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Maharajganj News: रकम नहीं मिलती तो जाति आय, निवास प्रमाणपत्र में फंसा देते पेंच
Sun, 07 May 2023 12:45 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Sun, 07 May 2023 12:45 AM IST
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लेखपालों की ढिलाई से प्रमाणपत्र बनने में होता है विलंब
कई बार कोई न कोई कमी दिखाकर आवेदन लौटा दिया जाता
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। जाति, आय, निवास प्रमाणपत्र बनवाने में ऑनलाइन आवेदन कराने के बाद भी आवेदकों को समस्या झेलनी पड़ती है। राजस्व रिपोर्ट लगाने में खेल कर दिया जाता है। आवेदक अगर रकम न दे तो उन्हें समय से प्रमाणपत्र नहीं मिल पाता है। प्रमाणपत्र बनवाने में बिचौलिए रकम लेकर ठेका भी लेते हैं।
जाति, आय और निवास प्रमाणपत्र (अधिवास) की जरूरत सभी को होती है। वर्तमान व्यवस्था में प्रमाणपत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन के बाद राजस्व कर्मियों की रिपोर्ट लगती है, लेकिन यह रिपोर्ट लगवाने के लिए भटकना पड़ता है। चढ़ावा नहीं दिया तो सात दिन के भीतर बनने वाले दस्तावेज के लिए कई दिनों तक चक्कर लगाते रहिए। तहसील से जुड़े लोगों का कहना है कि लेखपालों की ढिलाई से प्रमाणपत्र बनने में विलंब होता है। कई बार कोई न कोई कमी दिखाकर आवेदन लौटा दिया जाता है। जाति, आय और निवास प्रमाणपत्र के जिले में कुल 9,279 मामले लंबित हैं।
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चार माह परेशान होने के बाद बना प्रमाणपत्र
अंगद यादव निवासी तुर्कहिया ने बताया कि बिटिया की शादी अनुदान के लिए करीब चार माह पहले आय, जाति और निवास प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया था। जिस पर रिपोर्ट लगाने के बजाय गलत आवेदन की बात कहते हुए आवेदन को निरस्त कर दिया गया। दूसरी बार भी आवेदन किया। तीसरी बार आवेदन कर हल्का लेखपाल से मिलने के बाद रिपोर्ट लगी। ऐसे में चार महीने से परेशान होने के बाद अब प्रमाणपत्र बन सका है।
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केस-एक
सदर तहसील क्षेत्र के हरखा निवासी प्रदीप कुमार को आय प्रमाणपत्र हासिल करने में करीब 25 दिन का समय लग गया। ऐसा आवेदन के बाद लेखपाल की रिपोर्ट लगाने में विलंब के चलते हुआ। उन्होंने जब आवेदन किया तो उनके मोबाइल नंबर पर किसी का फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को मुंशी बताया। उन्होंने बताया कि फीस के अतिरिक्त उनके पांच सौ रुपये खर्च हो गए।
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केस-दो
धनगढ़ी मुंडेरी के रहने वाले लक्ष्मी गुप्ता ने बताया कि आय प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया है, लेकिन लंबित है। आय प्रमाणपत्र बनवाना बेहद जरूरी है। कब बनेगा कुछ जानकारी नहीं मिल पा रही है।
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बिना कारण बताए ही कभी-कभी निरस्त हो जाता आवेदन
तहसीलों में जाति, निवास और आय प्रमाणपत्र के लिए लोगों को परेशान होना पड़ रहा है। तमाम लोगों का आवेदन बिना किसी कारण के ही निरस्त कर दिया जाता है। लोग समझ ही नहीं पाते हैं कि कौन सा प्रपत्र कम था, जिसकी वजह से ऐसा हुआ। असल में यहां खेल दूसरा चलता है। मांग पूरी नहीं होने पर राजस्व कर्मी रिपोर्ट लगाने में हीलाहवाली करते हैं। प्रमाणपत्र जारी करने की समय सीमा खत्म होने वाली होती है, तो आवेदन निरस्त करके खुद का बचाव कर लेते हैं।
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जांच में अटक जाता मामला, परेशान होते हैं आवेदक
