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Maharajganj News: 30 साल पुराने आर्म्स एक्ट के मामले में दोषी को सजा
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अदालत का लोगो लगाएं
-जुर्माना न देने पर 10 दिन का होगा अतिरिक्त कारावास
-1991 में दर्ज हुआ था तमंचा बरामदगी का मुकदमा
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। करीब 35 साल पुराने तमंचा बरामदगी के मामले में दीवानी न्यायालय फरेंदा की अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है। न्यायालय ने जेल में बिताई गई अवधि के साथ 500 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड नहीं देने पर 10 दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
मामला फरेंदा थाने से संबंधित है। आरोपी की पहचान अवध उर्फ राम अवध निवासी गोपालपुर, थाना कैंपियरगंज, जनपद गोरखपुर के रूप में हुई है। उसके खिलाफ वर्ष 1991 में फरेंदा थाने में प्राथमिकी दर्ज किया गया था। मामला आर्म्स एक्ट की धारा से संबंधित था।
अभियोजन के मुताबिक 11 अक्टूबर 1991 को आरोपी के पास से तमंचा बरामद हुआ था। घटना के बाद पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना शुरू की और आरोपी के खिलाफ 21 दिसंबर 1991 को न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया गया। लंबे समय तक चले न्यायिक प्रक्रिया के बाद मामले में अदालत ने आरोपी को दोषी माना।
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दीवानी न्यायालय फरेंदा ने सजा का आदेश सुनाया। न्यायालय ने आरोपी को जेल में बिताई गई अवधि की सजा के साथ 500 रुपये का अर्थदंड लगाया। अर्थदंड जमा नहीं करने पर 10 दिन के अतिरिक्त कारावास का आदेश दिया गया। मामले में वादी पक्ष की ओर से यशपाल सिंह, तत्कालीन उपनिरीक्षक वीडी सिंह विवेचक रहे।
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-जुर्माना न देने पर 10 दिन का होगा अतिरिक्त कारावास
-1991 में दर्ज हुआ था तमंचा बरामदगी का मुकदमा
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। करीब 35 साल पुराने तमंचा बरामदगी के मामले में दीवानी न्यायालय फरेंदा की अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है। न्यायालय ने जेल में बिताई गई अवधि के साथ 500 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड नहीं देने पर 10 दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
मामला फरेंदा थाने से संबंधित है। आरोपी की पहचान अवध उर्फ राम अवध निवासी गोपालपुर, थाना कैंपियरगंज, जनपद गोरखपुर के रूप में हुई है। उसके खिलाफ वर्ष 1991 में फरेंदा थाने में प्राथमिकी दर्ज किया गया था। मामला आर्म्स एक्ट की धारा से संबंधित था।
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अभियोजन के मुताबिक 11 अक्टूबर 1991 को आरोपी के पास से तमंचा बरामद हुआ था। घटना के बाद पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना शुरू की और आरोपी के खिलाफ 21 दिसंबर 1991 को न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया गया। लंबे समय तक चले न्यायिक प्रक्रिया के बाद मामले में अदालत ने आरोपी को दोषी माना।
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दीवानी न्यायालय फरेंदा ने सजा का आदेश सुनाया। न्यायालय ने आरोपी को जेल में बिताई गई अवधि की सजा के साथ 500 रुपये का अर्थदंड लगाया। अर्थदंड जमा नहीं करने पर 10 दिन के अतिरिक्त कारावास का आदेश दिया गया। मामले में वादी पक्ष की ओर से यशपाल सिंह, तत्कालीन उपनिरीक्षक वीडी सिंह विवेचक रहे।