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Maharajganj News: 32 बेड पर 45 नवजात भर्ती
Tue, 14 Jan 2025 12:58 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Tue, 14 Jan 2025 12:58 AM IST
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महराजगंज। जिला अस्पताल के नवजात शिशु देखभाल इकाई में 32 बेड पर 45 बच्चे भर्ती हैं। इससे बच्चों और उनके परिजनों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
डॉक्टर्स के मुताबिक मौसम परिवर्तन के साथ ही बीमार होने वाले बच्चों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विशाल चौधरी ने बताया कि नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई में 32 बेड हैं। इकाई पर 24 घंटे सेवा की सुविधा उपलब्ध है। प्रतिमाह 100 से अधिक संख्या में बच्चे स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं।
इकाई पूरी तरह वातानुकूलित भवन में संचालित है। 13 स्टाफ नर्स और आठ बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती नवजात शिशु देखभाल इकाई में है। इस वार्ड में शिफ्टवार डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई जाती है।
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बच्चों के बेहतर इलाज का प्रयास किया जाता है। बेहतर सुविधा मिलने के कारण यहां अधिक बच्चे भर्ती होते हैं। एसएनसीयू वार्ड में बच्चों को भर्ती कर बेहतर ढंग से इलाज देने का प्रयास रहता है। इसमें ऐसे बच्चों को भर्ती किया जाता है, जिनका जन्म के समय वजन कम, पीलिया, सांस फूलने की समस्या हो। वर्तमान में लगातार मौसम के बदलाव से नवजात मरीजों की संख्या में इजाफा देखने को मिल रहा है।
तीमारदार कहते हैं कि जिला अस्पताल में यह व्यवस्था मुफ्त है, जबकि निजी अस्पतालों में महंगी है। थोड़ी परेशानी हो रही है तो समझौता करना ही पड़ेगा। बच्चों का इलाज ठीक से हो रहा है। उधर, आए-दिन कम से कम चार से पांच नवजात इस तरह के आ रहे हैं। अधिक बच्चों भर्ती होने के कारण इलाज करने से संक्रमण फैलने का खतरा भी बना रहता है।
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डॉक्टर्स के मुताबिक मौसम परिवर्तन के साथ ही बीमार होने वाले बच्चों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विशाल चौधरी ने बताया कि नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई में 32 बेड हैं। इकाई पर 24 घंटे सेवा की सुविधा उपलब्ध है। प्रतिमाह 100 से अधिक संख्या में बच्चे स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं।
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इकाई पूरी तरह वातानुकूलित भवन में संचालित है। 13 स्टाफ नर्स और आठ बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती नवजात शिशु देखभाल इकाई में है। इस वार्ड में शिफ्टवार डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई जाती है।
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बच्चों के बेहतर इलाज का प्रयास किया जाता है। बेहतर सुविधा मिलने के कारण यहां अधिक बच्चे भर्ती होते हैं। एसएनसीयू वार्ड में बच्चों को भर्ती कर बेहतर ढंग से इलाज देने का प्रयास रहता है। इसमें ऐसे बच्चों को भर्ती किया जाता है, जिनका जन्म के समय वजन कम, पीलिया, सांस फूलने की समस्या हो। वर्तमान में लगातार मौसम के बदलाव से नवजात मरीजों की संख्या में इजाफा देखने को मिल रहा है।
तीमारदार कहते हैं कि जिला अस्पताल में यह व्यवस्था मुफ्त है, जबकि निजी अस्पतालों में महंगी है। थोड़ी परेशानी हो रही है तो समझौता करना ही पड़ेगा। बच्चों का इलाज ठीक से हो रहा है। उधर, आए-दिन कम से कम चार से पांच नवजात इस तरह के आ रहे हैं। अधिक बच्चों भर्ती होने के कारण इलाज करने से संक्रमण फैलने का खतरा भी बना रहता है।