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Maharajganj News: तहसील में हर रोज भटकते फरियादी, नहीं दूर होती समस्या
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तहसील में हर रोज भटकते फरियादी, नहीं दूर होती समस्या
कोई लेखपाल को ढूंढते हुए पहुंचता है तो कोई हैसियत प्रमाण पत्र बनवाने के लिए लगा रहा चक्कर
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। सदर तहसील में प्रत्येक दिन समस्याओं को लेकर फरियादी आते हैं, लेकिन ज्यादातर मामलों में उनकी समस्याएं दूर नहीं हो पा रही है। सबकी अलग-अलग समस्या होती है। कोई लेखपाल को खोजता हुआ तहसील पहुंचता है तो कोई हैसियत प्रमाण पत्र बनवाने के लिए भटकता है। मंगलवार को तहसील में ऐसे तमाम लोग मिले, जो अपनी समस्याओं को लेकर प्रत्येक दिन इधर-उधर भटकते मिले।
सदर तहसील में पड़ताल के दौरान गेट पर झोला लेकर जाते हुए विंध्याचल प्रसाद मिले। वह मुजहना गांव से आए थे। लेखपाल से मुलाकात कर खसरा बनवाना था। उन्होंने कहा कि बाबू पांच दिन से खोज रहा हूं। सोचा तहसील में ही चलकर मुलाकात कर काम करा लूंगा। सुबह के करीब 11 बजे रहे थे। वह तेजी से गेट से आगे की ओर बढ़े। आगे बढ़ने पर बरामदे में दो लोग मिले। वे लोग आपस में बातचीत कर रहे थे। खारिज-दाखिल कराने की बात कर रहे। उनके पूछा भैया कहां से आए हैं, तो एक व्यक्ति ने कहा कि यह जानकर क्या करेंगे। आप को बता देंगे तो काम भी नहीं होगा। एक फाइल वैसे ही लटकी हुई है, ऊपर से हो हल्ला करने पर काम खराब हो जाएगा।
सीढ़ी पर चढ़ने के दौरान ज्ञानती देवी मिलीं। उन्होंने बताया कि खतौनी में नाम सुधार कराने के लिए दौड़ना पड़ रहा है। ऊपरी तल पर जाने के बाद समस्याओं से पीड़ित तमाम फरियादी अलग-अलग तरह की समस्या लेकर आए थे। कोई दलालों से काम कराने की बात कर रहा था तो कोई सीधे अपनी अर्जी लेकर आया था। सभी लोग अपना काम कराने में व्यस्त रहे। सामने से आर रहे एक लेखपाल ने बताया कि कामकाज में बहुत समस्या है। फील्ड से लेकर तहसील तक समस्याओं को झेलना पड़ रहा है। इसके बाद भी लोग आरोप लगाते रहते हैं।
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पैमाइश कराने के लिए बार बार तहसील का चक्कर लगा रहा हूं। कोई समस्या नहीं सुन रहा है। हमारी जमीन से विरोधी रास्ता निकलवाना चाहते हैं। गिट्टी गिराकर और झोपड़ी डालकर जमीन को कब्जा करने की कोशिश की जा रही है। वर्ष 2019 से लगातार दौड़ लगा रहा हूं। आश्वासनों की आस में वक्त गुजरता जा रहा है।
महेंद्र प्रसाद, गोपाला
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एक माह का वक्त गुजर गया, लेकिन खतौनी में गड़बड़ी दूर नहीं हुई। खतौनी में बल्ल शरण लिख दिया गया है, इसे आज तक ठीक नहीं किया गया। तहसील में आने पर कोई-कोई बहाना बनाकर घर भेज दिया जाता है। प्रत्येक दिन तहसील का चक्कर लगाते लगाते आजिज आ चुका हूं।
बल्लभ शरण, मुजहना खुर्द
