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Maharajganj News: 14 साल में मां बनी बच्ची की दिल दहला देने वाली कहानी
Thu, 01 Jun 2023 01:04 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Thu, 01 Jun 2023 01:04 AM IST
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दोस्त के वेश् में आया दरिंदा, बिन ब्याही मां बनाकर तबाह कर दी जिंदगी
गांव में बातचीत के दौरान हुई थी युवक से दोस्ती, प्रेम जाल में फंसाने के लिए युवक ने दिया था शादी का झांसा
प्रेमी से मिलने गई तो उसके दोस्तों ने हैवानियत की सारी हदें कर दीं पार
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। गांव में दोनों की बातचीत के दौरान हुई दोस्ती प्यार में कब बदल गई कुछ पता नहीं चला। इसी बीच उसकी जिंदगी में शातिर दोस्त दरिंदा दोस्त बन गया तो उसकी जिंदगी तबाह कर डाली। युवक के चंगुल में फंसी बच्ची ने 14 साल की उम्र में ही उससे शादी करने की ठान ली और आरोपी से मिलने गांव के बाहर पहुंच गई। यह उसकी सबसे बड़ी भूल थी। झांसे में आने के बाद उसे सही व गलत का फर्क समझ में नहीं आया। अब उसके पास डेढ़ साल की बच्ची है। उसका पालन-पोषण कर रही है।
निचलौल थाना क्षेत्र के एक गांव का यह मामला वर्ष 2021 जुलाई का है। उस वक्त बच्ची की उम्र 14 साल थी। वह घर पर गुमसुम थी। किसी से कोई बात नहीं करती थी। परिजन भी समझ नहीं पाते थे कि उसे क्या हुआ है। बच्ची से हुई दरिंदगी पर पर्दा पड़ा हुआ था। अचानक उसके पेट में दर्द हुआ तो परिजन अस्पताल ले गए। वहां डॉक्टर ने जांच की तो पता चला की बच्ची पांच माह की गर्भवती है। यह सुनकर उसके माता-पिता के होश उड़ गए। उन्हें कुछ समझ में नहीं आ रहा थी की कच्ची उम्र में ही बेटी मां कैसे बन गई। उससे पूछताछ शुरू हुई तो वह फफक कर रो पड़ी। सिसकते हुए उसने अपने साथ हुई दरिंदगी की कहानी को बयां की तो सभी के होश उड़ गए। उसे अपनी गलती का अहसास हुआ। मां-बाप से लिपट कर रोते-रोते बेहोश हो गई थी।
पीड़ित बच्ची के मुताबिक उससे वह अक्सर मिलती थी। दोनों के बीच आतंरिक रिश्ते बन गए थे। फरवरी 2021 की शाम को घर से बाहर प्रेमी से मिलने पहुंची थी। उसे पता नहीं था कि प्रेमी के साथ उसके दोस्त भी हैं। वह खतरे से अनजान होकर उससे मिलने गई तो प्रेमी ने बातों में उलझ लिया। इसके बाद पास के एक झोपड़ी में ले जाकर बातचीत कर रहा था। इस बीच उसके तीन दोस्त भी आ गए। सभी ने मिलकर बारी-बारी से दरिंदगी की। वह बेहोश हो गई थी। करीब दो घंटे बाद होश में आने पर किसी तरह से घर पहुंची और किसी को कुछ बताए बगैर खामोश हो गई थी। किसी से कोई बात नहीं करती थी।
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तबीयत खराब हुई तो पूरी कहानी बयां की, इसके बाद बच्ची के पिता थाने का चक्कर लगा रहा है। 16 जुलाई 2021 को तहरीर दी गई तो एक युवक के पिता को पुलिस कई दिनों तक थाने में बैठाने के बाद छोड़ दिया। 25 जुलाई 2021 को तहरीर दी तो पुलिस ने चार आरोपियों पर केस दर्ज किया। कुछ दिन तक पुलिस भटकाती रही। प्रदर्शन करने के बाद पुलिस की नींद टूटी तो चारों को गिरफ्तार कर जेल भेजा। उधर, नवंबर 2021 में उसने एक बच्ची का जन्म दिया। कच्ची उम्र मां बनने के दौरान दर्द को देखकर मां-बाप सिहर उठे। निचलौल के पुलिस क्षेत्राधिकारी सूर्यबली मौर्य ने बताया कि इस प्रकरण में आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल हो चुका है। आरोपियों को कड़ी सजा दिलाई जाएगी।
