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Maharajganj News: मरीज बनकर अस्पताल पहुंचे एडीएम दो वार्ड बाॅय और तीन दलाल पकड़े
Tue, 01 Jul 2025 12:45 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Tue, 01 Jul 2025 12:45 AM IST
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महराजगंज। सोमवार को जिला अस्पताल में एडीएम डॉ. प्रशांत कुमार टीम के साथ मरीज बनकर इलाज कराने पहुंचे। वह सभी से घुल मिलकर बातें कर रहे थे। किसी को कुछ समझ में नहीं आ रहा था।
कुछ दलाल मरीजों को झांसा देकर निजी अस्पताल में ले जाने के लिए प्रेरित कर रहे थे। तसल्ली के बाद एडीएम ने चिह्नित कर दलालों को दबोचा और पुलिस को सौंप दिया। दो वार्ड बॉय, तीन दलालों को चालान कर दिया गया। प्रशासन की इस कार्रवाई से अस्पताल परिसर में खलबली मच गई।
जिलाधिकारी को बीते कई दिनों से जिला अस्पताल और महिला अस्पताल में सक्रिय दलालों के बारे में लगातार सूचनाएं मिल रही थीं। शिकायतों के अनुसार, कुछ लोग अस्पताल में आने वाले मरीजों को झांसे में लेकर निजी अस्पतालों में इलाज के लिए भेज रहे थे। मरीजों को यह कहकर बहकाया जा रहा था कि सरकारी अस्पताल में सुविधाएं नहीं हैं, जबकि प्राइवेट अस्पताल में बेहतर इलाज मिल सकता है। इसके बदले में ये दलाल प्राइवेट नर्सिंग होम्स से कमीशन प्राप्त करते हैं।
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यह भी शिकायत मिली कि कुछ स्वास्थ्य कर्मी, खासकर वार्ड बॉय, इन दलालों से मिले हुए हैं और मरीजों को जान बूझकर परेशान कर प्राइवेट अस्पतालों की ओर मोड़ते हैं। इससे न केवल मरीजों की जेब पर असर पड़ता है, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की साख पर भी प्रश्नचिह्न लगता है। इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने सख्त रुख अपनाया और तत्काल एक विशेष टीम का गठन किया।
टीम में अपर जिलाधिकारी (वित्त/राजस्व) डॉ. प्रशांत कुमार, एसडीएम सदर रमेश कुमार, भूमि अध्याप्ति अधिकारी शैलेंद्र गौतम, तहसीलदार सदर पंकज कुमार शाही और नायब तहसीलदार देश दीपक तिवारी को शामिल किया गया।
इस टीम को निर्देश दिया गया कि वे आम नागरिकों की तरह मरीज बनकर अस्पताल जाकर दलालों की पहचान करें और साक्ष्य के साथ कार्रवाई करें। सोमवार को दोपहर में एडीएम डॉ. प्रशांत कुमार के नेतृत्व में पूरी टीम आम नागरिकों की तरह मरीज बनकर पैदल चलते हुए जिला अस्पताल और महिला अस्पताल परिसर में दाखिल हुई। सबसे पहले टीम ट्रामा सेंटर, महिला अस्पताल, इमरजेंसी और ओपीडी में घूमी।
इन हिस्सों में सामान्य मरीज की तरह बैठकर उन्होंने आसपास के गतिविधियों पर नजर रखी। कुछ देर बाद टीम ने पांच संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान की, जो मरीजों और उनके परिजनों से संदिग्ध तरीके से बात कर रहे थे।
टीम ने ट्रामा सेंटर में मौजूद दो वार्ड बॉय को कुछ बाहरी व्यक्तियों से बातचीत करते हुए पकड़ा। वार्ड बॉय एक मरीज के खून की जांच के लिए बाहर भेजने की बात कर रहे थे। जब उनसे सख्ती से पूछताछ की गई, तो उन्होंने गोलमोल जवाब दिया। वहीं, अन्य तीन संदिग्धों ने पहले खुद को मरीजों का रिश्तेदार बताया, लेकिन जब टीम ने पूछा कि उनके रिश्तेदार किस वार्ड में भर्ती हैं, तो वे कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।
इसके बाद टीम ने संदिग्धों के मोबाइल फोन की जांच की, जिसमें चौंकाने वाली बातें सामने आईं। दलालों के फोन में कई प्राइवेट नर्सिंग होम के पर्चे, वाट्सएप ग्रुप में मरीजों की रिपोर्ट, निजी पैथालॉजी की जांच रिपोर्ट और दलाली से जुड़ी बातचीत के स्क्रीनशॉट मिले।
यह भी स्पष्ट हुआ कि ये लोग प्राइवेट अस्पतालों के लिए एजेंट के रूप में काम कर रहे हैं। मोबाइल चैट और कॉल रिकॉर्ड से पता चला कि सुनियोजित ढंग से काम कर रहा था। जिला अस्पताल के कुछ कर्मचारी, विशेषकर वार्ड व्याय, इन बाहरी दलालों के संपर्क में थे। ये कर्मचारी मरीजों को परेशान कर या जानबूझकर इलाज में देरी कर, दलालों को सक्रिय होने का मौका देते थे।
