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निजी वाहन के लिए वीआइपी नंबर लेने का मोहभंग
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निजी वाहन के लिए वीआइपी नंबर लेने का मोहभंग
महराजगंज। निजी वाहन के लिए वीआइपी नंबर लेने का मोह अब धीरे-धीरे कम हो रहा है। संभागीय परिवहन विभाग में वीआइपी नंबर लेने के लिए ऑनलाइन बिड की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है।
संभागीय परिवहन विभाग में पहले वीआइपी नंबर के लिए शुल्क निर्धारित था। निर्धारित धनराशि जमा करने के बाद वीआइपी नंबर जारी कर दिए जाते थे। इस व्यवस्था में बदलाव होने पर प्रक्रिया थोड़ी बढ़ गई। वीआइपी नंबरों के लिए ऑनलाइन बिड प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है। पूरी बिड प्रक्रिया तकरीबन एक सप्ताह के भीतर पूरी होती है। इसके बाद नंबर मिलता है। वीआइपी नंबर को पहले तीन दिन तक बुक कराया जाता है। उसके बाद ऑनलाइन ही बोली लगाई जाती है।
तीन दिन तक इसी तरह प्रक्रिया चलती है। इसके अगले दिन जो व्यक्ति सबसे ज्यादा बोली लगाता है, नंबर उसी को आवंटित कर दिया जाता है। ऑनलाइन बिड में कम से कम तीन लोगों का शामिल होना जरूरी है। उनमें से जो सबसे बड़ी बोली लगाता है, नंबर उसी को आवंटित कर दिया जाता है। ऑनलाइन प्रक्रिया में नंबर नहीं बिकने पर ऑफलाइन प्रक्रिया पूरी करने के बाद नंबर मिलता है।
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एआरटीओ आरसी भारतीय ने बताया कि वीआईपी नंबर को लेकर इन दिनों लोगों का रुझान कम हुआ है। निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बाद पूरी पारदर्शिता के साथ नंबर दिया जाता है। प्रयास रहता है कि वीआईपी नंबर लेने के लिए इच्छुक लोगों को कोई परेशानी न हो। नंबर लेने के लिए पूरी प्रक्रिया पारदर्शी है।
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महराजगंज। निजी वाहन के लिए वीआइपी नंबर लेने का मोह अब धीरे-धीरे कम हो रहा है। संभागीय परिवहन विभाग में वीआइपी नंबर लेने के लिए ऑनलाइन बिड की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है।
संभागीय परिवहन विभाग में पहले वीआइपी नंबर के लिए शुल्क निर्धारित था। निर्धारित धनराशि जमा करने के बाद वीआइपी नंबर जारी कर दिए जाते थे। इस व्यवस्था में बदलाव होने पर प्रक्रिया थोड़ी बढ़ गई। वीआइपी नंबरों के लिए ऑनलाइन बिड प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है। पूरी बिड प्रक्रिया तकरीबन एक सप्ताह के भीतर पूरी होती है। इसके बाद नंबर मिलता है। वीआइपी नंबर को पहले तीन दिन तक बुक कराया जाता है। उसके बाद ऑनलाइन ही बोली लगाई जाती है।
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तीन दिन तक इसी तरह प्रक्रिया चलती है। इसके अगले दिन जो व्यक्ति सबसे ज्यादा बोली लगाता है, नंबर उसी को आवंटित कर दिया जाता है। ऑनलाइन बिड में कम से कम तीन लोगों का शामिल होना जरूरी है। उनमें से जो सबसे बड़ी बोली लगाता है, नंबर उसी को आवंटित कर दिया जाता है। ऑनलाइन प्रक्रिया में नंबर नहीं बिकने पर ऑफलाइन प्रक्रिया पूरी करने के बाद नंबर मिलता है।
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एआरटीओ आरसी भारतीय ने बताया कि वीआईपी नंबर को लेकर इन दिनों लोगों का रुझान कम हुआ है। निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बाद पूरी पारदर्शिता के साथ नंबर दिया जाता है। प्रयास रहता है कि वीआईपी नंबर लेने के लिए इच्छुक लोगों को कोई परेशानी न हो। नंबर लेने के लिए पूरी प्रक्रिया पारदर्शी है।