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Maharajganj News: काली मिर्च में मिलावट, धंधेबाजों की चांदी

Thu, 20 Feb 2025 12:09 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज Updated Thu, 20 Feb 2025 12:09 AM IST
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Black pepper adulterated, traders are earning money
महराजगंज। काली मिर्च में मिलावट कर धंधेबाज मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। हर माह करीब 40 लाख की मरीज खपत हो रही है। धंधेबाजों ने मुनाफे के लिए खाने-पीने की हर चीज में मिलावट कर रखा है।
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शहर में बिक रहे मसालों में ज्यादातर मिलावटी हैं। गोरखपुर मंडी से धंधेबाज काली मिर्च में बारीकी से मिलावट कर उसे महराजगंज पहुंचा रहे हैं। हर महीने करीब 40 लाख की मिलावटी काली मिर्च खपाई जा रही है।
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मिलावटी मिर्च की कीमत 380 से 430 रुपये प्रति किलो है। वहीं असली काली मिर्च का रेट 650 से 800 रुपये प्रतिकिलो है। व्यापारियों की मानें तो मिलावटी काली मिर्च से धंधेबाज मोटी कमाई करते हैं। हर महीने इसका धंधा करीब 40 लाख तक हो रहा है। सहालग और सर्दी में यह और भी ज्यादा रहता है।
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जिले के कारोबारी गोरखपुर मंडी से ही खरीदारी करते हैं। सूत्र बताते हैं कि यहां मोटी रकम के चक्कर में धंधेबाज मिलावटी काली मिर्च को सस्ते दर पर व्यापारियों को देते हैं। मांग के अनुसार काली मिर्च की खपत घटती बढ़ती रहती है। जानकारों के अनुसार, काली मिर्च में पपीते के बीजों की मिलावट की जाती है। इसे कोई समझ नहीं पाता है।
फिजिशियन डॉ. एएम भाष्कर ने बताया कि काली मिर्च एक आम मसाला है जो विभिन्न प्रकार के व्यंजनों में उपयोग किया जाता है। मिलावटी काली मिर्च खाने से कई नुकसान हो सकते हैं। इसमें केमिकल पदार्थों के मिलाने से पाचन संबंधित समस्याएं आ सकती हैं। मिलावटी काली मिर्च में मौजूद अन्य पदार्थों से एलर्जी या संवेदनशीलता हो सकती है, जो त्वचा पर चकत्ते, खुजली या अन्य प्रतिकूल प्रभावों का कारण बन सकती है। इससे लिवर की समस्याएं भी हो सकती है।

अल्कोहल में डालने पर पपीता बीज तैरने लगेगा
जानकारों की मानें तो काली मिर्च की कीमत जैसे-जैसे बढ़ रही है, उसमें पपीता के बीज की मिलावट भी बढ़ती जा रही है। पपीता बीज भूरा-काला और अंडाकार होता है, जबकि काली मिर्च का दाना काला, चिकना और गोल होता है। अल्कोहल में डालने पर पपीता बीज तैरने लगेगा, जबकि काली मिर्च सतह पर बैठ जाएगी। पानी में डालने पर अगर रंग छूटे तो काली मिर्च नकली है। नकली काली मिर्च के इस मामले में धंधेबाज ने मिलावट छिपाने के लिए हरी मटर का इस्तेमाल किया क्योंकि वह पपीता बीज की तुलना में भारी होती है। असली काली मिर्च की सतह पर सिकुड़ने के निशान होते हैं, इसलिए पिचका मटर के बीजों को सुखाकर और उन्हें काले रंग से रंगकर असली काली मिर्च जैसा बनाया गया।


टीम जांच कर नमूना लेती है। रिपोर्ट अनुसार कार्रवाई की जाती है। अगर ऐसा है तो अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी। खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर समय-समय पर जांच की जाती है।
-डॉ. टीआर रावत, सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा द्वितीय
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