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Maharajganj News: नेपाल से चाइनीज सेब पगडंडियों के रास्ते पहुंच रहा भारतीय बाजार में
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महराजगंज। भारत-नेपाल की खुली सीमा से इन दिनों चाइनीज सेब की तस्करी हो रही है। भारत-नेपाल सीमा से सटे तराई के बाजार चाइनीज सेब से पटे हैं। आकार व आकृति में बड़े और चमकदार दिखने वाले इन सेब की मार्केट में मांग बढ़ी हुई है, जिसका तस्कर फायदा उठा रहे हैं और मुंहमांगा दाम लेकर लाभ अर्जित कर रहे हैं। नेपाल में 80 रुपये प्रति किलो मिलने वाला सेब भारतीय क्षेत्र में आसानी से 120 रुपये प्रति किलो बिक जाता है। तस्कर गोरखपुर की मंडी तक चाइनीज सेब पहुंचा रहे हैं।
चाइनीज सेब के तस्करी होने की पोल तीन अप्रैल को खुली। सुरक्षा कर्मियों ने पिकअप में लदा हुआ सेब बरामद किया था। तस्कर इसे गोरखपुर मंडी में बेचने के लिए ले जा रहे थे। सीमावर्ती क्षेत्र में सुरक्षा कर्मियों की नजर पर चढ़े तो पिकअप सहित सेब बरामद हुआ। सूत्रों की मानें तो सेब की तस्करी इन दिनों सीमावर्ती थाना निचलौल, ठूठीबारी, बरगदवा, परसामलिक, सोनौली, नौतनवा और कोल्हुई क्षेत्र के पगड़ंडियों से हो रही है।
सरहद पर सुरक्षा कर्मियों की निगरानी रहती है, लेकिन पगडंडियों के रास्तों का फायदा उठाकर तस्कर चाइनीज सेब भारतीय क्षेत्र में ला रहे हैं। सूत्रों की मानें तो सेब की तस्करी के लिए पहले सीमा क्षेत्र के गांव में बने अवैध गोदाम में इन्हें स्टोर किया जाता है। इसके बाद महानगरों के बाजारों में भेज दिया जाता है। भारत से लाए गए फलों के साथ इसे रखा जाता है, जिससे इसकी पहचान छिप जाती है।
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अपर पुलिस अधीक्षक आतिश कुमार सिंह ने बताया कि सीमावर्ती क्षेत्र में कड़ी चौकसी हो रही है। अगर ऐसा हो रहा है तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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सेहत के लिए ठीक नहीं चाइनीज सेब
प्रतिबंधित इंजेक्शन का इस्तेमाल कर चाइनीज सेब को तैयार किया जाता है। इसमें ऐसे केमिकल्स होते हैं जो नर्वस सिस्टम के साथ बॉडी के कुछ अंगों पर सीधे अटैक करते हैं। इन नुकसानदायक इंजेक्शन की वजह से सेब में मौजूद केमिकल शरीर में जाते ही सक्रिय हो जाते हैं, जिससे कई बीमारियों का खतरा होने की संभावना रहती है। देखने में यह सेब इतना ताजा लगेगा कि ग्राहक दुकानों पर देख सबसे पहले इसे ही खरीदना पसंद करते हैं।
-डॉ. सविता पौडेल, भैरहवा शहर
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क्या है चाइनीज सेब की पहचान
विशेषज्ञों के अनुसार, नुकसानदायक रसायनों वाले सेब की पहचान बिल्कुल आसान है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह प्लास्टिक के जालीदार कवर से ढका होता है। साइज में बड़ा और गोलमटोल होता है। इसमें काफी चमक होती है। इसका कलर पिंक या येलोइस होता है। खाने पर टेस्ट शक्कर के जैसा नरम और भुरभुरा लगता है, जबकि ओरिजनल सेब में कम शाइनिंग होती है। साथ ही उसका स्वाद भी चेंज होता है। खाने पर कट की आवाज आती है। खट्टापन लिए होता है।
