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Maharajganj News: सावधान! दलाल बेच रहे सीलिंग की जमीन, खरीदी तो डूबेगी रकम
Mon, 25 Nov 2024 05:34 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Mon, 25 Nov 2024 05:34 AM IST
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महराजगंज। जमीन खरीदने जा रहे हैं तो सावधान हो जाएं। दलाल सीलिंग की जमीन भी बेच दे रहे हैं। अगर इसकी जांच होती है तो आपकी रकम डूबनी तय है। निचलौल क्षेत्र में बीते दिनों मामला सामने आने पर खतौनी से नाम हटाने के साथ ही जमीन पर लाल झंडी लगा दी गई।
क्षेत्र में जमीन के दलालों ने सीलिंग की जमीन को बेचने में खेल कर दिया है। निचलौल क्षेत्र में 10 से अधिक गांव में सीलिंग की ऐसी जमीनें हैं, जिसे दलाल झांसा देकर बेच रहे हैं। उन जमीनों के बारे में शिकायत करने की तैयारी की जा रही है। दलालों का नेटवर्क तहसील से जुड़ा होने के कारण पोल नहीं खुल पाता है। जालसाजी के खेल को जबतक लोग समझते हैं, तबतक दलाल अपना कमीशन की मोटी रकम लेकर किनारा कस लेते हैं।
सूत्रों की मानें तो निचलौल क्षेत्र के एक महाविद्यालय के प्रबंधक ने भी सिलिंग की जमीन औने-पौने दाम पर खरीदी है। अब इस जमीन को महंगे दाम पर बेचा जा रहा है। सीधे-साधे लोगों को यह पता ही नहीं है कि सिलिंग की भूमि है। इससे रेट का अंतर है। बताया जाता है कि यह जमीन जिस क्षेत्र में है, वहां करीब 10 से 12 लाख रुपये डिस्मिल जमीन का रेट चल रहा है। इसी क्षेत्र में छह से सात लाख रुपये डिस्मिल के भाव से जमीन बेची जा रही है। सस्ता रेट देखकर लोग जमीन खरीदने के लिए मोलभाव कर रहे हैं।
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सूत्रों के मुताबिक कुछ लोगों ने जमीन खरीद ली है। सीलिंग की भूमि को बेचने का खेल यह कोई नया नहीं है। निचलौल क्षेत्र में इस तरह की जमीनों को दलाल आसानी से बेच लेते हैं। शिकायत हो या जांच होने पर ही पोल खुलती है, तब तक देर हो चुकी होती है। दूसरी ओर से बीते दिनों प्रशासन की सख्ती का असर दिखा कि सिलिंग की भूमि जिन लोगों ने खतौनी में दर्ज कराई थी, उनका नाम भी हटाया गया। इस पूरे खेल से पर्दा तभी हटा। इसे लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है।
सूत्रों की मानें तो निचलौल क्षेत्र में सेखुई, अमडा उर्फ झुलनीपुर, कटका उर्फ करवतही, गिरहिया, मदनपुरा, दमकी, डोमा, जमुई, सेमरहना गांव के सिवान में सीलिंग की भूमि है। इसके दलालों ने सेंध लगाकर बेचने की व्यवस्था कर ली है।
राजस्व विभाग के जिम्मेदारों की भूमिका भी संदिग्ध : किसान नेता राजू कुमार गुप्ता ने कहा कि पूरे मामले में राजस्व विभाग के अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध है। सिलिंग भूमि के बारे में खबर होने के बावजूद इसके खरीद-फरोख्त को लेकर सतर्कता नहीं बरती गई। निचले स्तर की कर्मचारी से लेकर तहसीलदार तक सभी की लापरवाही के चलते सिलिंग भूमि की खरीदी-बिक्री बेरोक जारी है। इसे लेकर अबतक किसी ने कार्रवाई भी नहीं की। इसकी जांच करने पर लंबे षड्यंत्र का खुलासा होगा और खामियां भी सामने आएंगी।
