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बेबसी के समंदर में डूब गयी सोनमति
Fri, 04 Jan 2019 11:58 PM IST
राकेश पांडेय
Maharajganj
Maharajganj
Published by: राकेश पांडेय
Updated Fri, 04 Jan 2019 11:58 PM IST
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अमर उजाला
- फोटो : अमर उजाला
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महराजगंज। पूस की ठंड से लोहा लेने वाली वो बूढ़ी हड्डियां हार गईं। बृहस्पतिवार को मौत ने उसे अपनी आगोश में जगह दे दी। इस घटना से हम दुखी हैं। शर्मिंदा भी हैं कि हम उस मां के दर्द तक देर से पहुंचे। काश! हम उस मां का दर्द चंद रोज पहले हर दिल तक पहुंचा पाते। हर दिल में मानवता और नैतिकता जगा पाते तो शायद वो मां आज हमारे बीच होती। हमारे साथ होती। उस मां के प्रति गांव, कसबा, ब्लॉक , तहसील से लेकर शासन और प्रशासन तक की जिम्मेदारी बनती थी, जिसे निभाया नहीं गया। नतीजा वो हमें छोड़कर चली गई। यह दुख हमें हमेशा सालता रहेगा।
हम सभी को छोड़कर जाने वाली वह मां थी सदर ब्लॉक के रामपुर बुजुर्ग गांव की 75 वर्षीय सोनमति देवी। 25 साल पहले पति की मौत हो चुकी थी। संतान भी नहीं थी। न रहने को घर था और न खाने को अन्न। गांव वालों के रहमोकरम पर जिंदगी बस कट रही थी। कोई रहने को अपने बरामदे में थोड़ी जगह दे देता तो कोई खाने को दो राटी। पिछले कुछ दिनों से वह गांव के अमरनाथ शर्मा के घर के बरामदे रह रही थी। फटे पुराने कपड़ों और अढ़ना-बिछावन के सहारे सोनमति पूस की ठंड से मुकाबला कर रही थी। उसे न तो किसी सरकारी योजना का लाभ मिला था और न तो दान में कंबल। पेट भी कभी भरता तो कभी खाली रह जाता। ऐसे में वह मां कड़कड़ाती ठंड से कब तक मुकाबला करती। बृहस्पतिवार शाम उसके हाथों से जिंदगी का दामन छूट गया और वह चिर निद्रा में सो गई। गांव वालों ने मिलकर शुक्रवार सुबह रामघाट पर उसका अंतिम संस्कार कर दिया।
अंतिम यात्रा पर निकलने के बाद पहुंची मदद
- अमर उजाला में खबर छपने के बाद मां के दर पर मदद पहुंची थी, लेकिन देरी से। फरेंदा वृद्धा आश्रम के केयर टेकर विनय कटियार बृहस्पतिवार शाम एंबुलेंस लेकर रामपुर बुजुर्ग गांव पहुंचे थे। वृद्धा को अस्पताल ले जाने की तैयारी थी, लेकिन अफसोस तब तक वह अंतिम यात्रा पर निकल चुकी थी।
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- सोनमति को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का प्रयास किया जा रहा था। उसका मायका कांध गांव में था। भाई ने कई बार कहा था, ‘दीदी हमारे साथ चलो। अब यहां क्या रखा है।’ जवाब में सोनमति कहती, इस गांव में डोली में आई थी अब तो अर्थी पर ही जाऊंगी। गांव के लोग यथासंभव मदद करते थे, लेकिन होनी को कौन टाल सकता है। सोनमति की मौत से पूरा गांव दुखी है।
-शैलेंद्र मद्धेशिया, प्रधानपति, रामपुर बुजुर्ग
- डीएम, समाज कल्याण अधिकारी एवं सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को पत्र भेजकर सोनमति के बारे में जानकारी दी गई थी। बताया गया था कि वृद्धा को इलाज और ठंड से बचाव की जरूरत है, लेकिन अधिकारियों की संवेदना नहीं जागी।
- विनय कुमार पांडेय, एडवोकेट व मानवाधिकार कार्यकर्ता
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हम सभी को छोड़कर जाने वाली वह मां थी सदर ब्लॉक के रामपुर बुजुर्ग गांव की 75 वर्षीय सोनमति देवी। 25 साल पहले पति की मौत हो चुकी थी। संतान भी नहीं थी। न रहने को घर था और न खाने को अन्न। गांव वालों के रहमोकरम पर जिंदगी बस कट रही थी। कोई रहने को अपने बरामदे में थोड़ी जगह दे देता तो कोई खाने को दो राटी। पिछले कुछ दिनों से वह गांव के अमरनाथ शर्मा के घर के बरामदे रह रही थी। फटे पुराने कपड़ों और अढ़ना-बिछावन के सहारे सोनमति पूस की ठंड से मुकाबला कर रही थी। उसे न तो किसी सरकारी योजना का लाभ मिला था और न तो दान में कंबल। पेट भी कभी भरता तो कभी खाली रह जाता। ऐसे में वह मां कड़कड़ाती ठंड से कब तक मुकाबला करती। बृहस्पतिवार शाम उसके हाथों से जिंदगी का दामन छूट गया और वह चिर निद्रा में सो गई। गांव वालों ने मिलकर शुक्रवार सुबह रामघाट पर उसका अंतिम संस्कार कर दिया।
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अंतिम यात्रा पर निकलने के बाद पहुंची मदद
- अमर उजाला में खबर छपने के बाद मां के दर पर मदद पहुंची थी, लेकिन देरी से। फरेंदा वृद्धा आश्रम के केयर टेकर विनय कटियार बृहस्पतिवार शाम एंबुलेंस लेकर रामपुर बुजुर्ग गांव पहुंचे थे। वृद्धा को अस्पताल ले जाने की तैयारी थी, लेकिन अफसोस तब तक वह अंतिम यात्रा पर निकल चुकी थी।
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- सोनमति को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का प्रयास किया जा रहा था। उसका मायका कांध गांव में था। भाई ने कई बार कहा था, ‘दीदी हमारे साथ चलो। अब यहां क्या रखा है।’ जवाब में सोनमति कहती, इस गांव में डोली में आई थी अब तो अर्थी पर ही जाऊंगी। गांव के लोग यथासंभव मदद करते थे, लेकिन होनी को कौन टाल सकता है। सोनमति की मौत से पूरा गांव दुखी है।
-शैलेंद्र मद्धेशिया, प्रधानपति, रामपुर बुजुर्ग
- डीएम, समाज कल्याण अधिकारी एवं सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को पत्र भेजकर सोनमति के बारे में जानकारी दी गई थी। बताया गया था कि वृद्धा को इलाज और ठंड से बचाव की जरूरत है, लेकिन अधिकारियों की संवेदना नहीं जागी।
- विनय कुमार पांडेय, एडवोकेट व मानवाधिकार कार्यकर्ता