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आंगनबाड़ी केंद्रों में बदहाली का ‘राज’
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आंगनबाड़ी केंद्रों में बदहाली का ‘राज’
सात में से चार केंद्रों के पास भवन तो है, लेकिन उपयोग के लायक नहीं
तीन आंगनबाड़ी केंद्र प्राइमरी विद्यालय के भवन में किए जा रहे संचालित
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। परतावल क्षेत्र के तीन ग्रामसभाओं में सात आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन किया जा रहा है। सात में से चार के पास अपना भवन है, लेकिन उनकी हालत जर्जर है। ऐसी दशा में उनमें बच्चों को बैठाना और पढ़ाना खतरे से खाली नहीं है। वहीं, तीन केंद्रों के पास अपना भवन नहीं है। वह प्राइमरी स्कूलों में संचालित किए जा रहे हैं। ऐसे में उनके पास बुनियादी सुविधाओं के होने का सवाल ही नहीं उठता। एक तरह से इन केंद्रों में बदहाली का राज कायम है।
शनिवार को की गई पड़ताल में पला चला कि अमवां ग्रामसभा में दो आंगनबाड़ी केंद्र हैं और दोनों के भवनों की हालत खस्ताहाल है। इसी तरह पिपरपाती ग्राम सभा में भी दो आंगनबाड़ी केंद्र हैं। एक केंद्र का अपना भवन है, लेकिन जर्जर हालत में है। दूसरा केंद्र प्राइमरी स्कूल में चल रहा है। वहीं, छपिया ग्रामसभा में तीन आंगनबाड़ी केंद्र हैं। एक केंद्र के पास अपना भवन है, जोकि उपयोग के लायक नहीं है। जबकि दो केंद्र बिना भवन के हैं। इस कारण उनका संचालन प्राइमरी स्कूल में किया जा रहा है। इन केंद्रों में पंजीकृत बच्चों में कुपोषित और अति कुपोषित भी शामिल हैं। विभाग का दावा है कि सभी पंजीकृत बच्चों को समय समय पर सुविधाएं दी जा रही हैं। इन केंद्रों को देखकर नहीं लगता कि इनमें प्राइमरी स्तर की पढ़ाई हो पाएगी।
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अमवां ग्रामसभा : भवन जर्जर, आने जाने के लिए रास्ता नहीं
ग्रामसभा अमवां में दो आंगनबाड़ी केंद्र हैं। आंगनबाड़ी केंद्र अमवां द्वितीय का भवन बीस साल पहले बना था। अब उसकी हालत जर्जर हो गई है। इस समय भवन की मरम्मत कराई जा रही है। बरसात में केंद्र तक पहुंचने के लिए रास्ता नहीं है। चारों तरफ जलभराव की स्थिति रहती है। शनिवार को केंद्र पर सहायिका शोभा देवी मौजूद थीं। उन्होंने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता प्रतिमा सिंह की तबीयत खराब है। केंद्र में 3 वर्ष के 70 और 3-6 वर्ष के 32 बच्चे पंजीकृत हैं। कुपोषित बच्चे 4 और अति कुपोषित 2 बच्चे हैं। गांव की दुर्गावती और बबीता ने बताया कि समय-समय पर पुष्टाहार मिलता है। बच्चे केंद्र में जाते हैं।
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अमवां के आंगनबाड़ी केंद्र प्रथम के भवन की भी हालत जर्जर है। आसपास सफाई व्यवस्था बदहाल है। कार्यकर्ता मंजू देवी ने बताया कि केंद्र में 7 माह से 3 वर्ष तक के 59 और 3-6 वर्ष के 37 बच्चे पंजीकृत हैं। तीन बच्चे कुपोषित हैं। पंजीकृत गर्भवती महिलाएं 9 हैं। गांव की पूनम, श्रीकला, आशा, वंदना, कुंजीला, प्रीति और कुमकुम ने बताया कि हर महीने पुष्टाहार मिलता है।
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गांव पिपरपाती : दो केंद्रों में एक के पास भवन वह भी खस्ताहाल
पिपरपाती ग्रामसभा में दो आंगनबाड़ी हैं। एक केंद्र का अपना भवन है, लेकिन उसकी हालत ठीक नहीं है। फर्श टूटा हुआ है। दीवार से प्लास्टर गिरता है। ग्राम प्रधान मालती देवी ने बताया कि भवन का निर्माण वर्ष 2016-17 में कराया गया है। चार साल में फर्श टूट गया। प्लास्टर गिर रहा है। खिड़की टूटी हुई है। भवन की मरम्मत कराई जाएगी। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता शैला देवी ने बताया कि केंद्र में 7 माह से 3 वर्ष तक के 52 तथा 3-6 वर्ष के 29 बच्चे पंजीकृत हैं। पांच बच्चे कुपोषित हैं और तीन अति कुपोषित हैं। सबको पुष्टाहार दिया जाता है।
