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Maharajganj News: टेढ़ी गांव के 13 टोले पक्के संपर्क मार्ग से महरूम
Mon, 24 Jun 2024 04:30 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Mon, 24 Jun 2024 04:30 AM IST
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लक्ष्मीपुर। सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग के चौक जंगल से पश्चिम लक्ष्मीपुर ब्लाॅक का टेढ़ी गांव के 13 पूरवे आज भी आवागमन के सुगम रास्ते के लिए तरस रहे हैं। गांव से बाहर निकलने के लिए ग्रामीणों को जंगल और नदी से होकर गुजरना पड़ता है। तीन हजार की आबादी विकास की किरण से अछूता रह गई है। यहां की सबसे बड़ी समस्या संपर्क मार्ग की है। यहां के टोलों को आपस में जोड़ने का मार्ग कच्चा है।
चौक जंगल के सटे लक्ष्मीपुर जंगल के मध्य भौगोलिक दृष्टि से अति पिछड़ा गांव टेढ़ी के कुल पांच राजस्व ग्राम हैं। इसमें कांधपुर, ब्रह्मपुर व बेलौहा, गंगापुर व टेढ़ी खास में शामिल है, लेकिन इनमें मात्र राजस्व गांव टेढ़ी, गंगापुर ही संपर्क मार्ग, बिजली आदि से जुड़ा है। जबकि तीन राजस्व गांव कांधपुर, बेलौहा, ब्रह्मपुर के 13 पूरवे तक आने-जाने का कोई सुगम मार्ग नहीं है।
चारों तरफ से नदी और जंगल से घिरा हुआ है। 13 पूरवों की तीन हजार आबादी मुसीबत झेल रही है। राजस्व ग्राम ब्रह्मपुर, कांधपुर एवं बेलौहा के बैजनाथ, वेद प्रकाश, सेतबान, रूदल, रामधन, योगेंद्र, जवाहिर, हरिवंश, सागर, रामसेवक, राम अधारे, सत्य प्रकाश, राजू, नरेंद्र, हीरा, अर्जुन, बलिराम, जयहिन्द, बेचन, मुन्नाराम, संजय, जयचंद, सुमेर, व्यासमुनि आदि लोगों ने बताया कि उक्त तीन राजस्व गांवों में 13 छोटे-छोटे टोले गुलरिहवा, तीनटोलिया, कौअहवा, पथरिहवा, कुकरहवा, बसौहा, बीन्नरटोलिया, भुदलिहवा, डलिहवा, आनंदनगर, बेरीकुड़ी, कांधपुर, बेलौहा शामिल है। जब भी ग्रामीणों को बाहर किसी काम से निकलना होता है तो रोहिन व मलाव नदी पार कर के ही जंगल से होते हुए जाना पड़ता है।
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प्रशासनिक उपेक्षा का दंश झेल रहे लोगों को गांव से बाहर निकलने के लिए कोई भी पक्का संपर्क मार्ग नहीं है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि केवल चुनाव में नेता इस गांव में दिखाई देते हैं। चुनाव में ही जनप्रतिनिधियों को यहां के ग्रामीणों की याद आती हैं। बड़े-बड़े वादे करके चले जाते हैं। हर बार प्रत्याशी रोहिन व मलाव नदी पर पुल बनवाने का वादा कर वोट ले लेते हैं। फिर अगले चुनाव में ही आते हैं। देश आजाद हुए सात दशक बीत गए, लेकिन गांव में विकास की एक किरण भी नहीं दिखी। बरसात के समय तीन हजार आबादी की हालत काफी दयनीय हो जाती है।
सबसे बड़ी दिक्कत आवागमन की है। गांव में कोई साधन नहीं जाता है। किसी भी तरफ से जाने के लिए पांच किमी पैदल चलना पड़ता है। उच्च शिक्षा ग्रहण करने में सबसे बड़ी दिक्कत सुगम मार्ग का नहीं होना है। सबसे अधिक परेशानी लड़कियों को उच्च शिक्षा ग्रहण करने में होती है। अपने रिश्तेदारों के घर रहकर पढ़ाई करनी पड़ती है। अगर सुगम मार्ग होते हो दिक्कत नहीं होती। चारों तरफ से मलाव व रोहिन नदी घेरे हुए हैं। इसके अलावा गांव के हर तरह जंगल ही जंगल नजर आते हैं। दिन में ही बाहरी आदमी यहां जाने से डरते हैं। किसी भी तरफ से जाने पर जंगल व नदी तो पार करनी ही पड़ेगी। बाहरी व्यक्ति दिन भी यहां आने जाने से कतराते हैं।
ग्राम पंचायत टेढ़ी की ग्राम प्रधान कुसमावती ने बताया कि भौगोलिक दृष्टि से उनका गांव दो भागों में विभाजित है। ग्राम पंचायत में पांच राजस्व गांव हैं, जिसमें टेढ़ी खास व गांगापुर में विकास हुआ है, लेकिन गांव के तीन राजस्व गांव कांधपुर, बेलौहा, ब्रह्मपुर के 13 पूरवे तक जाने आने का कोई सुगम मार्ग नहीं है। चारों तरफ से नदी और जंगल से घिरा हुआ है।
