{"_id":"69-53310","slug":"Maharajganj-53310-69","type":"story","status":"publish","title_hn":"मिस्ड कॉल से शुरू प्रेम कहानी का सुखद परिणाम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मिस्ड कॉल से शुरू प्रेम कहानी का सुखद परिणाम
Maharajganj
Updated Tue, 20 Nov 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
निचलौल। मोबाइल के मिस्ड कॉल से शुरू हुई प्रेम कहानी का सोमवार को सुखद परिणाम निकला। प्रेमी युगल ने जाति का बंधन तोड़ते हुए शादी कर ली। इस अंतर्जातीय प्रेम विवाह के गवाह तहसील परिसर के अधिवक्ता और मुंशी बने।
घुघली थाना क्षेत्र के निवासी धीरज सहानी ने करीब छह महीने पहले किसी काम को लेकर सदर तहसील में कॉल किया। गलती से उसका मिस्ड कॉल निचलौल थाना क्षेत्र के पिपराकाजी गांव की रहने वाली मुसलिम लड़की रेशमा के नंबर पर चला गया। उसके बाद उनके बीच बातचीत का सिलसिला शुरू हो गया। फिर वे एक-दूसरे को अपना दिल दे बैठे। धीरे-धीरे प्रेम परवान चढ़ने लगा। लिहाजा वे दोनों परिजनों के चोरी छिपे मिलने लगे। दोनों ने साथ जीने-मरने की कसम खा ली। करीब महीने भर पहले प्रेमी युगल घर से फरार हो गए। उसके बाद रेशमा के पिता नईम ने उन्हें खोज निकाला। वह बेटी को समझा-बुझाकर घर लाए।
सोमवार को रेशमा अपने माता-पिता के साथ निचलौल तहसील आई। उसके साथ प्रेमी धीरज भी मौजूद था। दोनों ने कचहरी में शादी कर ली। जन्म-जन्म तक साथ निभाने की कसमें खाईं। लड़की के परिजनों ने उनको खुश रहने का आशीर्वाद दिया। कचहरी के अधिवक्ता और मुंशी उनके प्रेम विवाह के गवाह बने।
विज्ञापन
विज्ञापन
घुघली थाना क्षेत्र के निवासी धीरज सहानी ने करीब छह महीने पहले किसी काम को लेकर सदर तहसील में कॉल किया। गलती से उसका मिस्ड कॉल निचलौल थाना क्षेत्र के पिपराकाजी गांव की रहने वाली मुसलिम लड़की रेशमा के नंबर पर चला गया। उसके बाद उनके बीच बातचीत का सिलसिला शुरू हो गया। फिर वे एक-दूसरे को अपना दिल दे बैठे। धीरे-धीरे प्रेम परवान चढ़ने लगा। लिहाजा वे दोनों परिजनों के चोरी छिपे मिलने लगे। दोनों ने साथ जीने-मरने की कसम खा ली। करीब महीने भर पहले प्रेमी युगल घर से फरार हो गए। उसके बाद रेशमा के पिता नईम ने उन्हें खोज निकाला। वह बेटी को समझा-बुझाकर घर लाए।
विज्ञापन
सोमवार को रेशमा अपने माता-पिता के साथ निचलौल तहसील आई। उसके साथ प्रेमी धीरज भी मौजूद था। दोनों ने कचहरी में शादी कर ली। जन्म-जन्म तक साथ निभाने की कसमें खाईं। लड़की के परिजनों ने उनको खुश रहने का आशीर्वाद दिया। कचहरी के अधिवक्ता और मुंशी उनके प्रेम विवाह के गवाह बने।
विज्ञापन