजीकरण के बाद प्रवेश देने का नियम प्रभावी होने के कारण प्रवेश लेने की रफ्तार सुस्त है। फिर भी हमारे यहां की स्थिति प्रवेश में अन्य की तुलना में ठीक है। कला संवर्ग में अबतक हुए प्रवेश के मुताबिक लिट्रेचर में अंग्रेजी के साथ राजनीति शास्त्र व प्राचीन इतिहास की डिमांड अधिक है।
-डाॅ. अमित कुमार गौड़, प्राचार्य, डाॅ. भीमराव आंबेडकर राजकीय महाविद्यालय
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डाॅ. आंबेडकर राजकीय महाविद्यालय धनेवा-धनेई में कला संवर्ग में राजनीति शास्त्र प्रवेश लेने वालों की पहली पसंद है, जबकि पहले समाजशास्त्र के प्रति अधिक रुझान होता था। इसके अलावा प्राचीन इतिहास के प्रति भी रुचि देखी जा रही है।
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इसके पीछे कारण जानने का प्रयास करें तो अब सिर्फ उत्तीर्ण होने के लिए विषय चयन विद्यार्थी नहीं कर रहे, बल्कि विषय में क्या भविष्य है इसपर भी फोकस कर रहे हैं। लिट्रेचर चयन में हिंदी की जगह अंग्रेजी का दबदबा इस बार देखा जा रहा है।
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स्नातक पाठ्यक्रम की प्रवेश प्रक्रिया प्रभावी है। इस बार प्रवेश से पहले पंजीकरण प्रक्रिया अनिवार्य की गई थी। 30 जून तक समर्थ पोर्टल पर पंजीकरण कराने के उपरांत ही प्रवेश की शर्त ने प्रवेश लेने की प्रक्रिया धीमी कर रखी है। बावजूद डाॅ. आंबेडकर राजकीय महाविद्यालय में प्रवेश प्रक्रिया तेज बनी हुई है। यहां स्नातक स्तर पर कला, विज्ञान व व्यवसायिक वर्ग की 320 सीटों की दर से 960 सीट तय है, जिनमें से 513 सीटों पर प्रवेश पूर्ण हो चुका है।
वाणिज्य व विज्ञान के पाठ्यक्रम तो लगभग तय हैन, लेकिन कला वर्ग में जहां पहले ऐसे विषय चुनने का चलन था जिसमें अतिरिक्त श्रम करने की जरूरत न हो, लेकिन इस वर्ष विषय चयन में बदलाव देखने को मिल रहा है। पहले लिट्रेचर पर हिंदी पसंदीदा था, लेकिन इस बार कला संवर्ग में हुए 180 प्रवेश में 130 ने लिट्रेचर अंग्रेजी चयन किया है।
50 की संख्या में ही विद्यार्थियों ने हिंदी का चयन किया है। 70 विद्यार्थियों ने राजनीति शास्त्र विषय चयन किया है, लेकिन समाजशास्त्र सिर्फ 35 ने ही चयनित किया। प्राचीन इतिहास को 43 ने पसंद किया है, जबकि भूगोल को 23 ने तवज्जो दिया है। कला संवर्ग में अभी 140 सीटों पर प्रवेश होना है। वहीं विज्ञान व व्यावसायिक में किसी विशेष परिवर्तन की स्थिति नहीं देखी जा रही।
पिछली बार की तुलना में इस बार पंजीकरण के बाद प्रवेश देने का नियम प्रभावी होने के कारण प्रवेश लेने की रफ्तार सुस्त है। फिर भी हमारे यहां की स्थिति प्रवेश में अन्य की तुलना में ठीक है। कला संवर्ग में अबतक हुए प्रवेश के मुताबिक लिट्रेचर में अंग्रेजी के साथ राजनीति शास्त्र व प्राचीन इतिहास की डिमांड अधिक है।
-डाॅ. अमित कुमार गौड़, प्राचार्य, डाॅ. भीमराव आंबेडकर राजकीय महाविद्यालय