दलाल मरीजों को बहला-फुसलाकर निजी अस्पतालों की ओर ले जाते और फिर मोटी रकम वसूलते थे। जब सारे तथ्य और प्रमाण एकत्र हो गए, तो एडीएम के निर्देश पर सभी पांचों संदिग्धों लोगों को कलक्ट्रेट पुलिस को सौंप दिया गया। कोतवाली पुलिस ने आईपीसी की धारा 151 के तहत सभी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली और उन्हें न्यायालय में चालान कर दिया गया।
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कुछ दलाल मरीजों को झांसा देकर निजी अस्पताल में ले जाने के लिए प्रेरित कर रहे थे। तसल्ली के बाद एडीएम ने चिह्नित कर दलालों को दबोचा और पुलिस को सौंप दिया। दो वार्ड बॉय, तीन दलालों को चालान कर दिया गया। प्रशासन की इस कार्रवाई से अस्पताल परिसर में खलबली मच गई।
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जिलाधिकारी को बीते कई दिनों से जिला अस्पताल और महिला अस्पताल में सक्रिय दलालों के बारे में लगातार सूचनाएं मिल रही थीं। शिकायतों के अनुसार, कुछ लोग अस्पताल में आने वाले मरीजों को झांसे में लेकर निजी अस्पतालों में इलाज के लिए भेज रहे थे। मरीजों को यह कहकर बहकाया जा रहा था कि सरकारी अस्पताल में सुविधाएं नहीं हैं, जबकि प्राइवेट अस्पताल में बेहतर इलाज मिल सकता है। इसके बदले में ये दलाल प्राइवेट नर्सिंग होम्स से कमीशन प्राप्त करते हैं।
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यह भी शिकायत मिली कि कुछ स्वास्थ्य कर्मी, खासकर वार्ड बॉय, इन दलालों से मिले हुए हैं और मरीजों को जान बूझकर परेशान कर प्राइवेट अस्पतालों की ओर मोड़ते हैं। इससे न केवल मरीजों की जेब पर असर पड़ता है, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की साख पर भी प्रश्नचिह्न लगता है। इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने सख्त रुख अपनाया और तत्काल एक विशेष टीम का गठन किया।
टीम में अपर जिलाधिकारी (वित्त/राजस्व) डॉ. प्रशांत कुमार, एसडीएम सदर रमेश कुमार, भूमि अध्याप्ति अधिकारी शैलेंद्र गौतम, तहसीलदार सदर पंकज कुमार शाही और नायब तहसीलदार देश दीपक तिवारी को शामिल किया गया।
इस टीम को निर्देश दिया गया कि वे आम नागरिकों की तरह मरीज बनकर अस्पताल जाकर दलालों की पहचान करें और साक्ष्य के साथ कार्रवाई करें। सोमवार को दोपहर में एडीएम डॉ. प्रशांत कुमार के नेतृत्व में पूरी टीम आम नागरिकों की तरह मरीज बनकर पैदल चलते हुए जिला अस्पताल और महिला अस्पताल परिसर में दाखिल हुई। सबसे पहले टीम ट्रामा सेंटर, महिला अस्पताल, इमरजेंसी और ओपीडी में घूमी।
इन हिस्सों में सामान्य मरीज की तरह बैठकर उन्होंने आसपास के गतिविधियों पर नजर रखी। कुछ देर बाद टीम ने पांच संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान की, जो मरीजों और उनके परिजनों से संदिग्ध तरीके से बात कर रहे थे।
टीम ने ट्रामा सेंटर में मौजूद दो वार्ड बॉय को कुछ बाहरी व्यक्तियों से बातचीत करते हुए पकड़ा। वार्ड बॉय एक मरीज के खून की जांच के लिए बाहर भेजने की बात कर रहे थे। जब उनसे सख्ती से पूछताछ की गई, तो उन्होंने गोलमोल जवाब दिया। वहीं, अन्य तीन संदिग्धों ने पहले खुद को मरीजों का रिश्तेदार बताया, लेकिन जब टीम ने पूछा कि उनके रिश्तेदार किस वार्ड में भर्ती हैं, तो वे कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।
इसके बाद टीम ने संदिग्धों के मोबाइल फोन की जांच की, जिसमें चौंकाने वाली बातें सामने आईं। दलालों के फोन में कई प्राइवेट नर्सिंग होम के पर्चे, वाट्सएप ग्रुप में मरीजों की रिपोर्ट, निजी पैथालॉजी की जांच रिपोर्ट और दलाली से जुड़ी बातचीत के स्क्रीनशॉट मिले।
यह भी स्पष्ट हुआ कि ये लोग प्राइवेट अस्पतालों के लिए एजेंट के रूप में काम कर रहे हैं। मोबाइल चैट और कॉल रिकॉर्ड से पता चला कि सुनियोजित ढंग से काम कर रहा था। जिला अस्पताल के कुछ कर्मचारी, विशेषकर वार्ड व्याय, इन बाहरी दलालों के संपर्क में थे। ये कर्मचारी मरीजों को परेशान कर या जानबूझकर इलाज में देरी कर, दलालों को सक्रिय होने का मौका देते थे।
दलाल मरीजों को बहला-फुसलाकर निजी अस्पतालों की ओर ले जाते और फिर मोटी रकम वसूलते थे। जब सारे तथ्य और प्रमाण एकत्र हो गए, तो एडीएम के निर्देश पर सभी पांचों संदिग्धों लोगों को कलक्ट्रेट पुलिस को सौंप दिया गया। कोतवाली पुलिस ने आईपीसी की धारा 151 के तहत सभी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली और उन्हें न्यायालय में चालान कर दिया गया।