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Maharajganj News: आवक बढ़ने से आंवला की बिक्री में उछाल
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मुरब्बा तैयार करा रहा कोई बनवा रहा चटपटा अचार
आंवला नगरी प्रतापगढ़ से कारोबारी मंगा रहे हैं खेप
महराजगंज। जिले में आंवले की आवक बढ़ने के कारण बिक्री में इन दिनों उछाल देखा जा रहा है। कारोबारियों के मुताबिक, पहले गोरखपुर मंडी से खरीद हो रही थी लेकिन अब प्रतापगढ़ से आंवले की खेप सीधे जिले में पहुंच रही है। पर्याप्त आवक के कारण बिक्री काफी बढ़ गई है। कारोबारियों के मुताबिक इन दिनों डेढ़ से दो क्विंटल की खपत हर रोज हो रही है।
कार्तिक महीने में आंवले की बिक्री तेज हुई है। कोई मुरब्बा बनाने के लिए खरीद रहा है तो कोई चटपटा अचार बनाने के लिए। आंवला कारोबार से जुड़े विक्की ने बताया कि पहले स्थानीय विक्रेता गोरखपुर मंडी से आंवला खरीदकर लाते थे लेकिन अब तो प्रतापगढ़ से ही कारोबारी दो से तीन क्विंटल के आर्डर पर खेप पहुंचाने की सुविधा दे रहे हैं। अजय कन्नौजिया ने बताया कि उनकी तीन दुकान पर आंवला की बिक्री हो रही है। इन दिनों हर रोज 40 किलो तक बिक्री हो जा रही है। महंगा होने के कारण जो लोग पहले अचार या चटनी के लिए कम खरीदते थे, रेट घटने पर अब अधिक मात्रा में खरीद रहे हैं।
महिलाएं दे रहीं उत्पाद तैयार करने की सुविधा
खेम पिपरा में महाराजा आजीविका समूह संचालित करने वाली नीतू गुप्ता समूह की महिलाओं संग अचार-मुरब्बा इत्यादि तैयार कर बिक्री करती हैं। उन्होंने बताया कि पिछले माह से ही लोग मुरब्बा व अचार तैयार करने के लिए आंवला उपलब्ध करा रहे हैं। पहले लोग चार से 5 किलो ही आंवला दे रहे थे लेकिन इन दिनों हर रोज 10 से 15 किलो अचार व मुरब्बा के लिए आंवला समूह के पास ला रहे हैं। एक किलो आंवले का मुरब्बा बनाने का चार्ज 150 रुपये और अचार के लिए 100 रुपये रेट फिक्स है।
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आंवला नगरी प्रतापगढ़ से कारोबारी मंगा रहे हैं खेप
महराजगंज। जिले में आंवले की आवक बढ़ने के कारण बिक्री में इन दिनों उछाल देखा जा रहा है। कारोबारियों के मुताबिक, पहले गोरखपुर मंडी से खरीद हो रही थी लेकिन अब प्रतापगढ़ से आंवले की खेप सीधे जिले में पहुंच रही है। पर्याप्त आवक के कारण बिक्री काफी बढ़ गई है। कारोबारियों के मुताबिक इन दिनों डेढ़ से दो क्विंटल की खपत हर रोज हो रही है।
कार्तिक महीने में आंवले की बिक्री तेज हुई है। कोई मुरब्बा बनाने के लिए खरीद रहा है तो कोई चटपटा अचार बनाने के लिए। आंवला कारोबार से जुड़े विक्की ने बताया कि पहले स्थानीय विक्रेता गोरखपुर मंडी से आंवला खरीदकर लाते थे लेकिन अब तो प्रतापगढ़ से ही कारोबारी दो से तीन क्विंटल के आर्डर पर खेप पहुंचाने की सुविधा दे रहे हैं। अजय कन्नौजिया ने बताया कि उनकी तीन दुकान पर आंवला की बिक्री हो रही है। इन दिनों हर रोज 40 किलो तक बिक्री हो जा रही है। महंगा होने के कारण जो लोग पहले अचार या चटनी के लिए कम खरीदते थे, रेट घटने पर अब अधिक मात्रा में खरीद रहे हैं।
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महिलाएं दे रहीं उत्पाद तैयार करने की सुविधा
खेम पिपरा में महाराजा आजीविका समूह संचालित करने वाली नीतू गुप्ता समूह की महिलाओं संग अचार-मुरब्बा इत्यादि तैयार कर बिक्री करती हैं। उन्होंने बताया कि पिछले माह से ही लोग मुरब्बा व अचार तैयार करने के लिए आंवला उपलब्ध करा रहे हैं। पहले लोग चार से 5 किलो ही आंवला दे रहे थे लेकिन इन दिनों हर रोज 10 से 15 किलो अचार व मुरब्बा के लिए आंवला समूह के पास ला रहे हैं। एक किलो आंवले का मुरब्बा बनाने का चार्ज 150 रुपये और अचार के लिए 100 रुपये रेट फिक्स है।
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