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Maharajganj: सामूहिक दुष्कर्म के मामले में दोषियों को छोड़ने का विरोध, बोले- गंभीरता को झुठलाने का प्रयास
Fri, 19 Aug 2022 10:43 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महराजगंज।
संवाद न्यूज एजेंसी, महराजगंज।
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 19 Aug 2022 10:43 AM IST
सार
जिलाध्यक्ष अशफाक हुसैन अंसारी ने कहा कि राज्य सरकार का यह तर्क है कि अपराध की प्रकृति के आधार पर इन्हें छोड़ा गया है। इसमें अपराध की गंभीरता को झुठलाने का प्रयास है, जबकि घटना जघन्य श्रेणी में है। राज्य सरकार का दूसरा तर्क है कि इन्हें अच्छे आचरण के आधार पर छोड़ा गया है, जो न्याय संगत नहीं है।
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कलेक्ट्रेट परिसर में डीएम को ज्ञापन देने जाते कांग्रेसी।संवाद
- फोटो : MAHARAJGANJ
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विस्तार
उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के जिला इकाई पदाधिकारियों ने बृहस्पतिवार को मुख्य न्यायाधीश सर्वोच्च न्यायालय को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा। कार्यकर्ताओं ने गुजरात में सामूहिक दुष्कर्म के एक मामले में रिहाई नीति के तहत 11 दोषियों को छोड़ने का विरोध जताया है।
जिलाध्यक्ष अशफाक हुसैन अंसारी ने कहा कि राज्य सरकार का यह तर्क है कि अपराध की प्रकृति के आधार पर इन्हें छोड़ा गया है। इसमें अपराध की गंभीरता को झुठलाने का प्रयास है, जबकि घटना जघन्य श्रेणी में है। राज्य सरकार का दूसरा तर्क है कि इन्हें अच्छे आचरण के आधार पर छोड़ा गया है, जो न्याय संगत नहीं है।
दोषियों को छोड़ा जाना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के विपरीत है। जिसका हर स्थिति में रक्षा करना न्यायतंत्र और राज्य की जिम्मेदारी है। दोषियों की रिहाई संविधान की भावना का भी उल्लंघन है, क्योंकि संविधान सिर्फ शब्दों से संचालित नहीं हो सकता। इस मौके पर आनंद कन्नौजिया, विनोद तिवारी, यूसुफ, योगेंद्र, रियासत, साबिर अली अंसारी, संदीप कन्नौजिया आदि मौजूद थे।
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जिलाध्यक्ष अशफाक हुसैन अंसारी ने कहा कि राज्य सरकार का यह तर्क है कि अपराध की प्रकृति के आधार पर इन्हें छोड़ा गया है। इसमें अपराध की गंभीरता को झुठलाने का प्रयास है, जबकि घटना जघन्य श्रेणी में है। राज्य सरकार का दूसरा तर्क है कि इन्हें अच्छे आचरण के आधार पर छोड़ा गया है, जो न्याय संगत नहीं है।
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दोषियों को छोड़ा जाना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के विपरीत है। जिसका हर स्थिति में रक्षा करना न्यायतंत्र और राज्य की जिम्मेदारी है। दोषियों की रिहाई संविधान की भावना का भी उल्लंघन है, क्योंकि संविधान सिर्फ शब्दों से संचालित नहीं हो सकता। इस मौके पर आनंद कन्नौजिया, विनोद तिवारी, यूसुफ, योगेंद्र, रियासत, साबिर अली अंसारी, संदीप कन्नौजिया आदि मौजूद थे।
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