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मुश्किल : प्राइवेट का किराया अधिक, रोडवेज बसों में लेटलतीफी का संकट
Mon, 25 Nov 2024 05:31 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Mon, 25 Nov 2024 05:31 AM IST
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महराजगंज। जिला मुख्यालय से अगर किसी को ट्रेन की सुविधा प्राप्त करनी हो तो निकटतम स्टेशन के विकल्प में घुघली और आनंदनगर ही है। लेकिन, यहां तक मुख्यालय से समय से पहुंचने की कोई गारंटी नहीं है। दोनों जगह जाने के लिए सिर्फ प्राइवेट साधनों का सहारा ही लेना पड़ेगा।
क्योंकि, घुघली के लिए जहां रोडवेज बस का संचालन ही नहीं किया जा रहा है। वहीं आनंदनगर (फरेंदा) के लिए महज दो रोडवेज बसें ही संचालित होती हैं। इसका भी कोई समय निर्धारित नहीं है।
जिला मुख्यालय से फरेंदा की राह मुश्किल बनी हुई है। इस रूट पर एक रोडवेज बस का संचालन सुबह आठ से 10 बजे के बीच किया जाता है। वहीं, दूसरी बस शाम पांच बजे के बाद जाती है। इसके बाद आने जाने के लिए प्राइवेट वाहनों का ही सहारा है।
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इनका किराया 50 रुपये है, जबकि रोडवेज से महज 44 रुपये लगते हैं। अतिरिक्त किराया देकर भी निश्चित समय पर पहुंचने की गारंटी नहीं है, क्योंकि पर्याप्त यात्री मिलने पर ही प्राइवेट वाहन आगे बढ़ते हैं। रोडवेज को भी आने-जाने का कोई समय नहीं है, जिसका वह फायदा उठाते हैं। फरेंदा निवासी विवेक उपाध्याय कहते हैं कि शाम के समय एक बस मुख्यालय से आती है।
उसके बाद तो प्राइवेट साधन भी मुश्किल से मिलता है। दिनेश तिवारी, नरेश, पवन ने कहा कि मुख्यालय से हर दो घंटे पर फरेंदा रूट की बस होनी चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं है रहा और लोगों को प्राइवेट वाहनों की तलाश करनी पड़ती है। महराजगंज डिपो के एआरएम सर्व जीत वर्मा ने कहा कि फरेंदा रुट पर शीघ्र बस बढ़ा दी जाएगी। डिपो को अगले माह पर्याप्त चालक मिलने वाले हैं।
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क्योंकि, घुघली के लिए जहां रोडवेज बस का संचालन ही नहीं किया जा रहा है। वहीं आनंदनगर (फरेंदा) के लिए महज दो रोडवेज बसें ही संचालित होती हैं। इसका भी कोई समय निर्धारित नहीं है।
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जिला मुख्यालय से फरेंदा की राह मुश्किल बनी हुई है। इस रूट पर एक रोडवेज बस का संचालन सुबह आठ से 10 बजे के बीच किया जाता है। वहीं, दूसरी बस शाम पांच बजे के बाद जाती है। इसके बाद आने जाने के लिए प्राइवेट वाहनों का ही सहारा है।
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इनका किराया 50 रुपये है, जबकि रोडवेज से महज 44 रुपये लगते हैं। अतिरिक्त किराया देकर भी निश्चित समय पर पहुंचने की गारंटी नहीं है, क्योंकि पर्याप्त यात्री मिलने पर ही प्राइवेट वाहन आगे बढ़ते हैं। रोडवेज को भी आने-जाने का कोई समय नहीं है, जिसका वह फायदा उठाते हैं। फरेंदा निवासी विवेक उपाध्याय कहते हैं कि शाम के समय एक बस मुख्यालय से आती है।
उसके बाद तो प्राइवेट साधन भी मुश्किल से मिलता है। दिनेश तिवारी, नरेश, पवन ने कहा कि मुख्यालय से हर दो घंटे पर फरेंदा रूट की बस होनी चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं है रहा और लोगों को प्राइवेट वाहनों की तलाश करनी पड़ती है। महराजगंज डिपो के एआरएम सर्व जीत वर्मा ने कहा कि फरेंदा रुट पर शीघ्र बस बढ़ा दी जाएगी। डिपो को अगले माह पर्याप्त चालक मिलने वाले हैं।