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Maharajganj News: नेपाल से कानपुर की मंडी तक पहुंच रहा ब्राजील का मक्का
Thu, 19 Dec 2024 12:58 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Thu, 19 Dec 2024 12:58 AM IST
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महराजगंज। नेपाल से ब्राजील का मक्का भारतीय क्षेत्र में आ रहा है। यह सीधे कानपुर और गोरखपुर की मंडी में जा रहा है। सीमावर्ती क्षेत्र में पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ते तो गाड़ी सीधे मंडी तक पहुंच जाती है। तस्कर ब्राजील के मक्के को भारत पहुंचा कर महंगे दामों पर धंधेबाजों के हवाले कर दे रहे हैं। मक्के की तस्करी में लगे धंधेबाजों मोटा मुनाफा हो रहा है।
सूत्रों के मुताबिक नेपाल में 70 रुपये प्रति किलो की दर से मक्का मिल जाता है। भारत लाने पर इसका मूल्य 90 से 100 रुपये प्रति किलो हो जाता है। तस्कर रोजाना दिन और रात में सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देकर अपने करतूत को अंजाम देने में लगे रहते हैं। सरहद पर सख्ती के दौरान तस्कर कैरियर की मदद से साइकिल या बिना नंबर प्लेट की बाइक से मक्के की खेप धीरे-धीरे सरहद पार पहुंचा देते हैं। अगर सुरक्षा एजेंसियों से चूक हुई तो फिर पिकअप से ही मक्के की खेप भारत पहुंचा दी जाती है।
निचलौल कस्टम अधीक्षक केएन सिंह ने बताया कि सूचना मिलने पर त्वरित कार्रवाई की जाती है। टीम हमेशा कड़ी निगरानी करती है।
मक्का से कई तरह के बनते है उत्पादव्यापारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, ब्राज़ील से तस्करी कर भारत लाई जा रही मक्का से कई तरह के उत्पाद बनाए जा रहे हैं। उक्त रूप से मक्के से आटा, कॉर्नफ़्लेक्स, पॉपकॉर्न, पशु आहार बनता है। भारत नेपाल सरहद पर अवैध धंधा करने वाले व्यापारियों को नेपाल में ब्राजीलियन मक्का सस्ते कीमत पर आसानी से मिल जाती है। उक्त ब्राजीलियन मक्के की भारत आते ही कीमत में काफी इजाफा हो जाती है। भारत में ब्राजीलियन मक्के को पसंद भी किया जाता है। क्योंकि ब्राज़ील का मक्का बाज़ार में अपनी अच्छी क्वालिटी के लिए जाना जाता है।
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स्वास्थ्य के लिए बेहतर है मक्का
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक डॉ. डीएन सिंह के मुताबिक मक्का एक स्वस्थ अनाज के रूप में जाना जाता है। मक्का में फ़ाइबर, विटामिन, मिनरल, और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। इतना ही नहीं मक्का आंखों और पाचन स्वास्थ्य के लिए भी फ़ायदेमंद होता है।
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सूत्रों के मुताबिक नेपाल में 70 रुपये प्रति किलो की दर से मक्का मिल जाता है। भारत लाने पर इसका मूल्य 90 से 100 रुपये प्रति किलो हो जाता है। तस्कर रोजाना दिन और रात में सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देकर अपने करतूत को अंजाम देने में लगे रहते हैं। सरहद पर सख्ती के दौरान तस्कर कैरियर की मदद से साइकिल या बिना नंबर प्लेट की बाइक से मक्के की खेप धीरे-धीरे सरहद पार पहुंचा देते हैं। अगर सुरक्षा एजेंसियों से चूक हुई तो फिर पिकअप से ही मक्के की खेप भारत पहुंचा दी जाती है।
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निचलौल कस्टम अधीक्षक केएन सिंह ने बताया कि सूचना मिलने पर त्वरित कार्रवाई की जाती है। टीम हमेशा कड़ी निगरानी करती है।
मक्का से कई तरह के बनते है उत्पादव्यापारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, ब्राज़ील से तस्करी कर भारत लाई जा रही मक्का से कई तरह के उत्पाद बनाए जा रहे हैं। उक्त रूप से मक्के से आटा, कॉर्नफ़्लेक्स, पॉपकॉर्न, पशु आहार बनता है। भारत नेपाल सरहद पर अवैध धंधा करने वाले व्यापारियों को नेपाल में ब्राजीलियन मक्का सस्ते कीमत पर आसानी से मिल जाती है। उक्त ब्राजीलियन मक्के की भारत आते ही कीमत में काफी इजाफा हो जाती है। भारत में ब्राजीलियन मक्के को पसंद भी किया जाता है। क्योंकि ब्राज़ील का मक्का बाज़ार में अपनी अच्छी क्वालिटी के लिए जाना जाता है।
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स्वास्थ्य के लिए बेहतर है मक्का
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक डॉ. डीएन सिंह के मुताबिक मक्का एक स्वस्थ अनाज के रूप में जाना जाता है। मक्का में फ़ाइबर, विटामिन, मिनरल, और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। इतना ही नहीं मक्का आंखों और पाचन स्वास्थ्य के लिए भी फ़ायदेमंद होता है।