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आज भी वह उस दर्द को याद कर सिहर जाती
बच्ची की उम्र अब 16 साल हो गई है, लेकिन आज भी वह उस दर्द को याद कर सिहर जाती है। खुद तो सामने नहीं आती है, लेकिन परिजन बताते हैं कि उससे इस विषय पर कोई बात नहीं करता है। हम लोग भी पूछते हैं तो यही बोलती है, कुछ नहीं कहना और रोने लगती है। इस वजह से अब उसे कुछ भी याद नहीं दिलाना चाहते हैं। आसपास के लोगों को भी कुछ नहीं मालूम है। पिता कहते हैं, बच्ची गांव के स्कूल में कक्षा सात में पढ़ती थी। फालतू किसी से बात भी नहीं करती थी। वह कैसे युवक के चंगुल में फंसी आज तक समझ में नहीं आता है। वहीं, बच्ची ने पुलिस को दिए बयान में बताया था कि उसकी फोन पर बातचीत के दौरान दोस्ती हुई थी। तब उसे लगा कि वह सही कर रही है। बातचीत में बहकाकर उसने मिलने के लिए बुलाया, फिर दोस्तो के साथ मिलकर दुष्कर्म किया।
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14 साल की बालिका का प्रसव कराने का दर्द समझिए
एक रिश्तेदार ने बताया कि क्या कह सकते हैं, ऐसे ही समझ लीजिए कि एक 14 साल की बालिका के प्रसव कराने का दर्द क्या हो सकता है। किस तरह से समाज से बचते हुए सब कुछ कराया गया, यह हम ही लोग जानते हैं। आप तो जानते ही हैं, यह समाज अगर जान जाए तो कभी यह नहीं सोचेगा कि कौन सही है कौन गलत है।
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कुछ मत पूछिए, बहुत बुरी बीत रही हम पर
घटनाक्रम को बताने के बाद पिता भी रुआंसे हो जाते हैं। दरिंदे की हरकतों का बच्ची पर हुए असर का दर्द पिता के चेहरे पर साफ नजर आता है। वह कहते हैं, मत पूछिए, जो हुआ, वह बीता कल है। अब उसे याद नहीं करना चाहता। बहुत बुरी बीती और बीत रही है। बेटी भी किसी तरह से भूल गई है और अब डेढ़ साल की अपनी बच्ची की परवरिश में लगी है। जो झेला उसे याद कर आज भी डर लगता है। गलती तो मेरी भी है, जो बेटी का ध्यान नहीं रख पाया। सभी मां-बाप को कहना चाहता हूं-बहुत ध्यान रखें बच्चों का। ईद-गिर्द मंडरा रहे दरिंदे बच्चों की जिंदगी नरक बना दे रहे हैं।
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फोटो
बच्चे समझ नहीं पाते कि क्या खतरे हैं
उम्र से पहले किसी भी चीज का मिल जाना प्रारंभिक जोखिम को बढ़ा देता है। वर्तमान में यही हो रहा है। इंटरनेट सस्ते हैं, मोबाइल फोन भी पढ़ाई के लिए आज की जरूरत बन चुका है। यही वजह है माता-पिता को न चाहते हुए भी मोबाइल फोन देना पड़ता है। फिर इसी में शातिर लोग बाल मन पर अपनी ऐसी छवि बना लेते हैं कि वह भटक जाते हैं। इसका एक बड़ा कारण इंटरनेट पर आसानी से उपलब्ध वह सामग्री है, जिसे एक उम्र के बाद ही सोचा और समझा जा सकता है। बाल उम्र में इंटरनेट व आधुनिकता का असर हो जाता है और फिर बच्चे समझ नहीं पाते कि वह क्या कर रहे हैं और किन खतरों में फंस रहे हैं।
डॉ. आनंद मुर्गन, मनोरोग विशेषज्ञ, केएमसी डिजिटल अस्पताल
