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Maharajganj News: 17 साधन सहकारी समितियों का होगा कायाकल्प

Sun, 19 Oct 2025 02:19 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 19 Oct 2025 02:19 AM IST
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17 resource cooperative societies will be rejuvenated
महराजगंज। जिले की 17 साधन सहकारी समितियों (बी-पैक्स) का जल्द ही कायाकल्प होगा। शासन स्तर से इस परियोजना को हरी झंडी मिल चुकी है, जिसके तहत इन समितियों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। बजट आवंटन के बाद कार्य प्रारंभ होने से किसानों को खाद, बीज, ऋण और अन्य कृषि सेवाओं का बेहतर लाभ मिल सकेगा। इस पर एक करोड़ 70 लाख रुपये खर्च होंगे।
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जानकारी के अनुसार, महराजगंज जिला, जो नेपाल सीमा से सटा एक कृषि प्रधान जिला है, यहां की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से खेती-किसानी पर आधारित है। अधिकांश लोग कृषि को ही अपनी आजीविका का प्रमुख साधन मानते हैं। धान, गेहूं, गन्ना और सब्जियों की खेती यहां की पहचान है। जिले में कुल 96 साधन सहकारी समितियां पंजीकृत हैं,जिसमें से 92 समितियां वर्तमान में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। ये समितियां प्रतिवर्ष लगभग 50 हजार मीट्रिक टन खाद का वितरण किसानों के बीच करती हैं। लेकिन इन समितियों की तमाम भवन पुरानी हैं और इनके भवन जर्जर अवस्था में हैं। भंडारण की समुचित व्यवस्था न होने के कारण कई बार खाद और बीज खराब हो जाते हैं। डिजिटल तकनीक के अभाव में ऋण वितरण और खरीद प्रक्रिया में देरी होती है, जिससे किसानों को कठिनाई का सामना करना पड़ता है। इस चुनौतियों को देखते हुए शासन ने 17 समितियों को चयनित कर उनके कायाकल्प की योजना तैयार की। चयनित समितियों का चयन उनकी सक्रियता, भौगोलिक स्थिति और किसानों की भागीदारी के आधार पर किया गया है। इसमें फरेंदा, नौतनवा, घुघली, परतावल, पनियरा, सिसवा, बृजमनगंज और निचलौल ब्लॉक की प्रमुख समितियां शामिल हैं। इन समितियों को मॉडल समिति के रुप में विकसित किया जाएगा ताकि आने वाले समय में अन्य समितियां भी इसी ढांचे का अनुसरण कर सकें।सहकारिता विभाग के अनुसार, इन समितियों को बहुउद्देशीय केंद्रों के रूप में विकसित किया जाएगा। प्रत्येक समिति में डिजिटल वित्तीय साक्षरता केंद्र, सौर ऊर्जा आधारित भंडारण गोदाम, मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला और ई-कृषि पोर्टल की सुविधा दी जाएगी। इसके अतिरिक्त डेयरी, मत्स्य पालन और उद्यानिकी आधारित इकाइयां भी स्थापित की जाएंगी, जिससे किसानों को वैकल्पिक आय के स्रोत मिल सकें।वर्तमान में जिले के लगभग 3 लाख 20 हजार से अधिक किसान इन सहकारी समितियों से जुड़े हुए हैं। समितियों के सदस्य किसानों को खाद, बीज और कृषि ऋण पर विशेष छूट का लाभ मिलता है। पहले यह प्रक्रिया मैनुअल और विलंब कारी थी। लेकिन अब डिजिटल लेन-देन की सुविधा से ऋण वितरण और भुगतान प्रणाली त्वरित हो जाएगी। विभाग के अनुसार, वर्तमान में 50 समितियों को डिजिटल प्रणाली से जोड़ा जा चुका है और 62 समितियों में सहज जन सेवा केंद्र स्थापित किए गए हैं। बृजमनगंज ब्लॉक के बहादुरी बाजार और घुघुली ब्लॉक के भुवनी में जन औषधि केंद्र खोले गए हैं, जिससे ग्रामीणों को सस्ती दवाएं मिल रही हैं।
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पूर्व अध्यक्ष साधन सहकारी समिति मुजुरी डॉ. अशोक कुमार सैनी बताया कि समिति का भवन काफी पुराना और जर्जर है। बरसात के दिनों में गोदाम में रखी खाद में नमी लग जाती थी, जिससे भारी नुकसान होता था। अब नया गोदाम बनने से भंडारण सुरक्षित रहेगा और किसानों को समय पर खाद मिलेगी।
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बृजमनगंज ब्लॉक के फूलमनहां जगदेवपुर के महेंद्र प्रसाद ने कहा कि डिजिटल व्यवस्था से किसानों को राहत मिलेगी। पहले कागजी प्रक्रिया में ऋण मिलने में कई दिन लग जाते थे, अब यह सुविधा ऑनलाइन होने से त्वरित भुगतान मिलेगा।

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साधन सहकारी समितियों का कायाकल्प केवल भवन निर्माण या आधुनिकीकरण तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि यह किसानों की आर्थिक सशक्तिकरण,पारदर्शी वित्तीय प्रबंधन और तकनीकी सुविधा का नया युग शुरू करेगा।
सुनील कुमार गुप्ता, एआरकोआपरेटीव
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