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हत्या के मामले में उम्र कैद की सजा
Maharajganj
Updated Sat, 30 Nov 2013 05:41 AM IST
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महराजगंज। दो साल पहले हत्या के मामले में शुक्रवार को एडीजे तृतीय ने एक अभियुक्त को आजीवान कारावास की सश्रम सजा व दस हजार का जुर्माना लगाया है। वहीं एक दहेज हत्या मामले में एडीजे तृतीय ने तीन अभियुक्तों को दस-दस साल की सजा सुनाई है। चार साल पहले दहेज के लिए महिला को उसके घर वालों ने जहर देकर मार
दिया था।
फरेन्दा के वार्ड नंबर तीन निवासी आलोक श्रीवास्तव ने फरेन्दा थाने में अज्ञात लोगों पर हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। घटनाक्रम के अनुसार उनके मकान में चंदौली जनपद के बिछिया कला निवासी दुर्गा विश्वकर्मा किराए पर रहते थे। 7 जनवरी 2011 को अन्य किरायेदारों ने बताया कि विस्तर पर उनकी लाश पड़ी है। घटना की जानकारी आलोक ने पुलिस को दिया। कुछ देर बाद पुलिस मौके पर पहुंची और ताला तोड़कर शव बाहर निकाली। पुलिस के जांच में दुर्गा के भांजे विकास का नाम सामने आया। पुलिस के अनुसार अवैध मृतक की पत्नी का विकास से अवैध संबंध था। बाद में पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। मामले की पैरवी करते हुए शासकीय अधिवक्ता मिथिलेश पांडे ने कोर्ट से अभियुक्त को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की मांग किया। एडीजे तृतीय मनोज कुमार शुक्ल ने शुक्रवार को अभियुक्त विकास को आजीवान कारावास की सश्रम कारावास व दस हजार रुपये का जुर्माना लगाया। सजा सुनाए जाने के दौरान विकास की मामी भी थी। जब जज ने अभियुक्त को सजा सुनाई तो वह परिसर में कुछ दूर जाने पर बेहोश होकर नीचे
गिर गई।
सदर कोतवाली थाना क्षेत्र के नगर निवासी अधिवक्ता हरिशंकर पटेल ने घुघली थाने में मुकदमा दर्ज कराया था कि उनकी बेटी विभा की शादी 21 सितंबर 2003 को घुघली थाना क्षेत्र के परसौना निवासी शिवेन्द्र पटेल से हुई थी। 10 मार्च 2008 को उसका गवना हो गया। शादी में वह अपनी औकात के मुताबिक दहेज भी दिए। गवना के बाद कुछ दिन तक तो ठीक ठाक चला। लेकिन बाद में उसके घर वाले दहेज के लिए प्रताड़ित करने लगे। 12 मार्च 2009 को उन लोगों ने जहर देकर विभा को मार दिया। प्रार्थना पत्र पर पुलिस ने विभा के पति शिवेन्द्र पटेल, सुभाष व कृष्णावती के खिलाफ दहेज हत्या, उत्पीड़न व 3/4 डीपी एक्ट में मुकदमा दर्ज किया। पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। शासकीय अधिवक्ता ने मामले में पैरवी करते हुए नौ गवाहों को पेश किया। जिस पर एडीजे तृतीय मनोज कुमार शुक्ल ने तीनों आरोपियों को हत्या के लिए दोषी मानते हुए दस-दस साल की सजा सुनाई वह दस हजार जुर्माना का आदेश दिया।
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दिया था।
फरेन्दा के वार्ड नंबर तीन निवासी आलोक श्रीवास्तव ने फरेन्दा थाने में अज्ञात लोगों पर हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। घटनाक्रम के अनुसार उनके मकान में चंदौली जनपद के बिछिया कला निवासी दुर्गा विश्वकर्मा किराए पर रहते थे। 7 जनवरी 2011 को अन्य किरायेदारों ने बताया कि विस्तर पर उनकी लाश पड़ी है। घटना की जानकारी आलोक ने पुलिस को दिया। कुछ देर बाद पुलिस मौके पर पहुंची और ताला तोड़कर शव बाहर निकाली। पुलिस के जांच में दुर्गा के भांजे विकास का नाम सामने आया। पुलिस के अनुसार अवैध मृतक की पत्नी का विकास से अवैध संबंध था। बाद में पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। मामले की पैरवी करते हुए शासकीय अधिवक्ता मिथिलेश पांडे ने कोर्ट से अभियुक्त को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की मांग किया। एडीजे तृतीय मनोज कुमार शुक्ल ने शुक्रवार को अभियुक्त विकास को आजीवान कारावास की सश्रम कारावास व दस हजार रुपये का जुर्माना लगाया। सजा सुनाए जाने के दौरान विकास की मामी भी थी। जब जज ने अभियुक्त को सजा सुनाई तो वह परिसर में कुछ दूर जाने पर बेहोश होकर नीचे
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गिर गई।
सदर कोतवाली थाना क्षेत्र के नगर निवासी अधिवक्ता हरिशंकर पटेल ने घुघली थाने में मुकदमा दर्ज कराया था कि उनकी बेटी विभा की शादी 21 सितंबर 2003 को घुघली थाना क्षेत्र के परसौना निवासी शिवेन्द्र पटेल से हुई थी। 10 मार्च 2008 को उसका गवना हो गया। शादी में वह अपनी औकात के मुताबिक दहेज भी दिए। गवना के बाद कुछ दिन तक तो ठीक ठाक चला। लेकिन बाद में उसके घर वाले दहेज के लिए प्रताड़ित करने लगे। 12 मार्च 2009 को उन लोगों ने जहर देकर विभा को मार दिया। प्रार्थना पत्र पर पुलिस ने विभा के पति शिवेन्द्र पटेल, सुभाष व कृष्णावती के खिलाफ दहेज हत्या, उत्पीड़न व 3/4 डीपी एक्ट में मुकदमा दर्ज किया। पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। शासकीय अधिवक्ता ने मामले में पैरवी करते हुए नौ गवाहों को पेश किया। जिस पर एडीजे तृतीय मनोज कुमार शुक्ल ने तीनों आरोपियों को हत्या के लिए दोषी मानते हुए दस-दस साल की सजा सुनाई वह दस हजार जुर्माना का आदेश दिया।
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