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बेवजह की छूट बच्चों के लिए ज्यादा खतरनाक
महराजगंज। नाबालिग बच्चियों को बरगला कर उनके साथ गलत काम और क्रूरता जैसी घटनाओं के लिए कोई एक व्यक्ति, समूह या कोई विशेष तंत्र ही दोषी नहीं है, बल्कि इसके बहुत से कारक हैं। निरंतर इस तरह की बढ़ रही घटनाओं से चिंतित साहित्यकारों का कहना है कि समाज को भी अभिभावक की भूमिका में आना होगा। कुछ गलत होता देख हस्तक्षेप की आदत डालनी पड़ेगी। एकाकी सोच छोड़नी होगी। वहीं, अभिभावकों को भी अपने बच्चों को जरूरत से ज्यादा छूट देने या भरोसा जताने की आदत बदलनी होगी। उन्हें नैतिकता, अपनी संस्कृति और परंपरा की भी जानकारी देनी होगी
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परिवार का प्रशिक्षण बुनियादी तौर पर कमजोर हुआ
हमारे सामाजिक परिवेश में कई तरह की असमानताएं और असुरक्षा मौजूद हैं। साथ ही टीवी-मोबाइल और इंटरनेट की दुनिया ने एक रंगीन दुनिया सजा रखी है। बाल मन इससे बहुत ज्यादा प्रभावित हो रहा है। परिवार का प्रशिक्षण बुनियादी तौर पर कमजोर हुआ है। ऐसे में किसी का स्वप्न सरीखी दुनिया पाने के लिए भागना नितांत स्वाभाविक है, लेकिन बेहद खतरनाक भी। क्योंकि सब तरफ शिकारी बैठे हैं। परिवार और समाज का बुनियादी ढांचा ठीक करना होगा नहीं तो इस तरह की घटनाओं को रोक पाना बिल्कुल संभव नहीं होगा।
डॉ. राणा प्रताप त्रिपाठी, साहित्यकार
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दोष उम्र का भी है जो सही मार्गदर्शन न पाकर गलत दिशा की ओर मुड़ जाता
आजकल किशोरों में एक से अधिक से दोस्ती, लव आदि का फैशन चल पड़ा है। सोशल मीडिया, सीरियल्स, फिल्में भी लव, सेक्स, हिंसा यही सबकुछ परोस रही हैं, जिसका प्रभाव नई पीढ़ी पर कुछ ज्यादा ही पड़ रहा है। कॅरियर के नाम पर घर से मिली आजादी और अभिभावकों का अपने बच्चों पर जरूरत से ज्यादा भरोसा उन्हें इनके लिए प्रोत्साहित कर रहा है। दुष्परिणाम दिल्ली जैसी दिल दहला देने वाली घटना के रूप में सामने आ रहा है। समाज बचपन से ही लड़कों के दिमाग में जो श्रेष्ठता ग्रंथि विकसित करा देता है, वही ग्रंथि लड़कों को उग्र बना रही है। दोष उम्र का भी है जो सही मार्गदर्शन न पाकर गलत दिशा की ओर मुड़ जाता है। इसके लिए अभिभावक, परिवार, समाज, वातावरण, संगति सब जिम्मेदार हैं।
डॉ. विजय आनंद मिश्र, साहित्यकार
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पढ़ाई के साथ नैतिक विकास भी बहुत जरूरी
हमारे समाज में शिक्षा का अर्थ केवल स्कूली परीक्षा पास करने तक सीमित होता जा रहा है। नाबालिग बच्चियों को बरगला कर उनका शोषण, उन्हें अंधेरी गलियों में छोड़ देना या फिर दिल्ली जैसी घटना रोज देश के हर इलाके में घट रही है। इसे केवल कानून व्यवस्था की कमजोरी का या टीनएज आक्रामकता का मामला मान कर नहीं सुलझाया जा सकता है। जब तक सोच नहीं बदलेगी, कोई बदलाव नहीं होगा। हमारी नैतिकता का लगातार क्षरण हो रहा है। हम अपने बच्चों को ज्यादा से ज्यादा भौतिक सुविधाएं देने में जुटे हैं। मगर उनमें नैतिकता का विकास कैसे होगा, इसपर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है। यह अत्यंत दुखद है।
डॉ. विपिन यादव, साहित्यकार
