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Maharajganj News: इलाज से लेकर जांच कराने तक मरीज माफिया की गहरी पैठ
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कार्रवाई के बाद जिला अस्पताल में नहीं दिखे दलाल, बाहर की दुकानों पर दवा खरीदने के लिए लगी रही भीड़
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। इलाज कराने से लेकर जांच कराने तक मरीज माफिया की गहरी पैठ है। दलाल मरीजों को अस्पताल में अच्छे डॉक्टर नहीं होने का झांसा देते हैं। सरकारी अस्पताल में दवा उपलब्ध नहीं होने की बात मरीजों को बताते हैं। झांसे में आने वाले मरीज अक्सर दलालों के चक्कर में फंस जाते हैं। इस संबंध में जिला अस्पताल के फार्मासिस्ट ने पुलिस को तहरीर दी थी। जिसके बाद तीन दलालों को दबोचा गया था। इस वजह से बृहस्पतिवार को जिला अस्पताल में दलालों का झुंड नहीं दिखा। हालांकि अस्पताल के बाहर की दुकानों पर दवा खरीदने वालों की भीड़ लगी रही।
जिला अस्पताल के फार्मासिस्ट साकेत बिहारी सिंह की तहरीर के अनुसार, आए दिन अस्पताल पर सूचना मिल रही थी कि मरीजों के साथ कुछ दलाल यह कहकर भड़काते हैं कि सरकारी अस्पताल में अच्छे डॉक्टर नहीं है। यहां पर अच्छा इलाज नहीं होता है और न ही अच्छी जांचें होती हैं। मरीजों को बहला फुसला करके अपनी बातों में फंसा कर निजी अस्पताल में इलाज कराने के लिए भेजते हैं। जांच भी सरकारी अस्पताल में न कराते हुए प्राइवेट पैथाेलाजी में कराने के लिए बाध्य करते हैं।
मरीजों को प्राइवेट पैथाेलाॅजी में जांच कराने के लिए दबाव भी डालते हैं। दवाओं के लिए प्राइवेट में अच्छी दवा दिलाने के लिए झांसा देते हैं। मरीजों से सरकारी अस्पताल में जांच व फ्री इलाज के लिए पैसा भी लेते हैं। इसके बाद 25 अक्तूबर को जांच टीम ने इसकी पड़ताल की तो सच्चाई सामने आ गई। अस्पताल में आने वाले मरीजों से बात करने वाले लोगों की निगरानी टीम करने लगी। तभी एक मरीज इलाज के लिए अस्पताल के अन्दर आया। जिसको दो-तीन व्यक्तियों (दलालों ) द्वारा घेर लिया गया और मरीज से जबरदस्ती प्राइवेट अस्पताल में जाने के लिए तीनों व्यक्तियों द्वारा दबाव डाले जाने लगा।
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यह कहते सुना गया कि सरकारी अस्पताल में अच्छे डाक्टर नहीं होते हैं और न ही यहां पर अच्छी जांचे होती हैं, इससे कम पैसे में प्राइवेट अस्पताल में हम लोग इलाज करा देंगे और जांच में भी बहुत कम पैसा लगेग। जिसपर टीम को विश्वास हो गया कि यह तीनों वही दलाल हैं, जो आए दिन मरीजों को सरकारी अस्पताल के प्रति भड़का करके प्राइवेट अस्पताल में जाने के लिए बाध्य करते हैं। जिसके बाद टीम के सदस्य दलालों के पास पहुंचे। तीनों वहां से हटने की कोशिश करने लगे, लेकिन दबोच लिए गए।
तीनों आरोपियों से अस्पताल में उपस्थित होने का कारण पूछा गया तो तीनों ने घबराते हुए बताया कि साहब हम लोग यहां अस्पताल में प्रतिदिन आते हैं। मरीजों को निजी अस्पताल में ले जाते है और उनकी जांच भी निजी पैथाेलाजी से कराते हैं, जहां पर अच्छा कमीशन मिलता है।
सूत्रों की मानें तो जिला अस्पताल के सामने की दुकानों पर कमीशन का रजिस्टर बनाया गया है। वहां पर शाम में आसपास के दुकानदार भी हिसाब देते हैं कि कितना किस डॉक्टर के पर्चे पर दवा बिकी है और फिर उसका हिसाब-किताब होता है। वहीं एक दुकान ऐसी भी है जहां शाम ढलते दलाल पहुंच जाते थे, वहां अब कोई नजर नहीं आ रहा है।
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एक-एक कर कलई खुलने लगी तो पूरा खेल भी उजागर हो गया
-- मरीज माफिया की गहरी पैठ होने की वजह से मरीजों को मुफ्त इलाज और दवा के लिए भी रुपये देने पड़ते हैं। यह सब इतने सलीके से होता है कि ठगे जाने वाला मरीज भी खुद को खुशनसीब समझता है कि इस भीड़ में उसका सस्ते में उपचार हो गया और दोबारा नहीं आना पड़ा। शायद यही वजह है कि वह कभी भी शिकायत के लिए आगे नहीं आता, लेकिन अब जब मरीज माफिया के गिरोह की शिकायत पुलिस तक पहुंची और एक-एक कर कलई खुलने लगी तो पूरा खेल भी उजागर हो गया। अब कोई दलाल नजर नहीं आ रहा है।