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एक माह के अंदर कई बार आने वाली शिकायतों को चिह्नित किया जा रहा है। टीम बनाकर पूरी शिकायतों को निस्तारित कर दिया जाएगा। जन समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण कराया जा रहा है।
राजेश कुमार, तहसीलदार, सदर
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संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। सदर तहसील में प्रत्येक दिन समस्याओं को लेकर फरियादी आते हैं, लेकिन ज्यादातर मामलों में उनकी समस्याएं दूर नहीं हो पा रही है। सबकी अलग-अलग समस्या होती है। कोई लेखपाल को खोजता हुआ तहसील पहुंचता है तो कोई हैसियत प्रमाण पत्र बनवाने के लिए भटकता है। मंगलवार को तहसील में ऐसे तमाम लोग मिले, जो अपनी समस्याओं को लेकर प्रत्येक दिन इधर-उधर भटकते मिले।
सदर तहसील में पड़ताल के दौरान गेट पर झोला लेकर जाते हुए विंध्याचल प्रसाद मिले। वह मुजहना गांव से आए थे। लेखपाल से मुलाकात कर खसरा बनवाना था। उन्होंने कहा कि बाबू पांच दिन से खोज रहा हूं। सोचा तहसील में ही चलकर मुलाकात कर काम करा लूंगा। सुबह के करीब 11 बजे रहे थे। वह तेजी से गेट से आगे की ओर बढ़े। आगे बढ़ने पर बरामदे में दो लोग मिले। वे लोग आपस में बातचीत कर रहे थे। खारिज-दाखिल कराने की बात कर रहे। उनके पूछा भैया कहां से आए हैं, तो एक व्यक्ति ने कहा कि यह जानकर क्या करेंगे। आप को बता देंगे तो काम भी नहीं होगा। एक फाइल वैसे ही लटकी हुई है, ऊपर से हो हल्ला करने पर काम खराब हो जाएगा।
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सीढ़ी पर चढ़ने के दौरान ज्ञानती देवी मिलीं। उन्होंने बताया कि खतौनी में नाम सुधार कराने के लिए दौड़ना पड़ रहा है। ऊपरी तल पर जाने के बाद समस्याओं से पीड़ित तमाम फरियादी अलग-अलग तरह की समस्या लेकर आए थे। कोई दलालों से काम कराने की बात कर रहा था तो कोई सीधे अपनी अर्जी लेकर आया था। सभी लोग अपना काम कराने में व्यस्त रहे। सामने से आर रहे एक लेखपाल ने बताया कि कामकाज में बहुत समस्या है। फील्ड से लेकर तहसील तक समस्याओं को झेलना पड़ रहा है। इसके बाद भी लोग आरोप लगाते रहते हैं।
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पैमाइश कराने के लिए बार बार तहसील का चक्कर लगा रहा हूं। कोई समस्या नहीं सुन रहा है। हमारी जमीन से विरोधी रास्ता निकलवाना चाहते हैं। गिट्टी गिराकर और झोपड़ी डालकर जमीन को कब्जा करने की कोशिश की जा रही है। वर्ष 2019 से लगातार दौड़ लगा रहा हूं। आश्वासनों की आस में वक्त गुजरता जा रहा है।
महेंद्र प्रसाद, गोपाला
एक माह का वक्त गुजर गया, लेकिन खतौनी में गड़बड़ी दूर नहीं हुई। खतौनी में बल्ल शरण लिख दिया गया है, इसे आज तक ठीक नहीं किया गया। तहसील में आने पर कोई-कोई बहाना बनाकर घर भेज दिया जाता है। प्रत्येक दिन तहसील का चक्कर लगाते लगाते आजिज आ चुका हूं।
बल्लभ शरण, मुजहना खुर्द
एक माह के अंदर कई बार आने वाली शिकायतों को चिह्नित किया जा रहा है। टीम बनाकर पूरी शिकायतों को निस्तारित कर दिया जाएगा। जन समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण कराया जा रहा है।
राजेश कुमार, तहसीलदार, सदर