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Maharajganj News: 72 फीसदी गर्भवती महिलाएं कर रहीं जोखिम का सामना
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विशेषज्ञ डॉक्टरों की पहुंच 28% तक सिमटी, जिले में हर आठवीं महिला उच्च जोखिम में
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत 1 अप्रैल से 24 जुलाई तक की रिपोर्ट चौंकाने वाली
नौ अस्पतालों में महिला विशेषज्ञ न होने से सिर्फ रेफर करने की व्यवस्था
1,605 मामले हाई रिस्क प्रेगनेंसी के पाए गए
विपिन नागवंशी
महराजगंज। जिले में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी से गर्भवती महिलाओं को जोखिम का सामना करना पड़ रहा है। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत 1 अप्रैल से 24 जुलाई तक की रिपोर्ट चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। 72 फीसदी गर्भवती को स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ की सेवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसके कारण मां और गर्भ में पल रहे शिशु को खतरा बना रहता है।
अभियान में एक अप्रैल से 24 जुलाई 2026 के बीच 10,205 गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच की गई। पता चला कि इनमें से महज 2,850 महिलाओं को ही विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं मिल सकी थीं। 72 प्रतिशत गर्भवती का इलाज सिर्फ एमबीबीएस डॉक्टरों के भरोसे रहा। अभियान के तहत की गई जांच में एनीमिया, गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप, पूर्व सिजेरियन, खराब प्रसूति इतिहास, गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज, थायराइड, आरएच निगेटिव और जुड़वा गर्भावस्था जैसे मामले सामने आए। रिपोर्ट के अनुसार, इस अवधि में 6,417 गर्भवतियों की जांच और इलाज एमबीबीएस डॉक्टरों के भरोसे रहा।
केस एक:
परतावल से जिला अस्पताल में परामर्श के लिए पहुंची रुखसार ने बताया कि डॉक्टर का इंतजार कर रही हैं।क्षेत्र के अस्पताल में महिला विशेषज्ञ नहीं मिलीं तो निजी अस्पताल में डॉक्टर को दिखाया है। पांव में सूजन और थायराइड की समस्या है।
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केस दो:
सिसवा क्षेत्र की रहने वाली प्रतिभा ने बताया कि नजदीक के स्वास्थ्य केंद्र पर डॉक्टर को दिखाया था। रक्तचाप से जुड़ी समस्या हुई तो वह जिला अस्पताल में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ को दिखाने के लिए पहुंची हैं। ताकि सुरक्षित प्रसव हो सके।
सिर्फ इन स्वास्थ्य केंद्रों पर विशेषज्ञ डॉक्टर
स्वास्थ्य केंद्र
गर्भवती जिनकी जांच विशेषज्ञ ने की
सीएचसी फरेंदा 1,275
सीएचसी परतावल 749
आरएमसी नौतनवा 480
सीएचसी लक्ष्मीपुर 406
जिला संयुक्त चिकित्सालय
376
नौ अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं
जिले में सीएचसी लक्ष्मीपुर, परतावल, फरेंदा, नौतनवा और जिला संयुक्त चिकित्सालय में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ उपलब्ध हैं। इसके विपरीत सीएचसी बृजमनगंज, धानी, घुघली, मिठौरा, निचलौल, पनियरा, रतनपुर, सदर और सिसवा में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। ऐसे में इन केंद्रों पर आने वाली गर्भवती महिलाओं को जांच और इलाज के लिए दूसरे स्वास्थ्य केंद्रों पर निर्भर रहना पड़ता है।
इसलिए जरूरी हैं विशेषज्ञ डॉक्टर
चिकित्सकों के अनुसार उच्च जोखिम की गर्भावस्था में समय पर विशेषज्ञ की जांच और निगरानी नहीं मिलने पर मां और गर्भस्थ शिशु दोनों के लिए जटिलताओं का खतरा बढ़ सकता है। समय से पहले प्रसव, गर्भस्थ शिशु का कम वजन, गर्भ में ऑक्सीजन या पोषण की कमी, अत्यधिक रक्तचाप, संक्रमण और प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।
सीएचसी सदर की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. रोमा गुप्ता के अनुसार उच्च जोखिम की गर्भावस्था में विशेषज्ञ की निगरानी नहीं मिलने पर समय से पहले प्रसव का खतरा बढ़ सकता है। अचानक रक्तचाप बढ़ने से मां के गुर्दे और मस्तिष्क पर भी गंभीर असर पड़ सकता है। वहीं, गंभीर बीमारी या संक्रमण की स्थिति में गर्भस्थ शिशु की जान को भी खतरा हो सकता है।
वर्जन
जिन अस्पतालों में महिला विशेषज्ञ नहीं हैं, वहां पर उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान कराकर उन्हें महिला विशेषज्ञ डॉक्टर के पास दूसरे अस्पताल में जांच-इलाज के लिए भेजा जा रहा है।