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इस दिशा में कोई गंभीरता से नहीं सोच रहा
नाबालिग बच्चियों को बरगलाकर उनके साथ गलत करना या साक्षी के साथ हुई घटना पहली या हाल-फिलहाल की नहीं है। लंबे समय से यह सिलसिला चल रहा है। घटनाएं हो रही हैं मगर, इस दिशा में कोई गंभीरता से नहीं सोच रहा। हम आज भी अपने लड़कों को मानसिक रूप से इतना विकसित नहीं कर पाए हैं कि वह समझ सकें कि स्त्री का भी अपना एक अलग वजूद होता है। यह लड़कों को समय रहते समझाने का दायित्व मां-बाप का है।
राजकिशोर वर्मा, साहित्यकार
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गांव में बातचीत के दौरान हुई थी युवक से दोस्ती, प्रेम जाल में फंसाने के लिए युवक ने दिया था शादी का झांसा
प्रेमी से मिलने गई तो उसके दोस्तों ने हैवानियत की सारी हदें कर दीं पार
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। गांव में दोनों की बातचीत के दौरान हुई दोस्ती प्यार में कब बदल गई कुछ पता नहीं चला। इसी बीच उसकी जिंदगी में शातिर दोस्त दरिंदा दोस्त बन गया तो उसकी जिंदगी तबाह कर डाली। युवक के चंगुल में फंसी बच्ची ने 14 साल की उम्र में ही उससे शादी करने की ठान ली और आरोपी से मिलने गांव के बाहर पहुंच गई। यह उसकी सबसे बड़ी भूल थी। झांसे में आने के बाद उसे सही व गलत का फर्क समझ में नहीं आया। अब उसके पास डेढ़ साल की बच्ची है। उसका पालन-पोषण कर रही है।
निचलौल थाना क्षेत्र के एक गांव का यह मामला वर्ष 2021 जुलाई का है। उस वक्त बच्ची की उम्र 14 साल थी। वह घर पर गुमसुम थी। किसी से कोई बात नहीं करती थी। परिजन भी समझ नहीं पाते थे कि उसे क्या हुआ है। बच्ची से हुई दरिंदगी पर पर्दा पड़ा हुआ था। अचानक उसके पेट में दर्द हुआ तो परिजन अस्पताल ले गए। वहां डॉक्टर ने जांच की तो पता चला की बच्ची पांच माह की गर्भवती है। यह सुनकर उसके माता-पिता के होश उड़ गए। उन्हें कुछ समझ में नहीं आ रहा थी की कच्ची उम्र में ही बेटी मां कैसे बन गई। उससे पूछताछ शुरू हुई तो वह फफक कर रो पड़ी। सिसकते हुए उसने अपने साथ हुई दरिंदगी की कहानी को बयां की तो सभी के होश उड़ गए। उसे अपनी गलती का अहसास हुआ। मां-बाप से लिपट कर रोते-रोते बेहोश हो गई थी।
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पीड़ित बच्ची के मुताबिक उससे वह अक्सर मिलती थी। दोनों के बीच आतंरिक रिश्ते बन गए थे। फरवरी 2021 की शाम को घर से बाहर प्रेमी से मिलने पहुंची थी। उसे पता नहीं था कि प्रेमी के साथ उसके दोस्त भी हैं। वह खतरे से अनजान होकर उससे मिलने गई तो प्रेमी ने बातों में उलझ लिया। इसके बाद पास के एक झोपड़ी में ले जाकर बातचीत कर रहा था। इस बीच उसके तीन दोस्त भी आ गए। सभी ने मिलकर बारी-बारी से दरिंदगी की। वह बेहोश हो गई थी। करीब दो घंटे बाद होश में आने पर किसी तरह से घर पहुंची और किसी को कुछ बताए बगैर खामोश हो गई थी। किसी से कोई बात नहीं करती थी।
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आज भी वह उस दर्द को याद कर सिहर जाती
