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Maharajganj News: सीडीओ की चेतावनी का असर नहीं, अब होगी कार्रवाई
Thu, 15 May 2025 11:43 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Thu, 15 May 2025 11:43 PM IST
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महराजगंज। वित्तीय सत्र शुरू हुए डेढ़ माह का समय बीत जाने के बाद भी जिले की 397 ग्राम पंचायतों में मानव दिवस सृजन का खाता नहीं खुल सका है। इसपर आयुक्त ने नाराजगी जाहिर की है। बीते दिनों हुई वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग में विभाग को निर्देशित किया गया था, इसके बाद भी नतीजा शून्य होने पर ग्रामपंचायत के सचिव, रोजगार सेवक, तकनीकी सहायकों का वेतन रोकने की तैयारी है।
जनपद के 883 ग्राम पंचायतों में मनरेगा के तहत लोगों को रोजगार देने का काम शासन के निर्देश पर होता है। यह मांग-आधारित कार्यक्रम है, जिसके तहत जरूरतमंद ग्रामीण परिवारों को एक साल में कम से कम 100 दिनों का रोजगार दिया जाता है। इसके लिए सबसे पहले तकनीकी सहायक एस्टीमेट तैयार करते है। वित्तीय स्वीकृति बीडीओ से मिलती है। परियोजना तय होने पर मनरेगा श्रमिक कार्य की मांग करते हैं। रोजगार सेवक मांग पत्र पर सचिव के हस्ताक्षर लेकर मस्टररोल निकलवाते हैं।
बीडीओ और एपीओ मस्टररोल पर हस्ताक्षर के बाद श्रमिकों को काम दिया जाता है। विभागीय स्तर पर इसकी हर माह समीक्षा होती है। बीते दिनों समीक्षा में सीडीओ अनुराज जैन ने नाराजगी व्यक्त कर संबंधित खंड विकास अधिकारियों को चेतावनी दी। बावजूद कोई सुधार नहीं हो हुआ। 12 विकास खंडों की 397 ग्राम पंचायतें मस्टररोल में स्थिति शून्य बनी हुई है। सबसे खराब स्थिति लक्ष्मीपुर ब्लॉक की है, जहां कुल 65 ग्राम पंचायत हैं, लेकिन किसी में मानव दिवस नहीं सृजित किया गया। सर्वाधिक खराब प्रदर्शन वाले विकास खंडों में फरेंदा व सिसवां भी शामिल हैं।
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-मनरेगा वेबसाइट पर जिले की सभी पंचायतों की वित्तीय वर्ष 2025-26 की समीक्षा की गई थी। इसमें 397 पंचायतों में एक भी मस्टररोल जारी नहीं किया गया। इसके लिए सीडीओ स्तर से चेतावनी दी गई थी। अब पंचायत सचिव के वेतन व तकनीकी सहायकों, रोजगार सेवकों का मानदेय रोकने की कार्रवाई की जाएगी।
- करुणाकर अदीब, उपायुक्त मनरेगा।
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जनपद के 883 ग्राम पंचायतों में मनरेगा के तहत लोगों को रोजगार देने का काम शासन के निर्देश पर होता है। यह मांग-आधारित कार्यक्रम है, जिसके तहत जरूरतमंद ग्रामीण परिवारों को एक साल में कम से कम 100 दिनों का रोजगार दिया जाता है। इसके लिए सबसे पहले तकनीकी सहायक एस्टीमेट तैयार करते है। वित्तीय स्वीकृति बीडीओ से मिलती है। परियोजना तय होने पर मनरेगा श्रमिक कार्य की मांग करते हैं। रोजगार सेवक मांग पत्र पर सचिव के हस्ताक्षर लेकर मस्टररोल निकलवाते हैं।
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बीडीओ और एपीओ मस्टररोल पर हस्ताक्षर के बाद श्रमिकों को काम दिया जाता है। विभागीय स्तर पर इसकी हर माह समीक्षा होती है। बीते दिनों समीक्षा में सीडीओ अनुराज जैन ने नाराजगी व्यक्त कर संबंधित खंड विकास अधिकारियों को चेतावनी दी। बावजूद कोई सुधार नहीं हो हुआ। 12 विकास खंडों की 397 ग्राम पंचायतें मस्टररोल में स्थिति शून्य बनी हुई है। सबसे खराब स्थिति लक्ष्मीपुर ब्लॉक की है, जहां कुल 65 ग्राम पंचायत हैं, लेकिन किसी में मानव दिवस नहीं सृजित किया गया। सर्वाधिक खराब प्रदर्शन वाले विकास खंडों में फरेंदा व सिसवां भी शामिल हैं।
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-मनरेगा वेबसाइट पर जिले की सभी पंचायतों की वित्तीय वर्ष 2025-26 की समीक्षा की गई थी। इसमें 397 पंचायतों में एक भी मस्टररोल जारी नहीं किया गया। इसके लिए सीडीओ स्तर से चेतावनी दी गई थी। अब पंचायत सचिव के वेतन व तकनीकी सहायकों, रोजगार सेवकों का मानदेय रोकने की कार्रवाई की जाएगी।
- करुणाकर अदीब, उपायुक्त मनरेगा।