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अस्पताल में निगरानी बढ़ा दी गई है। पर्याप्त दवाएं उपलब्ध हैं। सीसीटीवी कैमरे के जरिए अस्पताल परिसर की निगरानी की जा रही है। अगर कोई अनावश्यक घूमता मिला तो पूछताछ के बाद कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. एपी भागर्व, सीएमएस
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संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। इलाज कराने से लेकर जांच कराने तक मरीज माफिया की गहरी पैठ है। दलाल मरीजों को अस्पताल में अच्छे डॉक्टर नहीं होने का झांसा देते हैं। सरकारी अस्पताल में दवा उपलब्ध नहीं होने की बात मरीजों को बताते हैं। झांसे में आने वाले मरीज अक्सर दलालों के चक्कर में फंस जाते हैं। इस संबंध में जिला अस्पताल के फार्मासिस्ट ने पुलिस को तहरीर दी थी। जिसके बाद तीन दलालों को दबोचा गया था। इस वजह से बृहस्पतिवार को जिला अस्पताल में दलालों का झुंड नहीं दिखा। हालांकि अस्पताल के बाहर की दुकानों पर दवा खरीदने वालों की भीड़ लगी रही।
जिला अस्पताल के फार्मासिस्ट साकेत बिहारी सिंह की तहरीर के अनुसार, आए दिन अस्पताल पर सूचना मिल रही थी कि मरीजों के साथ कुछ दलाल यह कहकर भड़काते हैं कि सरकारी अस्पताल में अच्छे डॉक्टर नहीं है। यहां पर अच्छा इलाज नहीं होता है और न ही अच्छी जांचें होती हैं। मरीजों को बहला फुसला करके अपनी बातों में फंसा कर निजी अस्पताल में इलाज कराने के लिए भेजते हैं। जांच भी सरकारी अस्पताल में न कराते हुए प्राइवेट पैथाेलाजी में कराने के लिए बाध्य करते हैं।
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मरीजों को प्राइवेट पैथाेलाॅजी में जांच कराने के लिए दबाव भी डालते हैं। दवाओं के लिए प्राइवेट में अच्छी दवा दिलाने के लिए झांसा देते हैं। मरीजों से सरकारी अस्पताल में जांच व फ्री इलाज के लिए पैसा भी लेते हैं। इसके बाद 25 अक्तूबर को जांच टीम ने इसकी पड़ताल की तो सच्चाई सामने आ गई। अस्पताल में आने वाले मरीजों से बात करने वाले लोगों की निगरानी टीम करने लगी। तभी एक मरीज इलाज के लिए अस्पताल के अन्दर आया। जिसको दो-तीन व्यक्तियों (दलालों ) द्वारा घेर लिया गया और मरीज से जबरदस्ती प्राइवेट अस्पताल में जाने के लिए तीनों व्यक्तियों द्वारा दबाव डाले जाने लगा।
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यह कहते सुना गया कि सरकारी अस्पताल में अच्छे डाक्टर नहीं होते हैं और न ही यहां पर अच्छी जांचे होती हैं, इससे कम पैसे में प्राइवेट अस्पताल में हम लोग इलाज करा देंगे और जांच में भी बहुत कम पैसा लगेग। जिसपर टीम को विश्वास हो गया कि यह तीनों वही दलाल हैं, जो आए दिन मरीजों को सरकारी अस्पताल के प्रति भड़का करके प्राइवेट अस्पताल में जाने के लिए बाध्य करते हैं। जिसके बाद टीम के सदस्य दलालों के पास पहुंचे। तीनों वहां से हटने की कोशिश करने लगे, लेकिन दबोच लिए गए।
तीनों आरोपियों से अस्पताल में उपस्थित होने का कारण पूछा गया तो तीनों ने घबराते हुए बताया कि साहब हम लोग यहां अस्पताल में प्रतिदिन आते हैं। मरीजों को निजी अस्पताल में ले जाते है और उनकी जांच भी निजी पैथाेलाजी से कराते हैं, जहां पर अच्छा कमीशन मिलता है।
सूत्रों की मानें तो जिला अस्पताल के सामने की दुकानों पर कमीशन का रजिस्टर बनाया गया है। वहां पर शाम में आसपास के दुकानदार भी हिसाब देते हैं कि कितना किस डॉक्टर के पर्चे पर दवा बिकी है और फिर उसका हिसाब-किताब होता है। वहीं एक दुकान ऐसी भी है जहां शाम ढलते दलाल पहुंच जाते थे, वहां अब कोई नजर नहीं आ रहा है।
एक-एक कर कलई खुलने लगी तो पूरा खेल भी उजागर हो गया
अस्पताल में निगरानी बढ़ा दी गई है। पर्याप्त दवाएं उपलब्ध हैं। सीसीटीवी कैमरे के जरिए अस्पताल परिसर की निगरानी की जा रही है। अगर कोई अनावश्यक घूमता मिला तो पूछताछ के बाद कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. एपी भागर्व, सीएमएस