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सेंट्रल सर्वर बंद, करोड़ों का भुगतान फंसा
Mon, 01 Apr 2019 12:47 AM IST
राकेश पांडेय
महराजगंज (ब्यूरो)
महराजगंज (ब्यूरो)
Published by: राकेश पांडेय
Updated Mon, 01 Apr 2019 12:47 AM IST
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सेंट्रल सर्वर बंद, करोड़ों का भुगतान फंसा
- फोटो : अमर उजाला
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महराजगंज। आरबीआई के निर्देश पर रविवार को लखनऊ से ही कोषागार का सेंट्रल सर्वर बंद कर दिया गया। इसके चलते कई विभागों का करोड़ों रुपये का भुगतान फंस गया। जिससे विभागीय अधिकारी भुगतान के मसले पर ऊहापोह कि स्थिति में हैं।
वित्तीय वर्ष के अंतिम दिनों विभागों की तरफ से बिल प्रस्तुत कर भुगतान कराया जाता रहा है। इसी क्रम कई विभागों अपना बिल प्रस्तुत किया लेकिन शाम पांच बजे ही सेंट्रल सर्वर बंद कर दिया गया। जिससे करोड़ों रुपये का भुगतान फंस गया। कोषागार के वरिष्ठ लेखाकार सतीश चंद्र दूबे ने बताया कि 31 मार्च को शाम पांच बजे तक करीब दस करोड़ रुपये के बिल पास कर भुगतान किए गए। इसके बाद सेंट्रल सर्वर बंद हो जाने से भुगतान रोक दिया गया। जिन विभागों का बिल व भुगतान फंसा है। उनमें स्वास्थ्य, पंचायती राज सहित अन्य विभाग शामिल हैं। दो कार्यदायी संस्थाओं ने 25 करोड़ रुपये की धनराशि सरेंडर की है। इसी क्रम में लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता सचिन कुमार ने बताया कि बताया कि गोरखपुर-परतावल फोरलेन पर काम धीमी गति से होने की वजह से 15 करोड़ रुपये की धनराशि सरेंडर की गई है। उधर, कोषागार कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक इंडो-नेपाल बार्डर निर्माण खंड एक ने दस करोड़ रुपये की धनराशि सरेंडर की है।
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वित्तीय वर्ष के अंतिम दिनों विभागों की तरफ से बिल प्रस्तुत कर भुगतान कराया जाता रहा है। इसी क्रम कई विभागों अपना बिल प्रस्तुत किया लेकिन शाम पांच बजे ही सेंट्रल सर्वर बंद कर दिया गया। जिससे करोड़ों रुपये का भुगतान फंस गया। कोषागार के वरिष्ठ लेखाकार सतीश चंद्र दूबे ने बताया कि 31 मार्च को शाम पांच बजे तक करीब दस करोड़ रुपये के बिल पास कर भुगतान किए गए। इसके बाद सेंट्रल सर्वर बंद हो जाने से भुगतान रोक दिया गया। जिन विभागों का बिल व भुगतान फंसा है। उनमें स्वास्थ्य, पंचायती राज सहित अन्य विभाग शामिल हैं। दो कार्यदायी संस्थाओं ने 25 करोड़ रुपये की धनराशि सरेंडर की है। इसी क्रम में लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता सचिन कुमार ने बताया कि बताया कि गोरखपुर-परतावल फोरलेन पर काम धीमी गति से होने की वजह से 15 करोड़ रुपये की धनराशि सरेंडर की गई है। उधर, कोषागार कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक इंडो-नेपाल बार्डर निर्माण खंड एक ने दस करोड़ रुपये की धनराशि सरेंडर की है।
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