जाति, आय और निवास प्रमाणपत्र के लिए आवेदन करने के बाद आवेदक के प्रमाणपत्रों की जांच की जाती है। राजस्वकर्मी आवेदक के पास पहुंचकर रिपोर्ट तैयार करते हैं। इसमें राज्य, जिला, किरायदारी सहित अन्य कारणों का हवाला देकर लेखपाल की रिपोर्ट नहीं लगाई जाती। फिर वसूली के बाद ही काम किया जाता है। आवेदक ने पैसे नहीं खर्च किए, तो उसे तहसील का चक्कर काटना पड़ेगा। किसी अधिकारी से शिकायत के बाद भी मामला जांच में अटका रह जाएगा। तहसील अधिवक्ता बताते हैं कि जिनका जुगाड़ नहीं होता है, उनके आवेदन निरस्त हो जाते हैं। तहसीलों में हर माह करीब 10 से 15 फीसदी जाति, आय और निवास प्रमाणपत्र अस्वीकृत हो जाते हैं।
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आवेदक की जरूरत के अनुसार ली जाती रकम
जरूरी प्रमाणपत्र के लिए कितनी कीमत चुकानी होगी, यह आवेदक की जरूरत पर निर्भर है। आवेदन के समय एक प्रमाणपत्र के लिए 30 रुपये फीस ली जाती है। असली खेल आवेदन की प्रक्रिया के बाद शुरू होता है। आवेदक की आवश्यकता और उसकी परिस्थिति के अनुसार रकम ली जाती है।
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यह फंसाते हैं पेंच
-आसपास के लोगों से बात करके रिपोर्ट लगा देते हैं।
-प्रधान, सभासद और अन्य किसी से बात करके रिपोर्ट लगाने के दौरान गड़बड़ी आती है।
-अनुचित मांग न पूरी होने पर आवेदन को निरस्त कर दिया जाता है। इससे दिक्कत आती है।
-लोगों को दोबारा आवेदन करना पड़ता है।
-कई बार लेखपाल अपने आपके बाहर होने या अन्य किसी काम में व्यस्त होने का हवाला देकर भी मामला टाल देते हैं।
-किराय के कमरे में रहने वाले लोगों के प्रमाणपत्र जैसे आधार इत्यादि को संशोधन के लिए कहते हैं।
-नाम और पते में आंशिक बदलाव या गड़बड़ी को आधार बनाकर आवेदन को निरस्त कर देते हैं।
-आवेदन के लिए प्रधान और सभासद के प्रमाणपत्र में कोई न कोई कमी बताई जाती है।
-लेखपाल की जगह उनके मुंशी आवेदकों से बात करके मामला तय करते हैं।
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सभी तहसील-- -- -आवेदन-- -- लंबित
निवास-- -- -- -- -- -998970-- -- -2981
जाति प्रमाणपत्र-- 1148251-- -2672
आय प्रमाणपत्र-- -1520906-- 3626
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नोट:= नौतनवां, सदर, फरेंदा, निचलौल व सदर तहसील में एक मई तक का आवेदन व लंबित मामला है।
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आवेदन को समय से निस्तारित करने का निर्देश है। आवेदक अगर गड़बड़ी की शिकायत करेंगे तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी। वर्तमान समय से ऑनलाइन आवेदन के बाद जरूरी जांच कर रिपोर्ट समय सीमा के अंदर लगा दी जा रही है।
-सत्येंद्र कुमार, जिलाधिकारी
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कई बार कोई न कोई कमी दिखाकर आवेदन लौटा दिया जाता
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। जाति, आय, निवास प्रमाणपत्र बनवाने में ऑनलाइन आवेदन कराने के बाद भी आवेदकों को समस्या झेलनी पड़ती है। राजस्व रिपोर्ट लगाने में खेल कर दिया जाता है। आवेदक अगर रकम न दे तो उन्हें समय से प्रमाणपत्र नहीं मिल पाता है। प्रमाणपत्र बनवाने में बिचौलिए रकम लेकर ठेका भी लेते हैं।
जाति, आय और निवास प्रमाणपत्र (अधिवास) की जरूरत सभी को होती है। वर्तमान व्यवस्था में प्रमाणपत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन के बाद राजस्व कर्मियों की रिपोर्ट लगती है, लेकिन यह रिपोर्ट लगवाने के लिए भटकना पड़ता है। चढ़ावा नहीं दिया तो सात दिन के भीतर बनने वाले दस्तावेज के लिए कई दिनों तक चक्कर लगाते रहिए। तहसील से जुड़े लोगों का कहना है कि लेखपालों की ढिलाई से प्रमाणपत्र बनने में विलंब होता है। कई बार कोई न कोई कमी दिखाकर आवेदन लौटा दिया जाता है। जाति, आय और निवास प्रमाणपत्र के जिले में कुल 9,279 मामले लंबित हैं।
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चार माह परेशान होने के बाद बना प्रमाणपत्र
