{"_id":"698a43b3820df1452806a650","slug":"benefits-of-nano-fertilizer-explained-in-iffco-workshop-maharajganj-news-c-206-1-go11002-171271-2026-02-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Maharajganj News: इफको कार्यशाला में बताया नैनो उर्वरक का लाभ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Maharajganj News: इफको कार्यशाला में बताया नैनो उर्वरक का लाभ
विज्ञापन
कृषि अधिकारी ने किया कार्यक्रम को संबोधित
महराजगंज। विकास भवन सभागार में कृषि विभाग कर्मचारी व अधिकारियों के लिए एक दिवसीय नैनो उर्वरक प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए एक दिवसीय कार्यशाला इफको की तरफ से आयोजित की गई।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए जिला कृषि अधिकारी शैलेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि कृषि नवाचारों के जरिये कृषि को मुनाफे का माध्यम बनाने के प्रयास हो रहे हैं। शासन व प्रशासन इसके लिए लगातार प्रयास कर रहा है। नैनो उर्वरक के प्रयोग से मृदा प्रदूषण की संभावना काफी हद तक समाप्त होता है क्योंकि उर्वरक लिक्विड फार्म में होने के कारण सीधे पौधों से अवशोषित कर लिया जाता है। इफको प्रबंधक विनोद कुमार मौर्य ने प्राकृतिक खेती के लिए नैनो उर्वरक महत्व बताया। क्षेत्रीय प्रबंधक इफको डॉ. वीके सिंह ने बताया कि नैनो डीएपी 500 एमएल से एक क्विंटल बीज शोधित किया जा सकता है। इसकी लागत सिर्फ 600 रुपये होगी। लेकिन दानेदार डीएपी प्रयुक्त करते तो खर्च बढ़ जाएगा। ऐसे में किसान नैनो उर्वरक से खेती की लागत घटा सकते हैं। कार्यशाला में आईएफएफडीसी अमित कुमार सिंह, ड्रोन उद्यमी, सभी ब्लाक के एडीओ कृषि सहित 80 लोगों ने प्रतिभाग किया।
विज्ञापन
महराजगंज। विकास भवन सभागार में कृषि विभाग कर्मचारी व अधिकारियों के लिए एक दिवसीय नैनो उर्वरक प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए एक दिवसीय कार्यशाला इफको की तरफ से आयोजित की गई।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए जिला कृषि अधिकारी शैलेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि कृषि नवाचारों के जरिये कृषि को मुनाफे का माध्यम बनाने के प्रयास हो रहे हैं। शासन व प्रशासन इसके लिए लगातार प्रयास कर रहा है। नैनो उर्वरक के प्रयोग से मृदा प्रदूषण की संभावना काफी हद तक समाप्त होता है क्योंकि उर्वरक लिक्विड फार्म में होने के कारण सीधे पौधों से अवशोषित कर लिया जाता है। इफको प्रबंधक विनोद कुमार मौर्य ने प्राकृतिक खेती के लिए नैनो उर्वरक महत्व बताया। क्षेत्रीय प्रबंधक इफको डॉ. वीके सिंह ने बताया कि नैनो डीएपी 500 एमएल से एक क्विंटल बीज शोधित किया जा सकता है। इसकी लागत सिर्फ 600 रुपये होगी। लेकिन दानेदार डीएपी प्रयुक्त करते तो खर्च बढ़ जाएगा। ऐसे में किसान नैनो उर्वरक से खेती की लागत घटा सकते हैं। कार्यशाला में आईएफएफडीसी अमित कुमार सिंह, ड्रोन उद्यमी, सभी ब्लाक के एडीओ कृषि सहित 80 लोगों ने प्रतिभाग किया।
विज्ञापन