बच्ची की उम्र अब 16 साल हो गई है, लेकिन आज भी वह उस दर्द को याद कर सिहर जाती है। खुद तो सामने नहीं आती है, लेकिन परिजन बताते हैं कि उससे इस विषय पर कोई बात नहीं करता है। हम लोग भी पूछते हैं तो यही बोलती है, कुछ नहीं कहना और रोने लगती है। इस वजह से अब उसे कुछ भी याद नहीं दिलाना चाहते हैं। आसपास के लोगों को भी कुछ नहीं मालूम है। पिता कहते हैं, बच्ची गांव के स्कूल में कक्षा सात में पढ़ती थी। फालतू किसी से बात भी नहीं करती थी। वह कैसे युवक के चंगुल में फंसी आज तक समझ में नहीं आता है। वहीं, बच्ची ने पुलिस को दिए बयान में बताया था कि उसकी फोन पर बातचीत के दौरान दोस्ती हुई थी। तब उसे लगा कि वह सही कर रही है। बातचीत में बहकाकर उसने मिलने के लिए बुलाया, फिर दोस्तो के साथ मिलकर दुष्कर्म किया।
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14 साल की बालिका का प्रसव कराने का दर्द समझिए
एक रिश्तेदार ने बताया कि क्या कह सकते हैं, ऐसे ही समझ लीजिए कि एक 14 साल की बालिका के प्रसव कराने का दर्द क्या हो सकता है। किस तरह से समाज से बचते हुए सब कुछ कराया गया, यह हम ही लोग जानते हैं। आप तो जानते ही हैं, यह समाज अगर जान जाए तो कभी यह नहीं सोचेगा कि कौन सही है कौन गलत है।
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कुछ मत पूछिए, बहुत बुरी बीत रही हम पर
घटनाक्रम को बताने के बाद पिता भी रुआंसे हो जाते हैं। दरिंदे की हरकतों का बच्ची पर हुए असर का दर्द पिता के चेहरे पर साफ नजर आता है। वह कहते हैं, मत पूछिए, जो हुआ, वह बीता कल है। अब उसे याद नहीं करना चाहता। बहुत बुरी बीती और बीत रही है। बेटी भी किसी तरह से भूल गई है और अब डेढ़ साल की अपनी बच्ची की परवरिश में लगी है। जो झेला उसे याद कर आज भी डर लगता है। गलती तो मेरी भी है, जो बेटी का ध्यान नहीं रख पाया। सभी मां-बाप को कहना चाहता हूं-बहुत ध्यान रखें बच्चों का। ईद-गिर्द मंडरा रहे दरिंदे बच्चों की जिंदगी नरक बना दे रहे हैं।
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बच्चे समझ नहीं पाते कि क्या खतरे हैं
उम्र से पहले किसी भी चीज का मिल जाना प्रारंभिक जोखिम को बढ़ा देता है। वर्तमान में यही हो रहा है। इंटरनेट सस्ते हैं, मोबाइल फोन भी पढ़ाई के लिए आज की जरूरत बन चुका है। यही वजह है माता-पिता को न चाहते हुए भी मोबाइल फोन देना पड़ता है। फिर इसी में शातिर लोग बाल मन पर अपनी ऐसी छवि बना लेते हैं कि वह भटक जाते हैं। इसका एक बड़ा कारण इंटरनेट पर आसानी से उपलब्ध वह सामग्री है, जिसे एक उम्र के बाद ही सोचा और समझा जा सकता है। बाल उम्र में इंटरनेट व आधुनिकता का असर हो जाता है और फिर बच्चे समझ नहीं पाते कि वह क्या कर रहे हैं और किन खतरों में फंस रहे हैं।
डॉ. आनंद मुर्गन, मनोरोग विशेषज्ञ, केएमसी डिजिटल अस्पताल
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बेवजह की छूट बच्चों के लिए ज्यादा खतरनाक
महराजगंज। नाबालिग बच्चियों को बरगला कर उनके साथ गलत काम और क्रूरता जैसी घटनाओं के लिए कोई एक व्यक्ति, समूह या कोई विशेष तंत्र ही दोषी नहीं है, बल्कि इसके बहुत से कारक हैं। निरंतर इस तरह की बढ़ रही घटनाओं से चिंतित साहित्यकारों का कहना है कि समाज को भी अभिभावक की भूमिका में आना होगा। कुछ गलत होता देख हस्तक्षेप की आदत डालनी पड़ेगी। एकाकी सोच छोड़नी होगी। वहीं, अभिभावकों को भी अपने बच्चों को जरूरत से ज्यादा छूट देने या भरोसा जताने की आदत बदलनी होगी। उन्हें नैतिकता, अपनी संस्कृति और परंपरा की भी जानकारी देनी होगी