जरा सी चूक से अधूरा रह गया सपना : सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक सीलिंग की भूमि को खरीदने वाले लोगों का नाम खतौनी से हटा दिया गया है। इसकी सूचना मिलते ही उन लोगों में हड़कंप मच गया है। क्योंकि जमीन खरीदने के वक्त उनकी ओर से की गई जरा सी चूक से सपना अधूरा रह गया। ऐसे में वह लोग अब सब कुछ जानने के बाद सन्न हैं। उन्हें कुछ सूझ नहीं रहा है कि क्या करें, क्योंकि लगी रकम भी डूबती नजर जा रही है।
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क्षेत्र में जमीन के दलालों ने सीलिंग की जमीन को बेचने में खेल कर दिया है। निचलौल क्षेत्र में 10 से अधिक गांव में सीलिंग की ऐसी जमीनें हैं, जिसे दलाल झांसा देकर बेच रहे हैं। उन जमीनों के बारे में शिकायत करने की तैयारी की जा रही है। दलालों का नेटवर्क तहसील से जुड़ा होने के कारण पोल नहीं खुल पाता है। जालसाजी के खेल को जबतक लोग समझते हैं, तबतक दलाल अपना कमीशन की मोटी रकम लेकर किनारा कस लेते हैं।
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सूत्रों की मानें तो निचलौल क्षेत्र के एक महाविद्यालय के प्रबंधक ने भी सिलिंग की जमीन औने-पौने दाम पर खरीदी है। अब इस जमीन को महंगे दाम पर बेचा जा रहा है। सीधे-साधे लोगों को यह पता ही नहीं है कि सिलिंग की भूमि है। इससे रेट का अंतर है। बताया जाता है कि यह जमीन जिस क्षेत्र में है, वहां करीब 10 से 12 लाख रुपये डिस्मिल जमीन का रेट चल रहा है। इसी क्षेत्र में छह से सात लाख रुपये डिस्मिल के भाव से जमीन बेची जा रही है। सस्ता रेट देखकर लोग जमीन खरीदने के लिए मोलभाव कर रहे हैं।
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सूत्रों के मुताबिक कुछ लोगों ने जमीन खरीद ली है। सीलिंग की भूमि को बेचने का खेल यह कोई नया नहीं है। निचलौल क्षेत्र में इस तरह की जमीनों को दलाल आसानी से बेच लेते हैं। शिकायत हो या जांच होने पर ही पोल खुलती है, तब तक देर हो चुकी होती है। दूसरी ओर से बीते दिनों प्रशासन की सख्ती का असर दिखा कि सिलिंग की भूमि जिन लोगों ने खतौनी में दर्ज कराई थी, उनका नाम भी हटाया गया। इस पूरे खेल से पर्दा तभी हटा। इसे लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है।
सूत्रों की मानें तो निचलौल क्षेत्र में सेखुई, अमडा उर्फ झुलनीपुर, कटका उर्फ करवतही, गिरहिया, मदनपुरा, दमकी, डोमा, जमुई, सेमरहना गांव के सिवान में सीलिंग की भूमि है। इसके दलालों ने सेंध लगाकर बेचने की व्यवस्था कर ली है।
राजस्व विभाग के जिम्मेदारों की भूमिका भी संदिग्ध : किसान नेता राजू कुमार गुप्ता ने कहा कि पूरे मामले में राजस्व विभाग के अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध है। सिलिंग भूमि के बारे में खबर होने के बावजूद इसके खरीद-फरोख्त को लेकर सतर्कता नहीं बरती गई। निचले स्तर की कर्मचारी से लेकर तहसीलदार तक सभी की लापरवाही के चलते सिलिंग भूमि की खरीदी-बिक्री बेरोक जारी है। इसे लेकर अबतक किसी ने कार्रवाई भी नहीं की। इसकी जांच करने पर लंबे षड्यंत्र का खुलासा होगा और खामियां भी सामने आएंगी।
जरा सी चूक से अधूरा रह गया सपना : सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक सीलिंग की भूमि को खरीदने वाले लोगों का नाम खतौनी से हटा दिया गया है। इसकी सूचना मिलते ही उन लोगों में हड़कंप मच गया है। क्योंकि जमीन खरीदने के वक्त उनकी ओर से की गई जरा सी चूक से सपना अधूरा रह गया। ऐसे में वह लोग अब सब कुछ जानने के बाद सन्न हैं। उन्हें कुछ सूझ नहीं रहा है कि क्या करें, क्योंकि लगी रकम भी डूबती नजर जा रही है।