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Maharajganj News: खाए-पीए तुम तीनों तो बिल मैं क्यों भरुं.. इस बात पर ले ली दोस्त की जान

Tue, 19 Sep 2023 01:22 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 19 Sep 2023 01:22 AM IST
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All three of you have eaten and drank, so why should I pay the bill? Due to this, I took my friend's life.
मजह 115 रुपये के लिए सीधे साधे दिखने वाले युवाओं की क्रूरता जान हैरत में गांव के लोग
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हत्यारोपी सन्नी व श्याम शादी विवाह में वेटर का करते थे काम, खाली समय में इधर-उधर घूमने की थी आदत
महराजगंज। खाए पीए तुम तीनों तो मैं क्यूं 115 रुपये का भुगतान करूं, इसी बात से आक्रोशित होकर तीनों चचेरे भाइयों ने दोस्त का कत्ल कर दिया था। अब तीन में दो जेल जा चुके हैं। एक किशोर होने के कारण बाल सुधार गृह में है।
जेल जाने से पहले आरोपी श्याम ने इन बातों को बताया। उसने बताया कि हम सभी में गहरी दोस्ती थी। चंदन ने बेवजह की बातें की। वह केरल से कमाकर आया था। हम सभी ने खाया-पीया था। रकम देने के बजाय ताना मारने लगा तो गुस्से में कुछ समझ में नहीं आया। दूसरे आरोपी सन्नी ने भी यही बातें कही। इन सभी को अपने किए पर पछतावा हो रहा था। तीनों आरोपियों ने बताया कि घटना कैसे हो गई कुछ समझ नहीं आया। उधर, मृत चंदन के घर वाले सन्न हैं। घुघली वार्ड नंबर 10 में मृतक चंदन की मां रंजू ने बताया कि ऐसे लोगों के घर से संबंध रखना ठीक नहीं है। अब उन लोगों से बातचीत करना तो दूर की बात मुंह देखना भी पसंद नहीं करूंगी। बेवजह बेटे की जान चली गई।
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सोमवार को अहिरौली गांव के लोग घटना पर चर्चा कर रहे थे। गांव में सीधे-साधे दिखने वाले युवाओं का क्रूर चेहरा सामने आया ताे गांव के लोग सन्न हैं। लोग हैरान हैं कि मजह 115 रुपये की खातिर कोई कैसे किसी को मौत के घाट उतार सकता है। दोस्त को मारते समय इनको जरा भी रहम नहीं आई। इस गांव के श्याम, सन्नी व एक नाबालिग अपने जिगरी दोस्त की गला रेतकर हत्या करने के आरोप में जेल जा चुके हैं। तीनों का कोई आपराधिक रिकार्ड भी नहीं है। अहिरौली गांव के रहने वाले हत्यारोपी चचेरे भाइयों के घर पर सोमवार को सन्नाटा पसरा रहा। हत्यारोपियों में एक नाबालिग है। उसका भाई गूंगा, बहरा घर पर मिला। आसपास के लोग भी मामला सामने आने के बाद हैरत में हैं।
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गांव में श्याम के घर पहुंचने पर कोई मिला नहीं। आसपास के लोगों ने संपर्क करने पर पता चल कि उसकी मां कुसमावती गांव में किसी से घर गई हैं। उनको बुलवाया गया तो उन्होंने बेटे के स्वभाव पर चर्चा करते हुए हैरानी प्रकट की। उन्होंने कहा कि श्याम शांत स्वभाव का है। पता नहीं उसने कैसे इस तरह की घटना कर दी। बिलकुल समझ में नहीं आ रहा है। लुधियाना काम करने गया था, वहां से 15 दिन पहले आया था। गांव में अपने दोस्तों के साथ इधर-उधर घूमता था। घटना वाले दिन भी वह दोपहर में ही खाना खाकर घर से चला गया था। मृत चंदन और उसके बीच बहुत अच्छी दोस्ती थी। वह भी अक्सर घर पर आता था। समझ में नहीं आ रहा है कि यह सब कुछ कैसे हो गया।
यह कहते हुए सिसकने लगी। पास में बैठे लोग उनको चुप कराने लगे। दूसरे आरोपी सन्नी के घर कोई नहीं मिला। गांव का एक युवक बाहर से अंदर झांक कर देखा तो कोई नहीं दिखा। लोगों ने बताया कि इसके पिता थाने पर गए हैं, मां कहीं रिश्तेदारी में गई है। घर पर कोई नहीं है। गांव के चौकीदार मुखत ने बताया कि ये तीनों गांव में कभी किसी से विवाद भी नहीं करते थे। काम करके आने के बाद इधर-उधर घूमते हुए इनको देखता था। इन तीनों की आदत थी कि जब कुछ कमा लेते थे तो कुछ दिन घूम कर पूरे पैसे खर्च कर देते थे। इस बीच वे कोई काम नहीं करते थे। तीनों के घर की माली हालत ठीक नहीं है।


नाबालिग आरोपी से मिलने उसके पिता बाल सुधार गृह गए थे। घर में उसकी मां नहीं दिखी। आसपास के लोगों ने बताया कि वह कहीं गई हैं। कुछ पता नहीं है कि कहां गईं हैं। गांव के लोगों ने कहा कि इन तीनों की कारस्तानी से हैरानी हो रही है। 115 रुपये के लेन देने में इतने आक्रामक हो गए कि दोस्त की जान ले ली। ऐसा करने वाले सनकी होते हैं।

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युवाओं में अपराध की बढ़ती प्रवृति किसी भी सभ्य समाज के लिए चिंताजनक स्थिति है, लेकिन इससे भी अधिक भयावह यह है कि अपराध के दलदल में ऐसे युवाओं का धंसना जो न तो पेशेवर अपराधी हैं और न ही अपराध करना उनके लिए कोई मजबूरी है। वे केवल अपने अहंकार की तुष्टि या अनावश्यक जिद के चलते ऐसे संगीन अपराध कर जाते हैं, जो न केवल उनको पूरे जीवन के लिए कालकोठरी में धकेल देते हैं बल्कि समाज को भी शर्मसार कर जाते हैं। गहराई से देखें तो इसके पीछे संस्कारहीनता और अहंकार है, जो इन्हें अपनी मर्जी के खिलाफ कुछ भी बर्दाश्त नहीं करने देता।




- डॉ. देवेंद्र कुमार पाठक, समाज शास्त्री



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कुसंस्कारों को कामयाबी मानने वाला एक पूरा वर्ग खड़ा हो चुका है, जिसने अपना अलग संसार बसा रखा है। वह उसे इस रूप में स्वीकार नहीं करते बल्कि इस रूप में देखते हैं कि वे समाज से अलग हैं, कुछ विशेष हैं। यही सोच उनके अहंकार को पोषित करती है। इंटरनेट और सोशल साइट ऐसी विकृतियां फैलाने में लगी हुई हैं, जो युवा मन को अपराध करने की ओर प्रेरित करते हैं।



-गुलाब चंद्र, मनोविज्ञानी
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