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जींस पैंट के ऊपर प्लास्टर चढ़ा दिया
Maharajganj
Updated Sat, 26 Oct 2013 05:39 AM IST
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महराजगंज। जिला संयुक्त चिकित्सालय के डॉक्टर ने सड़क दुर्घटना में घायल दीवानी न्यायालय के कर्मचारी की जींस पैंट के ऊपर ही कच्चा प्लास्टर चढ़ा दिया। जानकारी होते ही जिला जल सहित अन्य लोग मौके पर पहुंच गए। इसे लेकर अस्पताल में हंगामा होने लगा। सीएमएस के आश्वासन पर मामला शांत हुआ।
लखनऊ के निशातगंज का पटेलनगर निवासी मनोज कुमार श्रीवास्तव दीवानी न्यायालय में लिपिक हैं। शुक्रवार शाम करीब साढ़े चार बजे वह नगर स्थित दुर्गा मंदिर के पास बस्ती डिपो की अनुबंधित बस की चपेट में आ गए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक लिपिक बस पर चढ़ते समय नीचे गिर गए। बस उनके पैर से होता हुआ आगे निकल गया। घटना में लिपिक का बायां पैर बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। आनन-फानन में उन्हें जिला संयुक्त चिकित्सालय ले जाया गया। वहां आर्थो सर्जन डॉक्टर दिनेश कुमार साहनी को बुलाया गया। डॉक्टर साहनी ने जींस पैंट के ऊपर ही कच्चा प्लास्टर चढ़ा दिया।
सूचना पर जिला जज उमेश पांडेय और सिविल जज निशा सिंह लिपिक को देखने अस्पताल पहुंचे और सीएमएस से लिपिक की बेहतर इलाज के लिए अस्पताल की जानकारी लिया। प्लास्टर के बाद उसे मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया।
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इस बारे में सीएमएस एपी श्रीवास्तव ने बताया कि लिपिक के पैर का निचला हिस्सा क्षतविक्षत था। ऐसी हालत में कपड़ा नहीं उतारा जा सकता। कपड़ा उतारने से मरीज की परेशानी बढ़ जाती। ऐसे केस में मरीज का फर्स्ट एड स्प्रिंट बांधा जाता है। उसे बांधकर मरीज को रेफर कर दिया गया।
सदर कोतवाली क्षेत्र के इंस्पेक्टर साधूराम का कहना है कि बस को कब्जे में ले लिया गया है।
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लखनऊ के निशातगंज का पटेलनगर निवासी मनोज कुमार श्रीवास्तव दीवानी न्यायालय में लिपिक हैं। शुक्रवार शाम करीब साढ़े चार बजे वह नगर स्थित दुर्गा मंदिर के पास बस्ती डिपो की अनुबंधित बस की चपेट में आ गए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक लिपिक बस पर चढ़ते समय नीचे गिर गए। बस उनके पैर से होता हुआ आगे निकल गया। घटना में लिपिक का बायां पैर बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। आनन-फानन में उन्हें जिला संयुक्त चिकित्सालय ले जाया गया। वहां आर्थो सर्जन डॉक्टर दिनेश कुमार साहनी को बुलाया गया। डॉक्टर साहनी ने जींस पैंट के ऊपर ही कच्चा प्लास्टर चढ़ा दिया।
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सूचना पर जिला जज उमेश पांडेय और सिविल जज निशा सिंह लिपिक को देखने अस्पताल पहुंचे और सीएमएस से लिपिक की बेहतर इलाज के लिए अस्पताल की जानकारी लिया। प्लास्टर के बाद उसे मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया।
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इस बारे में सीएमएस एपी श्रीवास्तव ने बताया कि लिपिक के पैर का निचला हिस्सा क्षतविक्षत था। ऐसी हालत में कपड़ा नहीं उतारा जा सकता। कपड़ा उतारने से मरीज की परेशानी बढ़ जाती। ऐसे केस में मरीज का फर्स्ट एड स्प्रिंट बांधा जाता है। उसे बांधकर मरीज को रेफर कर दिया गया।
सदर कोतवाली क्षेत्र के इंस्पेक्टर साधूराम का कहना है कि बस को कब्जे में ले लिया गया है।