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Maharajganj News: 32 बेड पर 40 बच्चे भर्ती
Sun, 09 Mar 2025 12:50 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Sun, 09 Mar 2025 12:50 AM IST
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एसएनसीयू में भर्ती बच्चे।
महराजगंज। जिला अस्पताल के नवजात शिशु देखभाल इकाई में 32 बेड पर 40 बच्चे भर्ती हैं। इससे बच्चों और उनके परिजनों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
डॉक्टर्स के मुताबिक मौसम परिवर्तन के साथ ही बीमार होने वाले बच्चों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विशाल चौधरी ने बताया कि नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई में 32 बेड हैं। इकाई पर 24 घंटे सेवा की सुविधा उपलब्ध है। नवजात शिशु देखभाल इकाई में व्यवस्था बेहतर की गई है। यह इकाई पूरी तरह वातानुकूलित है।
13 स्टाफ नर्स और आठ बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती है। यहां शिफ्टवार डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई जाती है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, एसएनसीयू वार्ड में बच्चों को भर्ती कर बेहतर ढंग से इलाज देने का प्रयास रहता है। वर्तमान में लगातार मौसम के बदलाव से नवजात मरीजों की संख्या में इजाफा देखने को मिल रहा है।
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बाल रोग विशेषज्ञ के अनुसार, इस वार्ड में जन्म लेने के साथ सांस फूलने, पीलिया, दूध नहीं पीने, निर्धारित वजन से कम, नौ माह के पहले जन्म लेने, अविकसित शिशुओं को भर्ती कर इलाज किया जाता है। इनमें कई ऐसे नवजात होते हैं, जिन्हें जन्म के बाद से लगभग आठ से 10 दिनों के लिए इसमें रखना पड़ता है।
तीमारदारों ने बताया कि बेहतर इलाज की सुविधा मिलती है। ऐसे में थोड़ी परेशानी है तो कोई बात नहीं है। निजी अस्पतालों में यही सुविधा महंगे दाम पर मिलेगी।जिला अस्पताल के सीएमएस डाॅ. एके द्विवेदी ने बताया कि अस्पताल में बेहतर इलाज की सुविधा है। पर्याप्त दवाओं की उपलब्धता है।ी
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डॉक्टर्स के मुताबिक मौसम परिवर्तन के साथ ही बीमार होने वाले बच्चों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विशाल चौधरी ने बताया कि नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई में 32 बेड हैं। इकाई पर 24 घंटे सेवा की सुविधा उपलब्ध है। नवजात शिशु देखभाल इकाई में व्यवस्था बेहतर की गई है। यह इकाई पूरी तरह वातानुकूलित है।
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13 स्टाफ नर्स और आठ बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती है। यहां शिफ्टवार डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई जाती है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, एसएनसीयू वार्ड में बच्चों को भर्ती कर बेहतर ढंग से इलाज देने का प्रयास रहता है। वर्तमान में लगातार मौसम के बदलाव से नवजात मरीजों की संख्या में इजाफा देखने को मिल रहा है।
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बाल रोग विशेषज्ञ के अनुसार, इस वार्ड में जन्म लेने के साथ सांस फूलने, पीलिया, दूध नहीं पीने, निर्धारित वजन से कम, नौ माह के पहले जन्म लेने, अविकसित शिशुओं को भर्ती कर इलाज किया जाता है। इनमें कई ऐसे नवजात होते हैं, जिन्हें जन्म के बाद से लगभग आठ से 10 दिनों के लिए इसमें रखना पड़ता है।
तीमारदारों ने बताया कि बेहतर इलाज की सुविधा मिलती है। ऐसे में थोड़ी परेशानी है तो कोई बात नहीं है। निजी अस्पतालों में यही सुविधा महंगे दाम पर मिलेगी।जिला अस्पताल के सीएमएस डाॅ. एके द्विवेदी ने बताया कि अस्पताल में बेहतर इलाज की सुविधा है। पर्याप्त दवाओं की उपलब्धता है।ी