वहीं, ग्रामसभा के दूसरे केंद्र के पास अपना भवन नहीं है। यह केंद्र प्राइमरी स्कूल में संचालित किया जाता है। इस केंद्र की कार्यकर्ता शकुंतला तिवारी ने बताया कि केंद्र में 7 माह से 3 वर्ष तक के 50 और 3-6 वर्ष के 30 बच्चे पंजीकृत हैं। चार बच्चे कुपोषित हैं और 3 अति कुपोषित हैं। गांव की गीता देवी, माया, नसीमा, गुड़िया आदि गर्भवती महिलाओं ने बताया कि हर महीने पुष्टाहार मिलता है।
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ग्रामसभा छपिया के तीनों आंगनबाड़ी केंद्र प्राइमरी स्कूल में चल रहे
ग्रामसभा छपिया में तीन आंगनबाड़ी केंद्र हैं। एक केंद्र वर्ष 2014-15 में बना था, जो अब तक हैंडओवर नहीं हुआ है। इससे पहले ही उसका भवन जर्जर हो गया है। दीवार से प्लास्टर गिरने लगा है। दो अन्य केंद्रों के पास भी अपना भवन नहीं है। ग्राम प्रधान सहाना ने बताया कि ग्रामसभा के तीनों आंगनबाड़ी केंद्र विद्यालय भवन में संचालित होते हैं। आंगनबाड़ी केंद्र एक की कार्यकर्ता बसंती देवी ने बताया कि उनके केंद्र में 7 माह से 3 वर्ष तक के 59 और 3-6 वर्ष के 30 बच्चे पंजीकृत है। इनमें से दो बच्चे कुपोषित हैं। सबको पुष्टाहार दिया जाता है। आंगनबाड़ी केंद्र दो की कार्यकर्ता प्रतिमा देवी ने बताया कि उनके केंद्र में 7 माह से 3 वर्ष के 50 और 3-6 वर्ष के 28 बच्चे पंजीकृत हैं। 2 बचचे कुपोषित हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सबिना बेगम ने बताया कि उनके केंद्र में 7 माह से 3 वर्ष के 51 तथा 3-6 वर्ष के 30 बच्चे पंजीकृत हैं तथा 2 बच्चे कुपोषित है। सबको पुष्टाहार दिया जाता है।
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ब्लॉक में कितनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका व सुपरवाइजर है, इसकी सटीक जानकारी नहीं है। क्षेत्र में सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत बच्चों को जरूरी सुविधाएं बेहतर ढंग से दी जा रही हैं। जहां कमी है, उसे ठीक कराने का प्रयास किया जाएगा।
- नीरजा गुप्ता, सीडीपीओ, परतावल
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सात में से चार केंद्रों के पास भवन तो है, लेकिन उपयोग के लायक नहीं
तीन आंगनबाड़ी केंद्र प्राइमरी विद्यालय के भवन में किए जा रहे संचालित
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। परतावल क्षेत्र के तीन ग्रामसभाओं में सात आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन किया जा रहा है। सात में से चार के पास अपना भवन है, लेकिन उनकी हालत जर्जर है। ऐसी दशा में उनमें बच्चों को बैठाना और पढ़ाना खतरे से खाली नहीं है। वहीं, तीन केंद्रों के पास अपना भवन नहीं है। वह प्राइमरी स्कूलों में संचालित किए जा रहे हैं। ऐसे में उनके पास बुनियादी सुविधाओं के होने का सवाल ही नहीं उठता। एक तरह से इन केंद्रों में बदहाली का राज कायम है।
शनिवार को की गई पड़ताल में पला चला कि अमवां ग्रामसभा में दो आंगनबाड़ी केंद्र हैं और दोनों के भवनों की हालत खस्ताहाल है। इसी तरह पिपरपाती ग्राम सभा में भी दो आंगनबाड़ी केंद्र हैं। एक केंद्र का अपना भवन है, लेकिन जर्जर हालत में है। दूसरा केंद्र प्राइमरी स्कूल में चल रहा है। वहीं, छपिया ग्रामसभा में तीन आंगनबाड़ी केंद्र हैं। एक केंद्र के पास अपना भवन है, जोकि उपयोग के लायक नहीं है। जबकि दो केंद्र बिना भवन के हैं। इस कारण उनका संचालन प्राइमरी स्कूल में किया जा रहा है। इन केंद्रों में पंजीकृत बच्चों में कुपोषित और अति कुपोषित भी शामिल हैं। विभाग का दावा है कि सभी पंजीकृत बच्चों को समय समय पर सुविधाएं दी जा रही हैं। इन केंद्रों को देखकर नहीं लगता कि इनमें प्राइमरी स्तर की पढ़ाई हो पाएगी।
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अमवां ग्रामसभा : भवन जर्जर, आने जाने के लिए रास्ता नहीं