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परिवार का प्रशिक्षण बुनियादी तौर पर कमजोर हुआ
हमारे सामाजिक परिवेश में कई तरह की असमानताएं और असुरक्षा मौजूद हैं। साथ ही टीवी-मोबाइल और इंटरनेट की दुनिया ने एक रंगीन दुनिया सजा रखी है। बाल मन इससे बहुत ज्यादा प्रभावित हो रहा है। परिवार का प्रशिक्षण बुनियादी तौर पर कमजोर हुआ है। ऐसे में किसी का स्वप्न सरीखी दुनिया पाने के लिए भागना नितांत स्वाभाविक है, लेकिन बेहद खतरनाक भी। क्योंकि सब तरफ शिकारी बैठे हैं। परिवार और समाज का बुनियादी ढांचा ठीक करना होगा नहीं तो इस तरह की घटनाओं को रोक पाना बिल्कुल संभव नहीं होगा।
डॉ. राणा प्रताप त्रिपाठी, साहित्यकार
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दोष उम्र का भी है जो सही मार्गदर्शन न पाकर गलत दिशा की ओर मुड़ जाता
आजकल किशोरों में एक से अधिक से दोस्ती, लव आदि का फैशन चल पड़ा है। सोशल मीडिया, सीरियल्स, फिल्में भी लव, सेक्स, हिंसा यही सबकुछ परोस रही हैं, जिसका प्रभाव नई पीढ़ी पर कुछ ज्यादा ही पड़ रहा है। कॅरियर के नाम पर घर से मिली आजादी और अभिभावकों का अपने बच्चों पर जरूरत से ज्यादा भरोसा उन्हें इनके लिए प्रोत्साहित कर रहा है। दुष्परिणाम दिल्ली जैसी दिल दहला देने वाली घटना के रूप में सामने आ रहा है। समाज बचपन से ही लड़कों के दिमाग में जो श्रेष्ठता ग्रंथि विकसित करा देता है, वही ग्रंथि लड़कों को उग्र बना रही है। दोष उम्र का भी है जो सही मार्गदर्शन न पाकर गलत दिशा की ओर मुड़ जाता है। इसके लिए अभिभावक, परिवार, समाज, वातावरण, संगति सब जिम्मेदार हैं।
डॉ. विजय आनंद मिश्र, साहित्यकार
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पढ़ाई के साथ नैतिक विकास भी बहुत जरूरी
हमारे समाज में शिक्षा का अर्थ केवल स्कूली परीक्षा पास करने तक सीमित होता जा रहा है। नाबालिग बच्चियों को बरगला कर उनका शोषण, उन्हें अंधेरी गलियों में छोड़ देना या फिर दिल्ली जैसी घटना रोज देश के हर इलाके में घट रही है। इसे केवल कानून व्यवस्था की कमजोरी का या टीनएज आक्रामकता का मामला मान कर नहीं सुलझाया जा सकता है। जब तक सोच नहीं बदलेगी, कोई बदलाव नहीं होगा। हमारी नैतिकता का लगातार क्षरण हो रहा है। हम अपने बच्चों को ज्यादा से ज्यादा भौतिक सुविधाएं देने में जुटे हैं। मगर उनमें नैतिकता का विकास कैसे होगा, इसपर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है। यह अत्यंत दुखद है।
डॉ. विपिन यादव, साहित्यकार
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इस दिशा में कोई गंभीरता से नहीं सोच रहा
नाबालिग बच्चियों को बरगलाकर उनके साथ गलत करना या साक्षी के साथ हुई घटना पहली या हाल-फिलहाल की नहीं है। लंबे समय से यह सिलसिला चल रहा है। घटनाएं हो रही हैं मगर, इस दिशा में कोई गंभीरता से नहीं सोच रहा। हम आज भी अपने लड़कों को मानसिक रूप से इतना विकसित नहीं कर पाए हैं कि वह समझ सकें कि स्त्री का भी अपना एक अलग वजूद होता है। यह लड़कों को समय रहते समझाने का दायित्व मां-बाप का है।
राजकिशोर वर्मा, साहित्यकार