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Maharajganj News: जिला कारागार में कमाई...परिजनों का हालचाल ले रहे बंदी
Tue, 25 Mar 2025 01:07 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Tue, 25 Mar 2025 01:07 AM IST
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महराजगंज। जिला कारागार में निरुद्ध बंदी जेल में साफ-सफाई और सब्जियों की देखभाल कर कमाई कर रहे हैं। उस कमाई से संचार माध्यम से अपनों से हाय हैलो कर रहे हैं।
जेल प्रशासन विचाराधीन कैदी को सप्ताह में दो बार तो दोषसिद्ध कैदियों को तीन बार बातचीत करने का मौका उपलब्ध करा रहा है।
अपनों से बातचीत करने से कैदी सजा काटने के दौरान अवसाद या अन्य मानसिक बीमारियों के चंगुल में फंसने से भी बच रहे हैं। जिला जेल में इस सुविधा के लिए फिनिक्स कंपनी ने डिजिटल संचार संयंत्र उपलब्ध कराया है, जिसमें टाइमिंग, कैदी की तरफ से दर्ज कराया गया नंबर, कालिंग डाटा इत्यादि फीड रहता है।
महराजगंज जिला कारागार में 779 बंदी निरुद्ध हैं। इनमें से 296 ऐसे हैं जिन्हें न्यायालय ने सजा सुना दी है। वहीं 483 कैदी अभी विचाराधीन हैं। इनमें 53 महिलाएं और चार बच्चे भी शामिल हैं। इन कैदियों को जेल प्रशासन कारागार के भीतर ही काम उपलब्ध कराकर कमाई का मौका देता है।
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गार्डेन में फूल पौधों की देखरेख, सिंचाई व कटिंग की जिम्मेदारी के साथ रसोई के लिए हरी मौसमी सब्जियों को उगाने व साफ-सफाई जैसे काम कैदियों को कमाई का जरिया देते हैं।
एक कैदी को उद्यान और सब्जी उगाने के लिए रोजाना 10 रुपये मिलते हैं। जेल की इस कमाई से कैदी अपने स्वजन से बातचीत करने की सुविधा का लाभ उठा रहे हैं।
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जेल प्रशासन विचाराधीन कैदी को सप्ताह में दो बार तो दोषसिद्ध कैदियों को तीन बार बातचीत करने का मौका उपलब्ध करा रहा है।
अपनों से बातचीत करने से कैदी सजा काटने के दौरान अवसाद या अन्य मानसिक बीमारियों के चंगुल में फंसने से भी बच रहे हैं। जिला जेल में इस सुविधा के लिए फिनिक्स कंपनी ने डिजिटल संचार संयंत्र उपलब्ध कराया है, जिसमें टाइमिंग, कैदी की तरफ से दर्ज कराया गया नंबर, कालिंग डाटा इत्यादि फीड रहता है।
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महराजगंज जिला कारागार में 779 बंदी निरुद्ध हैं। इनमें से 296 ऐसे हैं जिन्हें न्यायालय ने सजा सुना दी है। वहीं 483 कैदी अभी विचाराधीन हैं। इनमें 53 महिलाएं और चार बच्चे भी शामिल हैं। इन कैदियों को जेल प्रशासन कारागार के भीतर ही काम उपलब्ध कराकर कमाई का मौका देता है।
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गार्डेन में फूल पौधों की देखरेख, सिंचाई व कटिंग की जिम्मेदारी के साथ रसोई के लिए हरी मौसमी सब्जियों को उगाने व साफ-सफाई जैसे काम कैदियों को कमाई का जरिया देते हैं।
एक कैदी को उद्यान और सब्जी उगाने के लिए रोजाना 10 रुपये मिलते हैं। जेल की इस कमाई से कैदी अपने स्वजन से बातचीत करने की सुविधा का लाभ उठा रहे हैं।
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