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Maharajganj News: नेपाल में भारतीय कपड़ों की मांग, तस्करों की चांदी

Mon, 01 Sep 2025 01:45 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 01 Sep 2025 01:45 AM IST
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Demand for Indian clothes in Nepal, smugglers are making a killing
महराजगंज/सोनौली। नेपाल में पर्व की तैयारी को लेकर कपड़ा तस्करों ने माल डंप कर लिया है। छोटे-छोटे पार्सल बना कर बड़े पैमाने पर कपड़ों की तस्करी हो रही है। नेपाल पुलिस अक्सर कपड़े बरामद कर रही है। बीते एक माह में 10 से ज्यादा बार नेपाल में कपड़ों को बरामद किया गया है। तस्कर पगडंडियों से कपड़ों को सरहद पार कर देते हैं। छोटे-छोटे पार्सल बना कर भैरहवा और बुटवल की गाड़ियों में रख दिया जाता है। जांच होने के बाद पकड़ा जाता है।
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नेपाल भैरहवा पुलिस ने बीते माह लाखों रुपये के तस्करी के कपड़े लावारिस बरामद किया था। सीमावर्ती क्षेत्र के पगडंडियों से त्योहार को देखते कपड़ों की तस्करी बड़े पैमाने पर हो रही है।
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सूत्रों की माने तो तस्कर कैरियर के माध्यम से कपड़े को नेपाल पहुंचा रहे हैं। नेपाल रूपनदेही जिले की पुलिस भारत से तस्करी कर लाए कपड़ो की बरामदगी करती है। इसमें तस्करों ने अब नया तरीका ढूंढ़ लिया है। छोटे-छोटे पार्सल बना कर कपड़ों को नेपाल पहुंचाया जाता है। इसके लिए महिलाओं और युवतियों का सहारा लिया जा रहा है। तस्करी के नए तरीके को नेपाल पुलिस अब समझ चुकी है। एक दो पीस से अधिक कपड़ा पाए जाने पर कपड़े को सीज कर दे रही है। नेपाल में कपड़े की बरामदगी बता रही है कि तस्करी बड़े पैमाने पर हो रही है। इसमें कुछ पकड़े जा रहे हैं और कुछ बच के निकल जा रहे हैं।
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भारत-नेपाल सीमा हमेशा धंधा करने वालों के लिए मुफीद रही है। जिले की खुली सीमा का लाभ उठा कर तस्कर आसानी से माल सीमा पार कर लेते हैं।
इस समय कपड़ों की तस्करी तेज है। खुनुवा, सुंडी, सोनौली, भगवानपुर, ठूठीबारी, झुलनीपुर आदि स्थानों से कपड़े की तस्करी होने की चर्चा है। तस्कर भारतीय बाजारों से सस्ते दर पर कपड़ों को खरीदकर नेपाल पहुंचा रहे हैं। सीमा खुली होने का धंधेबाज खूब लाभ उठा रहे हैं।
नेपाल में आगामी पर्व एवं त्योहार के कारण भारतीय कपड़ों की मांग बढ़ी है। पर्दे के पीछे तस्कर इस काम को कैरियरों के जरिए कर रहे हैं। सूत्रों की मानें तो तस्कर रात में अंधेरे का लाभ उठाकर नेपाल की ओर कपड़ों को लेकर चले जाते हैं। नौतनवा सोनौली के कुछ दुकानदार नेपाली ग्राहकों के आर्डर के कपड़े को छोटे-छोटे पार्सल बना कर कैरियर के माध्यम से कपड़ा भेज रहे हैं।
सूरत और दिल्ली के रेडीमेड कपड़ो की मांग: नेपाल में मांग के अनुसार, सूरत दिल्ली के अलावा गुजरात, लुधियाना से कपड़ों की खेप बॉर्डर तक आसानी से पहुंच रही है। तस्करों के नेटवर्क में गड़बड़ी होने पर पोल खुल जाती है तो सूचना कर्मियों तक पहुंचती है। यही वजह है कि अक्सर कपड़ों की बरामदगी होती रहती है। खास बात यह है कि पकड़े जाने पर सामान की जिम्मेदारी कोई नहीं लेता है।

कच्चे बिल पर कपड़ों की होती है बुकिंग: नेपाल में कपड़ा तस्करी के लिए एक गिरोह लगा हुआ है। गुजरात और दिल्ली से कच्चे बिल पर रेलवे और बस में कपड़ों की बुकिंग होती है। कपड़ा नेपाल सीमा पर पहुंचने के बाद नेपाल के प्रमुख सीमावर्ती क्षेत्र तक ट्रकों से गोरखपुर और फिर नौतनवा सोनौली, ठूठीबारी और सिसवा के गोदाम में डंप किया जाता है। एक से दो बंडल कपड़े को कैरियर नेपाल के सीमावर्ती गांव में डंप कर देते हैं।
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