एथेनॉल प्लांट लगाने के लिए प्रस्ताव मांगे
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अब तक चीनी मिलें किसानों से खरीदे गन्ने से केवल चीनी बनाती हैं। देश भर में चीनी की उत्पादकता अधिक है। बाजारों में चीनी के रेट गिरने से चीनी मिल प्रबंधक घाटे की दुहाई देकर किसानों का गन्ना बकाया रोक लेते हैं। चीनी बनाने के बाद गन्ने के जूस का जो शीरा बचता है, बाजार में उसकी डिमांड नहीं के बाराबर है। चीनी मिले शीरे का भंडारण नहीं कर पा रही हैं। सरकार ने चीनी मिलों से किसानों का बकाया भुगतान तुरंत दिलाने के उद्देश्य से गन्ने के जूस से चीनी के अलावा एथेनॉल बनाने की कार्ययोजना तैयार की है। इसके लिए चीनी मिलों से 19 अगस्त तक प्रस्ताव मांगे गए हैं। सिसवां में इंडियन पोटास लिमिटेड शुगर मिल, जेएचवी शुगर मिल प्रोजेक्ट भेजने की तैयारी कर रहे हैं।
जिला गन्ना अधिकारी प्रदीप कुमार ने बताया कि केंद्र सरकार ने चीनी मिलों से 30 दिन के अंदर एथेनॉल प्लांट लगाने के प्रस्ताव मांगे हैं। चीनी मिलों को इस संबंध में सरकार की मंशा से अवगत करा दिया गया है। कुछ चीनी मिलों को इस संबंध में सरकार की मंशा से अवगत करा दिया गया है। अगर चीनी मिलें गन्ने के जूस या शीरे से एथेनॉल बनाते हैं तो एक क्विंटल शीरे से 22 लीटर एथेनॉल तैयार किया जा सकता है। एथेनॉल का बाजार में कीमत 41 रुपये प्रति लीटर है।
क्या है एथेनॉल
एथेनॉल एक तरह का अल्कोहल है। इसे पेट्रोल में मिलाकर गाड़ियों के फ्यूल की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। एथेनॉल का उत्पादन गन्ने के जूस से होता है। हालांकि शर्करा वाली अन्य फसलों से भी एथेनॉल बनाया जाता है। इससे खेती व पर्यावरण दोनों को फायदा होता है। ब्राजील की करीब 40 फीसदी गाड़ियां एथेनॉल से ही दौड़ती हैु। बाकी वाहनों में 24 फीसदी एथेनॉल मिलाकर ईंधन का प्रयोग किया जाता है।