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Maharajganj News: बसों और ट्रेनों में उमड़ी भीड़ सीट के लिए धक्का-मुक्की

Sat, 09 Aug 2025 12:58 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज Updated Sat, 09 Aug 2025 12:58 AM IST
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Crowds gathered in buses and trains, jostling for seats.
बस स्टेशन पर रोडवेज बस में चढ़ने के लिए धक्का मुक्की करते यात्री।
महराजगंज/सिसवा बाजार। रक्षाबंधन पर्व पर घर जाने के लिए बसों और ट्रेनों में शुक्रवार को भीड़ उमड़ पड़ी। एक सीट के लिए यात्रियों को धक्का-मुक्की करनी पड़ी। मुफ्त यात्रा शुरू होने से बसों में खचाखच भीड़ रही। ट्रेनों में आलम यह रहा कि दिल्ली, मुंबई, कोलकाता आदि बड़े शहरों से आने वाले लोगों को खड़े होकर सफर करना पड़ा।
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शुक्रवार को दोपहर करीब 12 बजे गोरखपुर से एक रोडवेज बस आई। बस यात्रियों से खचाखच भरी थी। सीट न मिलने से ज्यादातर यात्री खड़े रहे। वहीं स्टेशन पर बस रूकते ही उसमें बैठने की होड़ लग गई। खिड़की से बैग रूमाल आदि रखकर सीट सुरक्षित करने का प्रयास किया गया, लेकिन इसमें कोई कामयाबी नहीं मिल सकी। क्योंकि भीड़ के कारण जिसे जहां जगह मिली वहीं बैठ गया।
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इसे लेकर कुछ यात्रियों में नोकझोंक भी हुई। दिनभर यह क्रम जारी रहा। निचलौल जा रहीं संजना ने बताया कि मुफ्त यात्रा तो ठीक है, लेकिन बसों की संख्या भी बढ़नी चाहिए। भीड़ के कारण बैठने के लिए सीट नहीं मिल रहा है। गोवर्धन प्रसाद ने बताया कि भीड़ के कारण खड़े होकर यात्रा करनी पड़ रही है। एआरएम सर्वजीत वर्मा ने बताया कि व्यवस्था बेहतर बनाने का प्रयास जारी है। सभी रूटों पर बसें संचालित हैं। सिसवा रेलवे स्टेशन पर भी यात्रियों की भीड़ लगी रही। स्टेशन पर रेल टिकट के लिए मारामारी रही। ट्रेनों में बेतहाशा भीड़ से यात्री परेशान रहे। आरक्षित बोगी भी जनरल नजर आयी। रक्षाबंधन के एक दिन पूर्व जब सत्याग्रह एक्सप्रेस सिसवा रेलवे स्टेशन पर रुकी तो उतरने वाले यात्रियों का हाल बेहाल रहा। भूख और प्यास से परेशान यात्री जब गाड़ी से स्टेशन पर उतरे तो राहत की सांस ली।
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सबसे ज्यादा बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की हालत खराब थी। यात्रियों का कहना है कि जनरल और आरक्षित बोगियां सब एक समान हो गई हैं। फिर भी जिस स्टेशन पर गाड़ी रूकती थी तो सैकड़ों की संख्या में लोग गाड़ी में चढ़ने का प्रयास करते थे। किसी को सफलता मिल जाती थी तो कोई स्टेशन पर ही खड़ा रह जाता था। बंजारीपट्टी निवासी आलोक ने बताया कि बृहस्पतिवार को दिल्ली से गाड़ी भरकर चली थी। उसके बाद भी जिस स्टेशन पर गाड़ी रूकती थी यात्रियों का हुजूम गाड़ी में चढ़ने के लिए जद्दोजहद करने लगता था। बल्हिखोर निवासी राजेंद्र का कहना है कि बोगी के अंदर का हाल ये था कि इंसान को हिलने तक की जगह नहीं थी जो जहां बैठ गया वहां से उठना मुश्किल था। कैमा निवासी रविंद्र का कहना था गाड़ी में भीड़ की वजह से खाना नहीं खा पाया। बगहा बिहार निवासी मृत्युंजय चौबे ने बताया कि रक्षाबंधन पर्व पर घर पहुंचने की बेताबी ने गाड़ियों में बुरा हाल कर दिया है। छोटे-छोटे बच्चों और बुजुर्गों के लिए ये यात्रा सबसे दुखदायी है।
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