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Maharajganj News: पाउडर वाले दूध के साथ सेक्रिन मिलाकर बन रही सस्ती आइसक्रीम
Mon, 26 May 2025 01:04 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Mon, 26 May 2025 01:04 AM IST
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महराजगंज। आइसक्रीम की बढ़ती खपत ने धंधेबाजों को मिलावट का मौका दे दिया। बाजार में बिकने वाली आइसक्रीम में से कुछ बड़े ब्रांड को छोड़ दें तो अधिकांश में मिलावट है। शहर के मोहल्ले में आइसक्रीम बनाने की फैक्टरी चल रही है।
पाउडर वाले दूध के साथ सेक्रिन मिलाकर सस्ती आइसक्रीम बनाई जाती है। गर्मी में लोग जगह-जगह लगने वाली रेहड़ी या दुकानों से कुल्फी, आइसक्रीम, गन्ने का रस, शेक, कोल्ड ड्रिंक और फ्रूट जूस आदि का स्वाद लेने लगे हैं। जलजीरा, पुदीने वाला पानी, नींबू पानी में स्वाद बनाने के लिए रंग और सेक्रीन का प्रयोग किया जा रहा है।
कहीं कुल्फी और आइसक्रीम में मसाले वाली बर्फ का इस्तेमाल किया जा रहा है तो कहीं पाउडर ज्यादा मिलाया जा रहा है, जो कि सेहत के लिए खराब है। शहर में बिक रही मिलावटी आइसक्रीम की हकीकत जानने की कोशिश की गई तो हैरान करने वाले तथ्य सामने आए। एक आइसक्रीम विक्रेता ने बताया कि महंगी आइसक्रीम बहुत कम लोग खरीदते हैं।
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सबसे कम कीमत 10 रुपये से बिक्री शुरू होती है। अधिकतम 80 रुपये वाली आइसक्रीम है। 10 से 20 रुपये वाली आइसक्रीम के ग्राहक अधिक हैं। एक दिन में कम से कम 1000 रुपये की बिक्री हो जाती है। इसमें पूंजी निकालकर करीब 500 रुपये की बचत हो जाती है।
ब्रांडेड आइसक्रीम बेचने में कम फायदा होता है। कारोबारी ने बताया कि पाउडर वाला दूध एक पैकेट 312 रुपये में मिल जाता है। इसमें 12 लीटर दूध तैयार होता है। चीनी की खपत कम हो, इसके लिए सेक्रीन मिलाया जाता है। ऐसे में लागत कम हो जाती है। फ्लेवर अलग से डाला जाता है।
रंगीन करने के लिए सस्ता वाला रंग डाला जाता है। शादी की बुकिंग में क्वालिटी कुछ ठीक की जाती है, क्योंकि बुकिंग में रकम अच्छी मिलती है। सूत्र बताते हैं कि बाहर से आने वाले कारीगर सस्ती आइसक्रीम बनाने में माहिर होते हैं।
शहर में 17 से अधिक ठेले लगते हैं, जहां आइसक्रीम समेत सेक बिकता है। जिले के फरेंदा, निचलौल, नौतनवा, सोनौली, सिसवा, घुघली, परतावल समेत अन्य स्थानों पर सस्ती वाली आइसक्रीम मिलती है।
गाड़ी पर पूरा सामान सजाकर रंग-बिरंगी लाइटिंग की जाती है। इससे ग्राहक आकर्षित होकर चले आते हैं। ग्राहकों की बजट के हिसाब से इनके पास आइसक्रीम होती है।
बच्चों के दांतों में फंस जाती है सेक्रीन
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. रंजन मिश्रा ने बताया कि बाजार में बिकने वाली आइसक्रीम सबसे अधिक नुकसान बच्चों का ही करती है। क्योंकि इसमें पड़ी चॉकलेट व सेक्रीन बच्चों के दांतों में फंस जाती है। इससे दांतों में सड़न की समस्या आने लगती है। इसका सीधा असर बच्चों के पाचन क्रिया पर पड़ता है। पेट दर्द, दस्त, उल्टी जैसी समस्याएं भी होती हैं। अक्सर ओपीडी में ऐसे बच्चे आते हैं, जिनके इलाज के लिए जब हिस्ट्री तलाशी जाती है तो पता लगता है कि बच्चा स्कूल से निकलते ही आइसक्रीम खाने का आदी हो गया है। अभिभावक उन्हें दुलार में आइसक्रीम खिलाते हैं और बदले में बच्चा बीमार पड़ता है।