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30 से 40 रुपये प्रति किलो सस्ते हैं चाइनीज सेब
चाइनीज सेब व भारतीय सेब में काफी अंतर है। भारतीय सेब की कीमत जहां 120 से 150 रुपये किलो है, वहीं चाइनीज सेब व्यापारियों को मात्र 80 से 120 रुपये प्रति किलो में तस्कर उपलब्ध करा देते हैं, जिसको व्यापारी बाजार में भारतीय सेब के समान मूल्य पर ही बेचते हैं और मुनाफा कमा रहे हैं।
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चाइनीज सेब के तस्करी होने की पोल तीन अप्रैल को खुली। सुरक्षा कर्मियों ने पिकअप में लदा हुआ सेब बरामद किया था। तस्कर इसे गोरखपुर मंडी में बेचने के लिए ले जा रहे थे। सीमावर्ती क्षेत्र में सुरक्षा कर्मियों की नजर पर चढ़े तो पिकअप सहित सेब बरामद हुआ। सूत्रों की मानें तो सेब की तस्करी इन दिनों सीमावर्ती थाना निचलौल, ठूठीबारी, बरगदवा, परसामलिक, सोनौली, नौतनवा और कोल्हुई क्षेत्र के पगड़ंडियों से हो रही है।
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सरहद पर सुरक्षा कर्मियों की निगरानी रहती है, लेकिन पगडंडियों के रास्तों का फायदा उठाकर तस्कर चाइनीज सेब भारतीय क्षेत्र में ला रहे हैं। सूत्रों की मानें तो सेब की तस्करी के लिए पहले सीमा क्षेत्र के गांव में बने अवैध गोदाम में इन्हें स्टोर किया जाता है। इसके बाद महानगरों के बाजारों में भेज दिया जाता है। भारत से लाए गए फलों के साथ इसे रखा जाता है, जिससे इसकी पहचान छिप जाती है।
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अपर पुलिस अधीक्षक आतिश कुमार सिंह ने बताया कि सीमावर्ती क्षेत्र में कड़ी चौकसी हो रही है। अगर ऐसा हो रहा है तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
सेहत के लिए ठीक नहीं चाइनीज सेब
प्रतिबंधित इंजेक्शन का इस्तेमाल कर चाइनीज सेब को तैयार किया जाता है। इसमें ऐसे केमिकल्स होते हैं जो नर्वस सिस्टम के साथ बॉडी के कुछ अंगों पर सीधे अटैक करते हैं। इन नुकसानदायक इंजेक्शन की वजह से सेब में मौजूद केमिकल शरीर में जाते ही सक्रिय हो जाते हैं, जिससे कई बीमारियों का खतरा होने की संभावना रहती है। देखने में यह सेब इतना ताजा लगेगा कि ग्राहक दुकानों पर देख सबसे पहले इसे ही खरीदना पसंद करते हैं।
-डॉ. सविता पौडेल, भैरहवा शहर
क्या है चाइनीज सेब की पहचान
विशेषज्ञों के अनुसार, नुकसानदायक रसायनों वाले सेब की पहचान बिल्कुल आसान है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह प्लास्टिक के जालीदार कवर से ढका होता है। साइज में बड़ा और गोलमटोल होता है। इसमें काफी चमक होती है। इसका कलर पिंक या येलोइस होता है। खाने पर टेस्ट शक्कर के जैसा नरम और भुरभुरा लगता है, जबकि ओरिजनल सेब में कम शाइनिंग होती है। साथ ही उसका स्वाद भी चेंज होता है। खाने पर कट की आवाज आती है। खट्टापन लिए होता है।
30 से 40 रुपये प्रति किलो सस्ते हैं चाइनीज सेब
चाइनीज सेब व भारतीय सेब में काफी अंतर है। भारतीय सेब की कीमत जहां 120 से 150 रुपये किलो है, वहीं चाइनीज सेब व्यापारियों को मात्र 80 से 120 रुपये प्रति किलो में तस्कर उपलब्ध करा देते हैं, जिसको व्यापारी बाजार में भारतीय सेब के समान मूल्य पर ही बेचते हैं और मुनाफा कमा रहे हैं।