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Maharajganj News: विश्व शांति का संदेश लेकर जिले में पहुंचे थाईलैंड के बौद्ध भिक्षु
Sun, 10 Mar 2024 08:52 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Sun, 10 Mar 2024 08:52 PM IST
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महराजगंज/बागापार। विश्व में शांति का संदेश देने के लिए थाईलैंड के बौद्ध भिक्षुओं का 99 सदस्यीय दल शनिवार की रात साधु शरण भारद्वाज इंटर कॉलेज बेलवाकाजी में पहुंचा। जहां विद्यालय की ओर से पुष्प से स्वागत किया गया। बौद्ध भिक्षुओं ने विद्यालय परिसर में पड़ाव डालकर पूजा वंदना किया।
रात्रि विश्राम के बाद सुबह पूजा पाठ करने के बाद बौद्ध भिक्षुओं का दल रामग्राम, देवदह होते हुए नेपाल के लिए रवाना हो गया। भगवान बुद्ध उत्तरापथ (बुद्ध गमन मार्ग) होते हुए कुशीनगर को गए थे। प्राचीन काल में उत्तरापथ से भारत का चीन से लेकर अफगानिस्तान तक व्यापार होता था। इसी मार्ग से गौतम बुद्ध ने कुशीनगर में महापरिनिर्वाण के पहले अंतिम यात्रा की थी। फाजिलनगर के बदुराव, उस्मानपुर, पुरैना, पावानगर आदि गांव होते हुए तथागत बुद्ध कुशीनगर पहुंचे थे। तथागत बुद्ध जिले के रामग्राम, देवदह होते हुए नेपाल के लुंबिनी में भी पहुंचे थे। उस समय के बौद्ध अनुयाइयों ने महापरिनिर्वाण के बाद इस मार्ग का निर्माण कराया था।
बौद्ध टीम के भिक्षु फ्रा थानापोन ब्रोमा ने बताया कि हम लोग विश्व शांति के लिए भगवान बुद्ध के धार्मिक स्थलों की पदयात्रा पर निकले हैं। बुद्ध जिस मार्ग से कुशीनगर गए थे, हम उस मार्ग से जा रहे हैं। कुशीनगर के बाद महराजगंज, रामग्राम, सोनौली सीमा से होकर नेपाल में प्रवेश करेगी। लुंबिनी, श्रावस्ती, सारनाथ में हमारी यात्रा समाप्त होगी। 25 मार्च तक यात्रा करने के बाद थाईलैंड चले जाएंगे। बौद्ध भिक्षुओं की टोली जिस मार्ग से होकर गुजर रही थी, गांव के लोग पुष्प अर्पित कर स्वागत कर रहे थे।
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रात्रि विश्राम के बाद सुबह पूजा पाठ करने के बाद बौद्ध भिक्षुओं का दल रामग्राम, देवदह होते हुए नेपाल के लिए रवाना हो गया। भगवान बुद्ध उत्तरापथ (बुद्ध गमन मार्ग) होते हुए कुशीनगर को गए थे। प्राचीन काल में उत्तरापथ से भारत का चीन से लेकर अफगानिस्तान तक व्यापार होता था। इसी मार्ग से गौतम बुद्ध ने कुशीनगर में महापरिनिर्वाण के पहले अंतिम यात्रा की थी। फाजिलनगर के बदुराव, उस्मानपुर, पुरैना, पावानगर आदि गांव होते हुए तथागत बुद्ध कुशीनगर पहुंचे थे। तथागत बुद्ध जिले के रामग्राम, देवदह होते हुए नेपाल के लुंबिनी में भी पहुंचे थे। उस समय के बौद्ध अनुयाइयों ने महापरिनिर्वाण के बाद इस मार्ग का निर्माण कराया था।
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बौद्ध टीम के भिक्षु फ्रा थानापोन ब्रोमा ने बताया कि हम लोग विश्व शांति के लिए भगवान बुद्ध के धार्मिक स्थलों की पदयात्रा पर निकले हैं। बुद्ध जिस मार्ग से कुशीनगर गए थे, हम उस मार्ग से जा रहे हैं। कुशीनगर के बाद महराजगंज, रामग्राम, सोनौली सीमा से होकर नेपाल में प्रवेश करेगी। लुंबिनी, श्रावस्ती, सारनाथ में हमारी यात्रा समाप्त होगी। 25 मार्च तक यात्रा करने के बाद थाईलैंड चले जाएंगे। बौद्ध भिक्षुओं की टोली जिस मार्ग से होकर गुजर रही थी, गांव के लोग पुष्प अर्पित कर स्वागत कर रहे थे।
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