- डॉ. सुरेंद्र कुमार चौधरी, सीएमओ महराजगंज
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प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत 1 अप्रैल से 24 जुलाई तक की रिपोर्ट चौंकाने वाली
नौ अस्पतालों में महिला विशेषज्ञ न होने से सिर्फ रेफर करने की व्यवस्था
1,605 मामले हाई रिस्क प्रेगनेंसी के पाए गए
विपिन नागवंशी
महराजगंज। जिले में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी से गर्भवती महिलाओं को जोखिम का सामना करना पड़ रहा है। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत 1 अप्रैल से 24 जुलाई तक की रिपोर्ट चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। 72 फीसदी गर्भवती को स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ की सेवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसके कारण मां और गर्भ में पल रहे शिशु को खतरा बना रहता है।
अभियान में एक अप्रैल से 24 जुलाई 2026 के बीच 10,205 गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच की गई। पता चला कि इनमें से महज 2,850 महिलाओं को ही विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं मिल सकी थीं। 72 प्रतिशत गर्भवती का इलाज सिर्फ एमबीबीएस डॉक्टरों के भरोसे रहा। अभियान के तहत की गई जांच में एनीमिया, गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप, पूर्व सिजेरियन, खराब प्रसूति इतिहास, गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज, थायराइड, आरएच निगेटिव और जुड़वा गर्भावस्था जैसे मामले सामने आए। रिपोर्ट के अनुसार, इस अवधि में 6,417 गर्भवतियों की जांच और इलाज एमबीबीएस डॉक्टरों के भरोसे रहा।
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केस एक:
परतावल से जिला अस्पताल में परामर्श के लिए पहुंची रुखसार ने बताया कि डॉक्टर का इंतजार कर रही हैं।क्षेत्र के अस्पताल में महिला विशेषज्ञ नहीं मिलीं तो निजी अस्पताल में डॉक्टर को दिखाया है। पांव में सूजन और थायराइड की समस्या है।
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केस दो:
सिसवा क्षेत्र की रहने वाली प्रतिभा ने बताया कि नजदीक के स्वास्थ्य केंद्र पर डॉक्टर को दिखाया था। रक्तचाप से जुड़ी समस्या हुई तो वह जिला अस्पताल में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ को दिखाने के लिए पहुंची हैं। ताकि सुरक्षित प्रसव हो सके।
सिर्फ इन स्वास्थ्य केंद्रों पर विशेषज्ञ डॉक्टर
स्वास्थ्य केंद्र
गर्भवती जिनकी जांच विशेषज्ञ ने की
सीएचसी फरेंदा 1,275
सीएचसी परतावल 749
आरएमसी नौतनवा 480
सीएचसी लक्ष्मीपुर 406
जिला संयुक्त चिकित्सालय
376
नौ अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं
जिले में सीएचसी लक्ष्मीपुर, परतावल, फरेंदा, नौतनवा और जिला संयुक्त चिकित्सालय में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ उपलब्ध हैं। इसके विपरीत सीएचसी बृजमनगंज, धानी, घुघली, मिठौरा, निचलौल, पनियरा, रतनपुर, सदर और सिसवा में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। ऐसे में इन केंद्रों पर आने वाली गर्भवती महिलाओं को जांच और इलाज के लिए दूसरे स्वास्थ्य केंद्रों पर निर्भर रहना पड़ता है।
इसलिए जरूरी हैं विशेषज्ञ डॉक्टर
चिकित्सकों के अनुसार उच्च जोखिम की गर्भावस्था में समय पर विशेषज्ञ की जांच और निगरानी नहीं मिलने पर मां और गर्भस्थ शिशु दोनों के लिए जटिलताओं का खतरा बढ़ सकता है। समय से पहले प्रसव, गर्भस्थ शिशु का कम वजन, गर्भ में ऑक्सीजन या पोषण की कमी, अत्यधिक रक्तचाप, संक्रमण और प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।
सीएचसी सदर की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. रोमा गुप्ता के अनुसार उच्च जोखिम की गर्भावस्था में विशेषज्ञ की निगरानी नहीं मिलने पर समय से पहले प्रसव का खतरा बढ़ सकता है। अचानक रक्तचाप बढ़ने से मां के गुर्दे और मस्तिष्क पर भी गंभीर असर पड़ सकता है। वहीं, गंभीर बीमारी या संक्रमण की स्थिति में गर्भस्थ शिशु की जान को भी खतरा हो सकता है।
वर्जन
जिन अस्पतालों में महिला विशेषज्ञ नहीं हैं, वहां पर उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान कराकर उन्हें महिला विशेषज्ञ डॉक्टर के पास दूसरे अस्पताल में जांच-इलाज के लिए भेजा जा रहा है।
- डॉ. सुरेंद्र कुमार चौधरी, सीएमओ महराजगंज