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Maharajganj News: खाद आपूर्ति 20 कंपनियों की, बाजार में बस 7 की

Tue, 30 Dec 2025 01:36 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 30 Dec 2025 01:36 AM IST
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20 companies supply fertilizers, but only 7 are available in the market.
महराजगंज। खाद तस्करी के धंधे में नया खेल सामने आया है। करीब 20 कंपनियों की खाद आपूर्ति जिले में होती है लेकिन बाजार में सात से आठ कंपनियों की खाद ही दिखती है। इसकी पुख्ता जानकारी किसी के पास नहीं है कि अन्य कंपनियों की खाद कहां जा रही है। आशंका व्यक्त की जा रही है कि यही खाद नेपाल भिजवा दी जाती है। तस्करी से धंधेबाज मोटा मुनाफा कमा रहे हैं लेकिन किसानों को जैसे-तैसे खाद मिल पा रही है। तस्करी के इस खेल में बड़े सिंडिकेट के शामिल होने की आशंका है।
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सूत्रों की मानें तो खाद तस्करी के खेल में नियम-कानून का पेच फंसा कर तस्कर मालामाल हो रहे हैं। खामियों पर नजर डालें तो सबसे पहले बड़े कारोबारियों का गोदाम दुकान के आसपास नहीं है। इसका फायदा तस्कर उठा रहे हैं। अगर खाद गोरखपुर से भेजी जाती है तो सीधे बॉर्डर तक पहुंच जाती है। रास्ते में कोई रोकता है तो पूरे प्रपत्र होने के कारण आगे बढ़ जाते हैं। प्रथम दृष्टया सभी प्रपत्र होने की वजह से सीमा क्षेत्र में खाद पहुंचने के बाद यह दुकान में न जाकर अवैध गोदामों में पहुंचा दी जाती है। सीमावर्ती क्षेत्र के परसामलिक, बरगदवा, भगवानपुर, सेवतरी समेत अन्य क्षेत्र में गोदाम बना है। इसी में खाद रखने के बाद मौका देखकर तस्कर नेपाल पहुंचा देते हैं। दूसरा खेल यह है कि खाद बनाने वाली कई कंपनियां हैं। 20 से अधिक कंपनियों की आपूर्ति महराजगंज समेत नेपाल सीमा से लगे अन्य जिलों में होती है।
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तमाम ऐसी कंपनियां है जिनके नाम कोई जानता भी नहीं। इनके खाद की खपत भी हो रही है। सूत्रों की मानें तो इसमें बड़ा सिंडिकेट लगा है। इस खेल में नियम कानून का पूरा ध्यान रखा गया है। इस वजह से इस अंधेरगर्दी से पर्दा नहीं हट रहा है। बताया जाता है कि खाद की आपूर्ति जिले में हो रही है। किसान भी अपने खेत में भरपूर मात्रा में यूरिया, डाई का छिड़काव कर रहे हैं और तस्कर भी नेपाल भेज रहे हैं। इसमें कहीं न कहीं झोल है। आखिर दोनों की मांग के अनुसार खाद मिल जा रही है। किसानों को किसी तरह से खाद सेंटरों से मिल जाती है। इसके लिए भले ही उनको चार से पांच दिन चक्कर लगाना पड़े।
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तस्करी के खेल के समझने के लिए इन दोनों पहलुओं पर गौर किया गया तो इसके बारे में पुख्ता जानकारी नहीं मिल सकी। सूत्रों से मिली जानकारी अगर सटीक है तो करोड़ों का वारा न्यारा हर साल हो रहा है। सात से आठ कंपनियों की खाद की खपत जिले में हो जा रही है तो अन्य कंपनियों की खाद कहां जा रही है? इसके बारे में सटीक जानकारी देने के बजाय जिम्मेदार नियम-कानून की बात करने लगते हैं।
अपर पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ ने बताया कि बार्डर क्षेत्र में कड़ी निगरानी की जा रही है। सूचना मिलने पर टीम त्वरित कार्रवाई करती है।
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