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जिला कारागार में बंदियों का स्वास्थ्य परीक्षण हुआ
Updated Sun, 03 Sep 2017 12:13 AM IST
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महराजगंज। शनिवार को जिला कारागार में बंदियों का स्वास्थ्य परीक्षण हुआ। आंख, दांत, कान आदि की जांच कर सलाह दी गई। 250 बंदियों का स्वास्थ्य परीक्षण हुआ। बीमार बंदियों को दवाएं भी दी गईं। दांत का परीक्षण डेंटल सर्जन डॉ. परितोष कुमार सिंह तथा आंख का परीक्षण डा. एके सिन्हा व फिजिशियन डा. एबी त्रिपाठी ने जांच की। जेल अधीक्षक एके सिंह ने स्वास्थ्य शिविर आयोजन के लिए डॉक्टरों के प्रति आभार प्रकट किया। इस दौरान वरिष्ठ जेल अधीक्षक एके सिंह, आरके सिंह, उप जेलर नयन कमल सिंह, प्रदीप कुमार सिंह, जेल वार्डन सपन कुमार, राजेश पांडेय, महिला जेल वार्डन आदि मौजूद रहे।
भारतीय संस्कृति एवं संत परंम्परा विषय पर चर्चा
महराजगंज। शनिवार को दिग्विजयनाथ इंटर कालेज चौक बाजार में संस्थापक ब्रम्हलीन महंत अवेद्यनाथ की पुण्य स्मृति में दो दिवसीय व्याख्यान माला के दूसरे दिन भारतीय संस्कृति एवं संत परंपरा विषय पर चर्चा की गई। मुख्य अतिथि प्राचार्य परशुराम गुप्ता ने कहा कि भारतीय संस्कृति पूरे विश्व को परिवार मानती है और सबके कल्याण का भाव लेकर आगे बढ़ रही है। इसमें संतों की भूमिका अहम है। उन्होंने कहा कि आदिशंकराचार्य से लेकर आधुनिक काल तक के संतों के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे गजेंद्र त्रिपाठी ने कहा कि भारतीय संस्कृति ही सांसारिक बंधन से हमें परमात्मा से मिला सकती है। इसी संस्कृति में स्वयं भूखे रह कर दूसरों को भोजन कराने की बात कही गई है। पाश्चात्य संस्कृति को स्वार्थी बताया। इस दौरान कार्यक्रम के संचालक बृहस्पति त्रिपाठी, रमेश उपाध्याय, सपना सिंह, डा. पंकज कुमार, पूनम सिंह, सूर्य प्रकाश गुप्त, सुनील कुमार, शैलेश राय, अमृता सिंह, रामसुखी यादव, राजन सिंह आदि मौजूद रहे।
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भारतीय संस्कृति एवं संत परंम्परा विषय पर चर्चा
महराजगंज। शनिवार को दिग्विजयनाथ इंटर कालेज चौक बाजार में संस्थापक ब्रम्हलीन महंत अवेद्यनाथ की पुण्य स्मृति में दो दिवसीय व्याख्यान माला के दूसरे दिन भारतीय संस्कृति एवं संत परंपरा विषय पर चर्चा की गई। मुख्य अतिथि प्राचार्य परशुराम गुप्ता ने कहा कि भारतीय संस्कृति पूरे विश्व को परिवार मानती है और सबके कल्याण का भाव लेकर आगे बढ़ रही है। इसमें संतों की भूमिका अहम है। उन्होंने कहा कि आदिशंकराचार्य से लेकर आधुनिक काल तक के संतों के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे गजेंद्र त्रिपाठी ने कहा कि भारतीय संस्कृति ही सांसारिक बंधन से हमें परमात्मा से मिला सकती है। इसी संस्कृति में स्वयं भूखे रह कर दूसरों को भोजन कराने की बात कही गई है। पाश्चात्य संस्कृति को स्वार्थी बताया। इस दौरान कार्यक्रम के संचालक बृहस्पति त्रिपाठी, रमेश उपाध्याय, सपना सिंह, डा. पंकज कुमार, पूनम सिंह, सूर्य प्रकाश गुप्त, सुनील कुमार, शैलेश राय, अमृता सिंह, रामसुखी यादव, राजन सिंह आदि मौजूद रहे।
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