{"_id":"595a8fea4f1c1b42588b4790","slug":"151499107306-maharajganj-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"घटा महाव का जल स्तर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
घटा महाव का जल स्तर
Updated Tue, 04 Jul 2017 12:11 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
घटा महाव का जल स्तर, ली राहत की सांस
अमर उजाला ब्यूरो
बरगदवां। नेपाल से निकल कर बहने वाला महाव नाला का जल स्तर सोमवार को घटने से स्थानीय ग्रामीणों व सिचाईं विभाग के अधिकारियों ने राहत की सांस ली। रविवार की सुबह यह नाला उफान पर आ गया था। पानी के तेज बेग के कारण लगभग 20 मीटर बंधा टूट गया था। अभी इस टूटे बंधे के मरम्मत के लिए विचार चल ही रहा था कि जलस्तर घट गया।
महाव के टूटने से क्षेत्र के ग्राम छितवनिया, कोहरगड्डी, दोगहरा, विशुनपुरा, पिपरहीया, जहरी- महरी, घोड़हवा आदि गांव के किसानों के खेत में पानी भर गया। इन खेतों में कुछ दिन पूर्व ही किसानों द्वारा धान की रोपाई की गई थी परंतु महाव के पानी के साथ आई मिट्टी भी इन खेतों में फैल गई, जिसके कारण किसानों के धान की फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है लेकिन समाचार लिखे जाने तक कोई भी जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा था। यह तो संयोग रहा कि नाले का जलस्तर घट गया।
---
हर वर्ष टूटता है बंधा, स्थायी समाधान की मांग
महाव के टूटने का सिलसिला लगभग एक माह से चल रहा है। पूरी बरसात इसके टूटने का क्रम प्रति वर्ष ऐसे ही चलता है लेकिन अभी तक सिंचाई विभाग इस समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा सका, जिसके चलते स्थानीय ग्रामीणों को राहत मिल सके। क्षेत्र के जगवन्त यादव,उमाशंकर जयसवाल, हकीमुल, रामकिशुन ,हरीराम यादव, मेघू यादव पन्नालाल विश्मभर, गुप्ता जगदीश, हरीराम, पारस, जयहिन्द, अशोक, गोरख, रामबली, घरभरन, आदि किसानों ने तटबंध बंधवाने और स्थायी समाधान की मांग की है।
विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
बरगदवां। नेपाल से निकल कर बहने वाला महाव नाला का जल स्तर सोमवार को घटने से स्थानीय ग्रामीणों व सिचाईं विभाग के अधिकारियों ने राहत की सांस ली। रविवार की सुबह यह नाला उफान पर आ गया था। पानी के तेज बेग के कारण लगभग 20 मीटर बंधा टूट गया था। अभी इस टूटे बंधे के मरम्मत के लिए विचार चल ही रहा था कि जलस्तर घट गया।
महाव के टूटने से क्षेत्र के ग्राम छितवनिया, कोहरगड्डी, दोगहरा, विशुनपुरा, पिपरहीया, जहरी- महरी, घोड़हवा आदि गांव के किसानों के खेत में पानी भर गया। इन खेतों में कुछ दिन पूर्व ही किसानों द्वारा धान की रोपाई की गई थी परंतु महाव के पानी के साथ आई मिट्टी भी इन खेतों में फैल गई, जिसके कारण किसानों के धान की फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है लेकिन समाचार लिखे जाने तक कोई भी जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा था। यह तो संयोग रहा कि नाले का जलस्तर घट गया।
विज्ञापन
---
हर वर्ष टूटता है बंधा, स्थायी समाधान की मांग
महाव के टूटने का सिलसिला लगभग एक माह से चल रहा है। पूरी बरसात इसके टूटने का क्रम प्रति वर्ष ऐसे ही चलता है लेकिन अभी तक सिंचाई विभाग इस समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा सका, जिसके चलते स्थानीय ग्रामीणों को राहत मिल सके। क्षेत्र के जगवन्त यादव,उमाशंकर जयसवाल, हकीमुल, रामकिशुन ,हरीराम यादव, मेघू यादव पन्नालाल विश्मभर, गुप्ता जगदीश, हरीराम, पारस, जयहिन्द, अशोक, गोरख, रामबली, घरभरन, आदि किसानों ने तटबंध बंधवाने और स्थायी समाधान की मांग की है।
विज्ञापन