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बाढ़ के कहर से थम गई जिन्दगी की रफ्तार, छतो पर कट रही रात

Sun, 20 Aug 2017 10:28 PM IST
Updated Sun, 20 Aug 2017 10:28 PM IST
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बाढ़ के कहर से थम गई जिन्दगी की रफ्तार, छतो पर कट रही रात
महराजगंज। जिले में 92 हजार से अधिक की आबादी बाढ़ से पीड़ित है। प्रशासन की ओर से बचाव राहत की उम्मीद लगाए बैठे पीड़ितों की जिन्दगी की रफ्तार थम गई है। अभाव के बीच जीवन गुजर करना विवशता बन गया है। निचलौल, नौतनवां, फरेंदा और सदर तहसील में बाढ़ का असर है लेकिन सर्वाधिक तबाही सदर और नौतनवां तहसील क्षेत्र में है। अभी भी पानी से घिरे तमाम गांवों में राहत सामग्री नहीं मिल पा रही है। भीगे हुए अनाज को चेहरी बंधे पर सुखाने की व्यवस्था ग्रामीणों ने कर रखा है। कुछ दिन और ऐसे ही रहा तो ईधन के बगैर अब तो भोजन भी बन पाना मुश्किल होगा।
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सदर तहसील के पनियरा क्षेत्र के बड़हरालाल गांव में लोगों की परेशानी पर किसी की नजर नहीं है। छत पर लोग रात गुजारने को मजबूर है। गांव से ढाई किमी दूर राहत शिविर है। दो मोटर वोट है, जिससे कभी कभार कुछ राहत सामग्री आ जाती है। 2700 की आबादी वाले गांव में 100 परिवार गांव में ही छत पर रह रहे हैं, जबकि अन्य बंधे पर रह रहे हैं। बड़हरा लाला गांव छह टोलों में विभक्त है। तिवारी टोला, लाला टोला, पंडित टोला, दक्षिण टोला, चमवा टोला है। यह सभी पानी से घिरे हुए हैं।
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यहां रहने वाले शैलेंद्र चतुर्वेदी कहते हैं कि वर्ष 1998 की बाढ़ में भी ऐसी तबाही नहीं हुई थी। शैलेंद्र के घर की छत पर गांव के सिंहासन, बांकेलाल और लालसाहब चौहान शरण लिए हुए हैं। इन लोगों का घर ध्वस्त हो चुका है। सिंहासन ने बताया कि अनंतपुर बडहरा बांध तिवारी टोले के पास कटा तो अचानक पानी गांव में घूस गया। उस वक्त तो अफरा तफरी मच गई। परमलाल चौबे, लिलावती और विन्यवासिनी ने बाढ़ से होने वाली दुश्वारियों का जिक्र करते हुए प्रशासन को उदासीन बताया। इन लोगो के कहा कि खाद्य सामग्री यहां तक पहुंच नहीं पा रही है। अगर मोटर बोट से आता भी है तो कुछ लोगो को मिलता है। वेद प्रकाश घर के छत पर बैठे रहे। बोले कि बाढ़ की तबाही ने जिन्दगी की रफ्तार को रोक दिया है। राहुल, मंगरू और संजय ने बताया कि शुक्रवार को राहत सामाग्री मिली थी लेकिन उसके बाद कोई नहीं है। जबकि अनंतपुर बडहरा बांध के पास राहत कैम्प बना है। वहां दो मोटर बोट है। पूरा गांव पानी घिरा है। शैलेन्द्र ने बताया कि बेटा अभिषेक गोरखपुर विश्वविद्यालय में बीए प्रथम वर्ष में पढता है। बाढ के कारण वह घर नहीं आ पा रहा है।
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महिला ने नाव पर बच्चे को जन्म दिया
महराजगंज। बाढ़ का कहर वनग्राम में भी है। बलुअहिया, हथियहवां, 24 नर्सरी समेत अन्य वन ग्राम भी बाढ़ की चपेट में हैं। पानी से घिरे वन ग्राम में दुश्वारियों भरी जिंदगी कट रही है। रविवार को बलुअहिया नर्सरी के रहने वाले कतवारू की पत्नी प्रसव पीड़ा से कराह रही थी तो लोगों ने एक नाव मंगाई। इसके बाद उसे नाव से लेकर जाते वक्त पानी से घिरे जंगल में ही उसने बच्चे को जना। कुछ देर बाद उसे चौक बाजार लाया गया, फिर जिला अस्पताल तक पहुंचाया गया। जच्चा बच्चा दोनों स्वस्थ्य बताए गए। हथियहवां नर्सरी के रहने वाले रमेश, नूरमोहम्मद, संतराज, रामेश्वर ने बताया कि वन ग्राम राहत सामग्री नहीं पहुंच पा रही है। अब तो पानी घटने का इंतजार किया जा रहा है।
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जिला मुख्यालय तक पहुंचने राह आसान नहीं
महराजगंज। जिला मुख्यालय को जोड़ने वाली सड़कों का हाल बदतर है। सड़क या तो बीच में टूटी है, या इतनी खराब है कि चलना मुश्किल हो जाएगा। बाढ़ से हुई तबाही ने न सिर्फ जन जीवन को तबाह किया बल्कि सड़कों की दशा में खराब कर दी है। फरेंदा के लिए महराजगंज से जाने को कोई सीधा रास्ता नहीं है। 10 फीट रोड आईटीएम चेहरी के पास कट चुका है। पानी की तेज धारा बह रही है। फरेंदा जाने के लिए पनियरा कम्पियरंगज से होकर जाना पडे़गा। पनियरा ब्लाक मुख्यालय से दर्जनभर से अधिक गांव कट गए है। यह रोड भी दर्जनभर स्थानों पर कटा क्षतिग्रस्त है। महराजगंज-सिसवा, घुघली, सिसवा-इंदरपुर मार्ग भी बदहाल है। इधर से आवागमन शुरू है लेकिन आने जाने में बेहद परेशानी होती है। इसके अलावा गोरखपुर-सोनौली हाईवे को जोडने वाली मझार क्षेत्र के करीब 40 गांव की सड़कें पानी में डूबी है।

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बाढ़ पर एक नजर
जिले में गांव--929
बाढ़ प्रभावित गांव--264
मैरूंड--------88
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जिले में 30 बाढ़ चौकियां बनाई गई हैं। 23 राहत शिविर हैं। वहीं एनडीआरएफ टीम के अलावा पीएसी जवान भी लगे हैं। बचाव राहत कार्य तेज है। बाढ़ से प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता दी जा रही है। पानी घटते ही सड़कों की दशा में तेजी से सुधार हो जाएगा। बाढ़ बचाव कार्य को लेकर प्रशासन गंभीर है।
वीके सिंह, डीएम, महराजगंज
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