अंगद यादव निवासी तुर्कहिया ने बताया कि बिटिया की शादी अनुदान के लिए करीब चार माह पहले आय, जाति और निवास प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया था। जिस पर रिपोर्ट लगाने के बजाय गलत आवेदन की बात कहते हुए आवेदन को निरस्त कर दिया गया। दूसरी बार भी आवेदन किया। तीसरी बार आवेदन कर हल्का लेखपाल से मिलने के बाद रिपोर्ट लगी। ऐसे में चार महीने से परेशान होने के बाद अब प्रमाणपत्र बन सका है।
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सदर तहसील क्षेत्र के हरखा निवासी प्रदीप कुमार को आय प्रमाणपत्र हासिल करने में करीब 25 दिन का समय लग गया। ऐसा आवेदन के बाद लेखपाल की रिपोर्ट लगाने में विलंब के चलते हुआ। उन्होंने जब आवेदन किया तो उनके मोबाइल नंबर पर किसी का फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को मुंशी बताया। उन्होंने बताया कि फीस के अतिरिक्त उनके पांच सौ रुपये खर्च हो गए।
केस-दो
धनगढ़ी मुंडेरी के रहने वाले लक्ष्मी गुप्ता ने बताया कि आय प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया है, लेकिन लंबित है। आय प्रमाणपत्र बनवाना बेहद जरूरी है। कब बनेगा कुछ जानकारी नहीं मिल पा रही है।
बिना कारण बताए ही कभी-कभी निरस्त हो जाता आवेदन
तहसीलों में जाति, निवास और आय प्रमाणपत्र के लिए लोगों को परेशान होना पड़ रहा है। तमाम लोगों का आवेदन बिना किसी कारण के ही निरस्त कर दिया जाता है। लोग समझ ही नहीं पाते हैं कि कौन सा प्रपत्र कम था, जिसकी वजह से ऐसा हुआ। असल में यहां खेल दूसरा चलता है। मांग पूरी नहीं होने पर राजस्व कर्मी रिपोर्ट लगाने में हीलाहवाली करते हैं। प्रमाणपत्र जारी करने की समय सीमा खत्म होने वाली होती है, तो आवेदन निरस्त करके खुद का बचाव कर लेते हैं।
जांच में अटक जाता मामला, परेशान होते हैं आवेदक
जाति, आय और निवास प्रमाणपत्र के लिए आवेदन करने के बाद आवेदक के प्रमाणपत्रों की जांच की जाती है। राजस्वकर्मी आवेदक के पास पहुंचकर रिपोर्ट तैयार करते हैं। इसमें राज्य, जिला, किरायदारी सहित अन्य कारणों का हवाला देकर लेखपाल की रिपोर्ट नहीं लगाई जाती। फिर वसूली के बाद ही काम किया जाता है। आवेदक ने पैसे नहीं खर्च किए, तो उसे तहसील का चक्कर काटना पड़ेगा। किसी अधिकारी से शिकायत के बाद भी मामला जांच में अटका रह जाएगा। तहसील अधिवक्ता बताते हैं कि जिनका जुगाड़ नहीं होता है, उनके आवेदन निरस्त हो जाते हैं। तहसीलों में हर माह करीब 10 से 15 फीसदी जाति, आय और निवास प्रमाणपत्र अस्वीकृत हो जाते हैं।
आवेदक की जरूरत के अनुसार ली जाती रकम
जरूरी प्रमाणपत्र के लिए कितनी कीमत चुकानी होगी, यह आवेदक की जरूरत पर निर्भर है। आवेदन के समय एक प्रमाणपत्र के लिए 30 रुपये फीस ली जाती है। असली खेल आवेदन की प्रक्रिया के बाद शुरू होता है। आवेदक की आवश्यकता और उसकी परिस्थिति के अनुसार रकम ली जाती है।
यह फंसाते हैं पेंच
-आसपास के लोगों से बात करके रिपोर्ट लगा देते हैं।
-प्रधान, सभासद और अन्य किसी से बात करके रिपोर्ट लगाने के दौरान गड़बड़ी आती है।
-अनुचित मांग न पूरी होने पर आवेदन को निरस्त कर दिया जाता है। इससे दिक्कत आती है।
-लोगों को दोबारा आवेदन करना पड़ता है।
-कई बार लेखपाल अपने आपके बाहर होने या अन्य किसी काम में व्यस्त होने का हवाला देकर भी मामला टाल देते हैं।
-किराय के कमरे में रहने वाले लोगों के प्रमाणपत्र जैसे आधार इत्यादि को संशोधन के लिए कहते हैं।
-नाम और पते में आंशिक बदलाव या गड़बड़ी को आधार बनाकर आवेदन को निरस्त कर देते हैं।
-आवेदन के लिए प्रधान और सभासद के प्रमाणपत्र में कोई न कोई कमी बताई जाती है।
-लेखपाल की जगह उनके मुंशी आवेदकों से बात करके मामला तय करते हैं।
सभी तहसील
निवास
जाति प्रमाणपत्र
आय प्रमाणपत्र
नोट:= नौतनवां, सदर, फरेंदा, निचलौल व सदर तहसील में एक मई तक का आवेदन व लंबित मामला है।
आवेदन को समय से निस्तारित करने का निर्देश है। आवेदक अगर गड़बड़ी की शिकायत करेंगे तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी। वर्तमान समय से ऑनलाइन आवेदन के बाद जरूरी जांच कर रिपोर्ट समय सीमा के अंदर लगा दी जा रही है।
-सत्येंद्र कुमार, जिलाधिकारी