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चिंता : लोगों की सेहत से खेल रहे फर्जी पैथालाॅजी सेंटर
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पैथलॉजी सील करता कर्मी।
महराजगंज। जिले में पंजीकृत पैथोलॉजी 83 हैं, लेकिन ढाई गुना संचालित हो रहे हैं। हैरानी की बात है कि इनकी रिपोर्ट सटीक नहीं होती है। इसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ता है। रिपोर्ट क्रॉस जांच करने पर अंतर आ जाता है। बावजूद इसके जिले में अवैध पैथाेलॉजी का संचालन धड़ल्ले से हो रहा है। भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हैं कि कार्रवाई से पहले धंधेबाजों को जानकारी हो जाती है।
बीते चार माह माह में पांच अवैध पैथाेलॉजी सील हो चुकी हैं। निजी अस्पतालों से साठगांठ करके जांच लिखवाते हैं। रिपोर्ट देने की एवज में रकम लेकर किनारा कस लेते हैं। जांच रिपोर्ट कितनी सटीक है, इसकी गारंटी नहीं रहती है। बीते एक सप्ताह पहले एक अल्ट्रासाउंड सेंटर पर जांच रिपोर्ट में बताया गया की पित्त की थैली में पथरी है। जबकि हकीकत यह थी पित्त की थैली ही नहीं थी, उसका ऑपरेशन हो चुका था, लेकिन उसमें पथरी दर्शा दी गई। इसे लेकर पीडि़त ने शिकायत नहीं की।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से दावा किया जाता है कि पंजीकरण में नियमों का सख्ती से पालन होता है। कार्रवाई के बाद भी यह अवैध धंधा बंद नहीं हो रहा है। पंजीकरण के दौरान शपथ पत्र, मौके पर हस्ताक्षर समेत फोटो भी लिया जाता है। मंगलवार को जिला अस्पताल के सामने दलाल मरीजों को बरगलाने में जुटे थे, लेकिन गनीमत रही कि मरीज के साथ आया उसका बेटा होशियार था, इस वजह से बगैर उसके झांसे में आए आगे बढ़ गया।
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सूत्रों के अनुसार जिले में 200 से अधिक पैथाेलॉजी संचालित हैं। चिकित्सक मरीजों को निजी पैथाेलॉजी पर ही जांच की सलाह देते हैं। वहीं, कुछ संचालक चिकित्सकों के आसपास ही घूमते रहते हैं, जो जांच का इशारा मिलते ही मरीज को अपने सेंटर पर ले जाते हैं। जहां जांच के नाम पर मरीजों से मोटी रकम ऐंठी जाती है।
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बीते चार माह माह में पांच अवैध पैथाेलॉजी सील हो चुकी हैं। निजी अस्पतालों से साठगांठ करके जांच लिखवाते हैं। रिपोर्ट देने की एवज में रकम लेकर किनारा कस लेते हैं। जांच रिपोर्ट कितनी सटीक है, इसकी गारंटी नहीं रहती है। बीते एक सप्ताह पहले एक अल्ट्रासाउंड सेंटर पर जांच रिपोर्ट में बताया गया की पित्त की थैली में पथरी है। जबकि हकीकत यह थी पित्त की थैली ही नहीं थी, उसका ऑपरेशन हो चुका था, लेकिन उसमें पथरी दर्शा दी गई। इसे लेकर पीडि़त ने शिकायत नहीं की।
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स्वास्थ्य विभाग की ओर से दावा किया जाता है कि पंजीकरण में नियमों का सख्ती से पालन होता है। कार्रवाई के बाद भी यह अवैध धंधा बंद नहीं हो रहा है। पंजीकरण के दौरान शपथ पत्र, मौके पर हस्ताक्षर समेत फोटो भी लिया जाता है। मंगलवार को जिला अस्पताल के सामने दलाल मरीजों को बरगलाने में जुटे थे, लेकिन गनीमत रही कि मरीज के साथ आया उसका बेटा होशियार था, इस वजह से बगैर उसके झांसे में आए आगे बढ़ गया।
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सूत्रों के अनुसार जिले में 200 से अधिक पैथाेलॉजी संचालित हैं। चिकित्सक मरीजों को निजी पैथाेलॉजी पर ही जांच की सलाह देते हैं। वहीं, कुछ संचालक चिकित्सकों के आसपास ही घूमते रहते हैं, जो जांच का इशारा मिलते ही मरीज को अपने सेंटर पर ले जाते हैं। जहां जांच के नाम पर मरीजों से मोटी रकम ऐंठी जाती है।