{"_id":"646676a833cdd5ce79063354","slug":"7026-trees-cut-for-nh-construction-maharajganj-news-c-7-1-172287-2023-05-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"Maharajganj News: एनएच निर्माण के लिए काट डाले 7026 पेड़, लगा एक भी नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Maharajganj News: एनएच निर्माण के लिए काट डाले 7026 पेड़, लगा एक भी नहीं
Fri, 19 May 2023 12:34 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Fri, 19 May 2023 12:34 AM IST
विज्ञापन
पेड़ काटने के एवज में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने 16 करोड़ रुपये का कर चुका है भुगतान
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। जिले में दो राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण के लिए सात वर्ष में 7026 पेड़ काट दिए गए। कटे एक पेड़ की जगह अधिक पेड़ लगाने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने करीब 16 करोड़ से अधिक की धनराशि का भुगतान भी कर दिया, मगर यह धनराशि खाते में डंप पड़ी हुई है। इसके बावजूद एक भी पौधे नहीं लगाए गए हैं। इतना ही नहीं, कोरोना काल में दुष्परिणाम झेलनेकके बाद भी पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरुकता नहीं दिख रही है।
राष्ट्रीय राजमार्ग 730 पीलीभीत को बिहार सीमा से जोड़ता है। सोहगीबरवां वन्यजीव प्रभाग की ओर से इस राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण के लिए कटने योग्य 3729 पेड़ चिह्नित किए थे। पेड़ों की कटाई दो चरणों में हुई। वर्ष 2016-17 में शहर के बलिया नाले से परतावल क्षेत्र के धरमौली तक 1367 पेड़ काटे गए। जबकि वर्ष 2018-19 मेें त्रिमुहानी से लेकर बलिया नाले तक कुल 2362 पेड़ काटे गए। पेड़ की कटाई के एवज में वन विभाग को 10 करोड़ की धनराशि दी गई। राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहन फर्राटा भी भरने लगे, मगर अब तक कटे पेड़ों की एवज मेें एक भी पौधा सड़क के किनारे नहीं लग सका है।
राष्ट्रीय राजमार्ग 29 पर गोरखपुर व सोनौली के बीच सोहगीबरवां वन्यजीव प्रभाग में रनियापुर से लेकर सोनौली का हिस्सा पड़ता है। इसके चौड़ीकरण के लिए वर्ष 2022-23 मेंं कुल 3297 पेड़ों की कटाई की गई। कटे हुए इन पेड़ों के एवज में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की ओर से छह करोड़ से अधिक की धनराशि का भुगतान किया गया है। अभी चौड़ीकरण का कार्य पूरा होना है।
विज्ञापन
..
पर्यावरण व स्वास्थ्य दोनों ही दृष्टि से पेड़-पौधों का होना अत्यंत आवश्यक है। इनसे हमें जहां ऑक्सीजन प्राप्त होता है, वहीं छाया भी। कोरोना काल के दुष्परिणाम देखने के बाद इनके संरक्षण की दिशा में प्रयास को गति मिलनी चाहिए।
-प्रकाशिनी सिंह, शिक्षिका जीव विज्ञान
...
जिले की दो राष्ट्रीय राजमार्गों पर काटे गए पेड़ों के एवज में धनराशि मिल चुकी है। सड़क के किनारे भूमि की तलाश की जा रही है। भूमि मिलने पर वहां पौधे लगाए जाएंगे। यदि भूमि नहीं मिली तो विभिन्न वन क्षेत्रों में हरियाली को विकसित करने के लिए 600 हेक्टेयर से अधिक पौधरोपण का कार्य होगा।
पुष्प कुमार कांधला, प्रभागीय वनाधिकारी, सोहगीबरवां वन्यजीव प्रभाग
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। जिले में दो राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण के लिए सात वर्ष में 7026 पेड़ काट दिए गए। कटे एक पेड़ की जगह अधिक पेड़ लगाने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने करीब 16 करोड़ से अधिक की धनराशि का भुगतान भी कर दिया, मगर यह धनराशि खाते में डंप पड़ी हुई है। इसके बावजूद एक भी पौधे नहीं लगाए गए हैं। इतना ही नहीं, कोरोना काल में दुष्परिणाम झेलनेकके बाद भी पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरुकता नहीं दिख रही है।
राष्ट्रीय राजमार्ग 730 पीलीभीत को बिहार सीमा से जोड़ता है। सोहगीबरवां वन्यजीव प्रभाग की ओर से इस राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण के लिए कटने योग्य 3729 पेड़ चिह्नित किए थे। पेड़ों की कटाई दो चरणों में हुई। वर्ष 2016-17 में शहर के बलिया नाले से परतावल क्षेत्र के धरमौली तक 1367 पेड़ काटे गए। जबकि वर्ष 2018-19 मेें त्रिमुहानी से लेकर बलिया नाले तक कुल 2362 पेड़ काटे गए। पेड़ की कटाई के एवज में वन विभाग को 10 करोड़ की धनराशि दी गई। राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहन फर्राटा भी भरने लगे, मगर अब तक कटे पेड़ों की एवज मेें एक भी पौधा सड़क के किनारे नहीं लग सका है।
विज्ञापन
राष्ट्रीय राजमार्ग 29 पर गोरखपुर व सोनौली के बीच सोहगीबरवां वन्यजीव प्रभाग में रनियापुर से लेकर सोनौली का हिस्सा पड़ता है। इसके चौड़ीकरण के लिए वर्ष 2022-23 मेंं कुल 3297 पेड़ों की कटाई की गई। कटे हुए इन पेड़ों के एवज में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की ओर से छह करोड़ से अधिक की धनराशि का भुगतान किया गया है। अभी चौड़ीकरण का कार्य पूरा होना है।
विज्ञापन
..
पर्यावरण व स्वास्थ्य दोनों ही दृष्टि से पेड़-पौधों का होना अत्यंत आवश्यक है। इनसे हमें जहां ऑक्सीजन प्राप्त होता है, वहीं छाया भी। कोरोना काल के दुष्परिणाम देखने के बाद इनके संरक्षण की दिशा में प्रयास को गति मिलनी चाहिए।
-प्रकाशिनी सिंह, शिक्षिका जीव विज्ञान
...
जिले की दो राष्ट्रीय राजमार्गों पर काटे गए पेड़ों के एवज में धनराशि मिल चुकी है। सड़क के किनारे भूमि की तलाश की जा रही है। भूमि मिलने पर वहां पौधे लगाए जाएंगे। यदि भूमि नहीं मिली तो विभिन्न वन क्षेत्रों में हरियाली को विकसित करने के लिए 600 हेक्टेयर से अधिक पौधरोपण का कार्य होगा।
पुष्प कुमार कांधला, प्रभागीय वनाधिकारी, सोहगीबरवां वन्यजीव प्रभाग