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Maharajganj News: खाद की दुकानों पर आंकड़ों का खेल...किसानों की जोत बही पर तस्करों को मिलती है खाद

Wed, 24 Dec 2025 01:32 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 24 Dec 2025 01:32 AM IST
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A game of numbers at fertilizer shops...smugglers get fertilizer on farmers' land ledgers
महराजगंज। भारत-नेपाल सरहद पर सुरक्षा एजेंसियों की सख्ती के बावजूद भी खाद की तस्करी थमने का नाम नहीं ले रही है। इसकी असल वजह कानून में झोल को माना जा रहा है। क्योंकि, निजी खाद की दुकानों पर आंकड़ों में असल किसानों की भूमि दर्ज होती है। जबकि वास्तविक रूप से मोटी रकम कमाने के लिए खाद धंधेबाजों को दे दी जाती है। इसे धंधेबाज सुरक्षा एजेंसियों को चकमा दे नेपाल में बेच देते हैं। इसके चलते किसानों को दुश्वारियों के साथ ही काफी नुकसान भी हो रहा है।
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जानकारी के मुताबिक, खाद के लिए किसानों की बढ़ती परेशानी और खाद तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए समितियों से लेकर भारत नेपाल सरहद पर प्रशासन की ओर से सख्ती कर दी गई है। फिर भी धंधेबाज अपने करतूत में सफल हो जा रहे हैं। इसकी वजह निजी खाद के दुकानदार हैं, जो असली किसानों की दर्ज भूमि के आंकड़ों में हेराफेरी कर धंधेबाजों को मोटी रकम में खाद दे रहे हैं। हालांकि प्रशासन की ओर से बीते दिनों खाद का अवैध धंधा करने वाले सीमावर्ती इलाकों के कई आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा चुकी है। इतना ही नहीं सरकारी समितियों पर किसानों में खाद वितरण के लिए शुल्क जमा कर बकायदा पासबुक बनाया गया है। इसपर किसानों की खतौनी के मुताबिक पूरी भूमि दर्ज होती है। वहीं निजी खाद की दुकानों से किसानों को खाद लेने के लिए प्रशासन की ओर से लेखपाल से टोकन प्राप्त करना होता है। इस पर लेखपाल किसान की भूमि के मुताबिक उन्हें खाद देने के लिए टोकन देता है। जहां पर किसान टोकन लेकर खाद की दुकान पर पहुंचता है। तो दुकानदार की ओर से उन्हें खाद दिया जाता है।
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सूत्रों के मुताबिक, किसान खाद के लिए आधार और खतौनी लेकर दुकान पर पहुंच एक से दो बोरी खाद लेते है। इसका फायदा उठाते हुए दुकानदार उन किसानों की दर्ज भूमि के आंकड़ों में हेराफेरी कर 270 रुपये की जगह 450 से 500 रुपये पर धंधेबाजों को खाद दे देते हैं। फिर धंधेबाज सरहद से सटे गांवों तक खाद को पहुंचा देते है। वहां से मौका मिलते ही धंधेबाज सरहद पार कर नेपाल में खाद को दो गुना 1100 से 1200 रुपये में बेच देते हैं।
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सूत्रों की मानें तो भारत-नेपाल सरहद के नौतनवा, कोल्हुई, सोनौली, परसा मलिक, बरगदवा, ठूठीबारी क्षेत्रों में खाद तस्करी का बड़ा नेटवर्क बन चुका है। बताया जा रहा है कि यह धंधा निजी खाद के दुकानदारों की मनमानी और विभाग के जिम्मेदारों की मिली भगत से चल रहा है। वहीं सीमावर्ती इलाके के रहने वाले किसान कृष्णा, भोला, रामसूरत, कमलेश ने बताया कि दुकानों पर किसानों के नाम पर खाद का वितरण होता है। लेकिन आंकड़े बताते हैं कि ज्यादा खाद निकल रही है। जबकि जमीन पर किसान परेशान हैं। यह हेराफेरी दर्शाती है कि खाद का बड़ा हिस्सा कालाबाजारी में जा रहा है।
जिला कृषि अधिकारी शैलेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि ऐसी कोई बात नहीं है। नियम के अनुसार ही खाद वितरित की जा रही है। बीते दिनों की दुकानों की जांच कर नोटिस दी गई थी।


खाद की तस्करी से किसानों का होता है नुकसान
किसानों ने बातचीत में बताया कि सरकार की ओर से किसानों के लिए प्राप्त खाद तो भेजी जा रही है। लेकिन खाद असल किसानों को नहीं मिल पा रही है। कारण है खाद की सरहद पर बढ़ती तस्करी है। ऐसे में किसानों को काफी नुकसान हो रहा है। क्योंकि सब्सिडी वाली खाद किसानों को समय पर न मिलने से खेती की लागत बढ़ जाती है। इतना ही नहीं वे किसान काफी परेशान भी होते हैं। जबकि तस्कर हर दिन मोटी कमाई कर रहे हैं। यह समस्या सिस्टम में खामियों और नियमों के ठीक से लागू न होने के कारण हो रही है।
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