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पाउडर वाले दूध के साथ सेक्रिन मिलाकर सस्ती आइसक्रीम बनाई जाती है। गर्मी में लोग जगह-जगह लगने वाली रेहड़ी या दुकानों से कुल्फी, आइसक्रीम, गन्ने का रस, शेक, कोल्ड ड्रिंक और फ्रूट जूस आदि का स्वाद लेने लगे हैं। जलजीरा, पुदीने वाला पानी, नींबू पानी में स्वाद बनाने के लिए रंग और सेक्रीन का प्रयोग किया जा रहा है।
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कहीं कुल्फी और आइसक्रीम में मसाले वाली बर्फ का इस्तेमाल किया जा रहा है तो कहीं पाउडर ज्यादा मिलाया जा रहा है, जो कि सेहत के लिए खराब है। शहर में बिक रही मिलावटी आइसक्रीम की हकीकत जानने की कोशिश की गई तो हैरान करने वाले तथ्य सामने आए। एक आइसक्रीम विक्रेता ने बताया कि महंगी आइसक्रीम बहुत कम लोग खरीदते हैं।
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सबसे कम कीमत 10 रुपये से बिक्री शुरू होती है। अधिकतम 80 रुपये वाली आइसक्रीम है। 10 से 20 रुपये वाली आइसक्रीम के ग्राहक अधिक हैं। एक दिन में कम से कम 1000 रुपये की बिक्री हो जाती है। इसमें पूंजी निकालकर करीब 500 रुपये की बचत हो जाती है।
ब्रांडेड आइसक्रीम बेचने में कम फायदा होता है। कारोबारी ने बताया कि पाउडर वाला दूध एक पैकेट 312 रुपये में मिल जाता है। इसमें 12 लीटर दूध तैयार होता है। चीनी की खपत कम हो, इसके लिए सेक्रीन मिलाया जाता है। ऐसे में लागत कम हो जाती है। फ्लेवर अलग से डाला जाता है।
रंगीन करने के लिए सस्ता वाला रंग डाला जाता है। शादी की बुकिंग में क्वालिटी कुछ ठीक की जाती है, क्योंकि बुकिंग में रकम अच्छी मिलती है। सूत्र बताते हैं कि बाहर से आने वाले कारीगर सस्ती आइसक्रीम बनाने में माहिर होते हैं।
शहर में 17 से अधिक ठेले लगते हैं, जहां आइसक्रीम समेत सेक बिकता है। जिले के फरेंदा, निचलौल, नौतनवा, सोनौली, सिसवा, घुघली, परतावल समेत अन्य स्थानों पर सस्ती वाली आइसक्रीम मिलती है।
गाड़ी पर पूरा सामान सजाकर रंग-बिरंगी लाइटिंग की जाती है। इससे ग्राहक आकर्षित होकर चले आते हैं। ग्राहकों की बजट के हिसाब से इनके पास आइसक्रीम होती है।
बच्चों के दांतों में फंस जाती है सेक्रीन
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. रंजन मिश्रा ने बताया कि बाजार में बिकने वाली आइसक्रीम सबसे अधिक नुकसान बच्चों का ही करती है। क्योंकि इसमें पड़ी चॉकलेट व सेक्रीन बच्चों के दांतों में फंस जाती है। इससे दांतों में सड़न की समस्या आने लगती है। इसका सीधा असर बच्चों के पाचन क्रिया पर पड़ता है। पेट दर्द, दस्त, उल्टी जैसी समस्याएं भी होती हैं। अक्सर ओपीडी में ऐसे बच्चे आते हैं, जिनके इलाज के लिए जब हिस्ट्री तलाशी जाती है तो पता लगता है कि बच्चा स्कूल से निकलते ही आइसक्रीम खाने का आदी हो गया है। अभिभावक उन्हें दुलार में आइसक्रीम खिलाते हैं और बदले में बच्चा बीमार पड़ता है।