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टेढ़ी गांव भौगोलिक दृष्टि से नदियों व जंगल से घिरा है। यहां सरकार की ओर से संचालित सभी योजनाएं चल रही हैं, लेकिन गांव के कुछ टोले पर आज भी संपर्क मार्ग की समस्या बनी हुई है। शासन को अवगत कराया गया है।
-अमित कुमार मिश्रा, खंड विकास अधिकारी
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चौक जंगल के सटे लक्ष्मीपुर जंगल के मध्य भौगोलिक दृष्टि से अति पिछड़ा गांव टेढ़ी के कुल पांच राजस्व ग्राम हैं। इसमें कांधपुर, ब्रह्मपुर व बेलौहा, गंगापुर व टेढ़ी खास में शामिल है, लेकिन इनमें मात्र राजस्व गांव टेढ़ी, गंगापुर ही संपर्क मार्ग, बिजली आदि से जुड़ा है। जबकि तीन राजस्व गांव कांधपुर, बेलौहा, ब्रह्मपुर के 13 पूरवे तक आने-जाने का कोई सुगम मार्ग नहीं है।
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चारों तरफ से नदी और जंगल से घिरा हुआ है। 13 पूरवों की तीन हजार आबादी मुसीबत झेल रही है। राजस्व ग्राम ब्रह्मपुर, कांधपुर एवं बेलौहा के बैजनाथ, वेद प्रकाश, सेतबान, रूदल, रामधन, योगेंद्र, जवाहिर, हरिवंश, सागर, रामसेवक, राम अधारे, सत्य प्रकाश, राजू, नरेंद्र, हीरा, अर्जुन, बलिराम, जयहिन्द, बेचन, मुन्नाराम, संजय, जयचंद, सुमेर, व्यासमुनि आदि लोगों ने बताया कि उक्त तीन राजस्व गांवों में 13 छोटे-छोटे टोले गुलरिहवा, तीनटोलिया, कौअहवा, पथरिहवा, कुकरहवा, बसौहा, बीन्नरटोलिया, भुदलिहवा, डलिहवा, आनंदनगर, बेरीकुड़ी, कांधपुर, बेलौहा शामिल है। जब भी ग्रामीणों को बाहर किसी काम से निकलना होता है तो रोहिन व मलाव नदी पार कर के ही जंगल से होते हुए जाना पड़ता है।
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प्रशासनिक उपेक्षा का दंश झेल रहे लोगों को गांव से बाहर निकलने के लिए कोई भी पक्का संपर्क मार्ग नहीं है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि केवल चुनाव में नेता इस गांव में दिखाई देते हैं। चुनाव में ही जनप्रतिनिधियों को यहां के ग्रामीणों की याद आती हैं। बड़े-बड़े वादे करके चले जाते हैं। हर बार प्रत्याशी रोहिन व मलाव नदी पर पुल बनवाने का वादा कर वोट ले लेते हैं। फिर अगले चुनाव में ही आते हैं। देश आजाद हुए सात दशक बीत गए, लेकिन गांव में विकास की एक किरण भी नहीं दिखी। बरसात के समय तीन हजार आबादी की हालत काफी दयनीय हो जाती है।
सबसे बड़ी दिक्कत आवागमन की है। गांव में कोई साधन नहीं जाता है। किसी भी तरफ से जाने के लिए पांच किमी पैदल चलना पड़ता है। उच्च शिक्षा ग्रहण करने में सबसे बड़ी दिक्कत सुगम मार्ग का नहीं होना है। सबसे अधिक परेशानी लड़कियों को उच्च शिक्षा ग्रहण करने में होती है। अपने रिश्तेदारों के घर रहकर पढ़ाई करनी पड़ती है। अगर सुगम मार्ग होते हो दिक्कत नहीं होती। चारों तरफ से मलाव व रोहिन नदी घेरे हुए हैं। इसके अलावा गांव के हर तरह जंगल ही जंगल नजर आते हैं। दिन में ही बाहरी आदमी यहां जाने से डरते हैं। किसी भी तरफ से जाने पर जंगल व नदी तो पार करनी ही पड़ेगी। बाहरी व्यक्ति दिन भी यहां आने जाने से कतराते हैं।
ग्राम पंचायत टेढ़ी की ग्राम प्रधान कुसमावती ने बताया कि भौगोलिक दृष्टि से उनका गांव दो भागों में विभाजित है। ग्राम पंचायत में पांच राजस्व गांव हैं, जिसमें टेढ़ी खास व गांगापुर में विकास हुआ है, लेकिन गांव के तीन राजस्व गांव कांधपुर, बेलौहा, ब्रह्मपुर के 13 पूरवे तक जाने आने का कोई सुगम मार्ग नहीं है। चारों तरफ से नदी और जंगल से घिरा हुआ है।
टेढ़ी गांव भौगोलिक दृष्टि से नदियों व जंगल से घिरा है। यहां सरकार की ओर से संचालित सभी योजनाएं चल रही हैं, लेकिन गांव के कुछ टोले पर आज भी संपर्क मार्ग की समस्या बनी हुई है। शासन को अवगत कराया गया है।
-अमित कुमार मिश्रा, खंड विकास अधिकारी