ग्रामसभा अमवां में दो आंगनबाड़ी केंद्र हैं। आंगनबाड़ी केंद्र अमवां द्वितीय का भवन बीस साल पहले बना था। अब उसकी हालत जर्जर हो गई है। इस समय भवन की मरम्मत कराई जा रही है। बरसात में केंद्र तक पहुंचने के लिए रास्ता नहीं है। चारों तरफ जलभराव की स्थिति रहती है। शनिवार को केंद्र पर सहायिका शोभा देवी मौजूद थीं। उन्होंने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता प्रतिमा सिंह की तबीयत खराब है। केंद्र में 3 वर्ष के 70 और 3-6 वर्ष के 32 बच्चे पंजीकृत हैं। कुपोषित बच्चे 4 और अति कुपोषित 2 बच्चे हैं। गांव की दुर्गावती और बबीता ने बताया कि समय-समय पर पुष्टाहार मिलता है। बच्चे केंद्र में जाते हैं।
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अमवां के आंगनबाड़ी केंद्र प्रथम के भवन की भी हालत जर्जर है। आसपास सफाई व्यवस्था बदहाल है। कार्यकर्ता मंजू देवी ने बताया कि केंद्र में 7 माह से 3 वर्ष तक के 59 और 3-6 वर्ष के 37 बच्चे पंजीकृत हैं। तीन बच्चे कुपोषित हैं। पंजीकृत गर्भवती महिलाएं 9 हैं। गांव की पूनम, श्रीकला, आशा, वंदना, कुंजीला, प्रीति और कुमकुम ने बताया कि हर महीने पुष्टाहार मिलता है।
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गांव पिपरपाती : दो केंद्रों में एक के पास भवन वह भी खस्ताहाल
पिपरपाती ग्रामसभा में दो आंगनबाड़ी हैं। एक केंद्र का अपना भवन है, लेकिन उसकी हालत ठीक नहीं है। फर्श टूटा हुआ है। दीवार से प्लास्टर गिरता है। ग्राम प्रधान मालती देवी ने बताया कि भवन का निर्माण वर्ष 2016-17 में कराया गया है। चार साल में फर्श टूट गया। प्लास्टर गिर रहा है। खिड़की टूटी हुई है। भवन की मरम्मत कराई जाएगी। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता शैला देवी ने बताया कि केंद्र में 7 माह से 3 वर्ष तक के 52 तथा 3-6 वर्ष के 29 बच्चे पंजीकृत हैं। पांच बच्चे कुपोषित हैं और तीन अति कुपोषित हैं। सबको पुष्टाहार दिया जाता है।
वहीं, ग्रामसभा के दूसरे केंद्र के पास अपना भवन नहीं है। यह केंद्र प्राइमरी स्कूल में संचालित किया जाता है। इस केंद्र की कार्यकर्ता शकुंतला तिवारी ने बताया कि केंद्र में 7 माह से 3 वर्ष तक के 50 और 3-6 वर्ष के 30 बच्चे पंजीकृत हैं। चार बच्चे कुपोषित हैं और 3 अति कुपोषित हैं। गांव की गीता देवी, माया, नसीमा, गुड़िया आदि गर्भवती महिलाओं ने बताया कि हर महीने पुष्टाहार मिलता है।
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ग्रामसभा छपिया के तीनों आंगनबाड़ी केंद्र प्राइमरी स्कूल में चल रहे
ग्रामसभा छपिया में तीन आंगनबाड़ी केंद्र हैं। एक केंद्र वर्ष 2014-15 में बना था, जो अब तक हैंडओवर नहीं हुआ है। इससे पहले ही उसका भवन जर्जर हो गया है। दीवार से प्लास्टर गिरने लगा है। दो अन्य केंद्रों के पास भी अपना भवन नहीं है। ग्राम प्रधान सहाना ने बताया कि ग्रामसभा के तीनों आंगनबाड़ी केंद्र विद्यालय भवन में संचालित होते हैं। आंगनबाड़ी केंद्र एक की कार्यकर्ता बसंती देवी ने बताया कि उनके केंद्र में 7 माह से 3 वर्ष तक के 59 और 3-6 वर्ष के 30 बच्चे पंजीकृत है। इनमें से दो बच्चे कुपोषित हैं। सबको पुष्टाहार दिया जाता है। आंगनबाड़ी केंद्र दो की कार्यकर्ता प्रतिमा देवी ने बताया कि उनके केंद्र में 7 माह से 3 वर्ष के 50 और 3-6 वर्ष के 28 बच्चे पंजीकृत हैं। 2 बचचे कुपोषित हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सबिना बेगम ने बताया कि उनके केंद्र में 7 माह से 3 वर्ष के 51 तथा 3-6 वर्ष के 30 बच्चे पंजीकृत हैं तथा 2 बच्चे कुपोषित है। सबको पुष्टाहार दिया जाता है।
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ब्लॉक में कितनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका व सुपरवाइजर है, इसकी सटीक जानकारी नहीं है। क्षेत्र में सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत बच्चों को जरूरी सुविधाएं बेहतर ढंग से दी जा रही हैं। जहां कमी है, उसे ठीक कराने का प्रयास किया जाएगा।
- नीरजा गुप्ता, सीडीपीओ, परतावल