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Maharajganj News: चक्रवात ने छीनी तैयार फसल, गेहूं के पिछड़ने की चिंता
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खेत में गिरी फसल।
महराजगंज। बेमौसम बारिश ने किसानों की कमर तोड़ने जैसा कार्य किया है। धान की कटाई पूरी होती, इससे पहले मोंथा चक्रवात ने किसानों को बड़ा आघात दिया है। खेतों में धान की तैयार फसल जो पिछले सप्ताह तक लहलहाते हुए किसानों की उम्मीद मजबूत कर रही थी, उस उम्मीद को मोंथा ने खेत में ही पस्त कर दिया है। स्थिति यह है कि जिनकी फसल बारिश में ध्वस्त हो गई है उनकी उम्मीद टूट रही। चक्रवाती तूफान से हुए नुकसान के आकलन में जुटा कृषि महकमा शुरुआती चरण में 50 फीसदी नुकसान की आशंका व्यक्त कर रहा।
जिले के किसान इस बार मौसम के हाथों छले गए। खरीफ सीजन में जब धान की बेहन डालकर रोपाई के लिए मानसूनी बारिश का इंतजार था, उस वक्त पश्चिमी यूपी मानसून का लुत्फ पा रहा था। नहर व निजी संसाधनों के सहारे किसी तरह धान की रोपाई कर किसान इस आस में थे कि देर सबेर बारिश फसल संभाल लेगी, लेकिन यह उम्मीद भी बारिश के लिए ख्यातिलब्ध सावन में टूटती गई जब इस माह में भी सिर्फ छिटपुट बारिश ही जनपद के हिस्से आई।
पंपिंग सेट के सहारे महंगे डीजल की व्यवस्था कर किसी तरह रोपाई संभालने का प्रयास किसानों ने किया तो उसी वक्त खाद की मारामारी ने उन्हें सोसाइटी की कतारों में खड़ा रहने विवश किया। तमाम असुविधाओं को झेलते हुए किसी तरह धान की फसल तैयार हुई।
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पिछले सप्ताह तक खेत में कटने योग्य लहलहाती फसल देख किसान सारी दुश्वारियों को भूलकर मंसूबे बना रहे थे, लेकिन अब सभी मंसूबे खेत में गिरी धान की फसल के साथ ध्वस्त हो चुके हैं।
फरेंदा, बृजमनगंज, धानी, लक्ष्मीपुर, नौतनवां, निचलौल ब्लाॅक में बड़े पैमाने पर खेतों में पस्त दिख रहे हैं। कृषि विभाग की टीम संयुक्त नुकसान के आकलन में जुटी है, लेकिन अभी भी बारिश का दौर प्रभावी होने के कारण इसमें असुविधा बताई जा रही है। वास्तविक तस्वीर तभी साफ होगी जब बारिश का दौर थमेगा, हालांकि शुरुआती आकलन में 50 फीसदी तक नुकसान की आशंका व्यक्त की जा रही।
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जिले के किसान इस बार मौसम के हाथों छले गए। खरीफ सीजन में जब धान की बेहन डालकर रोपाई के लिए मानसूनी बारिश का इंतजार था, उस वक्त पश्चिमी यूपी मानसून का लुत्फ पा रहा था। नहर व निजी संसाधनों के सहारे किसी तरह धान की रोपाई कर किसान इस आस में थे कि देर सबेर बारिश फसल संभाल लेगी, लेकिन यह उम्मीद भी बारिश के लिए ख्यातिलब्ध सावन में टूटती गई जब इस माह में भी सिर्फ छिटपुट बारिश ही जनपद के हिस्से आई।
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पंपिंग सेट के सहारे महंगे डीजल की व्यवस्था कर किसी तरह रोपाई संभालने का प्रयास किसानों ने किया तो उसी वक्त खाद की मारामारी ने उन्हें सोसाइटी की कतारों में खड़ा रहने विवश किया। तमाम असुविधाओं को झेलते हुए किसी तरह धान की फसल तैयार हुई।
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पिछले सप्ताह तक खेत में कटने योग्य लहलहाती फसल देख किसान सारी दुश्वारियों को भूलकर मंसूबे बना रहे थे, लेकिन अब सभी मंसूबे खेत में गिरी धान की फसल के साथ ध्वस्त हो चुके हैं।
फरेंदा, बृजमनगंज, धानी, लक्ष्मीपुर, नौतनवां, निचलौल ब्लाॅक में बड़े पैमाने पर खेतों में पस्त दिख रहे हैं। कृषि विभाग की टीम संयुक्त नुकसान के आकलन में जुटी है, लेकिन अभी भी बारिश का दौर प्रभावी होने के कारण इसमें असुविधा बताई जा रही है। वास्तविक तस्वीर तभी साफ होगी जब बारिश का दौर थमेगा, हालांकि शुरुआती आकलन में 50 फीसदी तक नुकसान की आशंका व्यक्त की जा रही।