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Maharajganj News: सड़क निर्माण को तोड़े थे 123 मकान हनुमानगढ़ी तक काम अब भी अधूरा
Wed, 01 Jan 2025 12:48 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Wed, 01 Jan 2025 12:48 AM IST
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महराजगंज। फरेंदा-नेशनल हाईवे को चौड़ा करने के दौरान बिना नोटिस मकान तोड़ने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार किया है। कोर्ट ने यूपी सरकार से याचिकाकर्ता को 25 लाख रुपये का अंतरिम मुआवजा देने को कहा है। हैरानी कि बात यह है कि सड़क निर्माण में 123 मकान तोड़ दिए गए, लेकिन अभी भी सक्सेना चौक से हनुमानगढ़ी तक सड़क अधूरी है।
याचिकाकर्ता मनोज ने अपना मकान टूटने के मामले में कोर्ट में वाद दाखिल किया था। उन्होंने साक्ष्य सहित न्यायालय को घटनाक्रम से अवगत कराया था। उन्होंने कहा था कि मेरा भी सक्सेना चौक पर मकान और दुकान थी। प्रशासन ने जबरन मकान पर बुलडोजर चलाया था।
13 सितंबर को नेशनल हाईवे निर्माण के दौरान उनका पुश्तैनी मकान गिरा दिया गया था। इससे पहले न तो जमीन का अधिग्रहण हुआ और न ही उन्हें अतिक्रमण को लेकर कोई नोटिस दिया गया था। यहां तक कि घर में रखा सामान हटाने तक का मौका नहीं दिया गया।
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वर्ष 2019 की बात करें तो उस समय हाईवे निर्माण के दौरान सड़क के दायरे में आने वाले मकान बगैर नोटिस तोड़ दिए गए थे। अब मामले में मोड़ आने के बाद जिनका घर टूटा है, उनको उम्मीद जगी है कि उन्हें भी मुआवजा मिल जाएगा। वे लोग भी अब न्यायालय जाने की तैयारी में हैं। सक्सेना चौक पर शैल जायसवाल का मकान भी टूटा था। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट का यह ऐतिहासिक फैसला है।
उस वक्त दहशत बनाकर घर तोड़ दिए गए थे। हमीदनगर के बद्रीश धर द्विवेदी कहते हैं कि करोड़ों रुपये खर्च कर गेस्ट हाउस बनाया था। दुकानें भी ठीक से बनाई गई थीं। इन सभी को तोड़वा दिया गया। नुकसान होने के साथ ही मानसिक समस्या भी हुई थी। अब तो किसी तरह से ठीक कराने के बाद काम शुरू किया गया है। लवकुश निगम भी समस्याओं का जिक्र करते हुए गुजरे समय की बात कर आक्रोशित हो गए।
उन्होंने बताया कि तीन दुकानें तोड़ दी गईं। दुकान से ही आजीविका चल रही थी। इसे व्यवस्थित करने में अब तक समस्या हो रही है। उस समय सड़क के किनारे घरों पर बुलडोजर चल रहे थे। कुछ लोग तो डर के कारण स्वयं ही तोड़ने लगे थे।
पुलिस भी काफी सख्ती बरत रही थी। यह जो कुछ हुआ है, ठीक है। इससे हर पीड़ित को न्याय मिलने में आसानी होगी।
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याचिकाकर्ता मनोज ने अपना मकान टूटने के मामले में कोर्ट में वाद दाखिल किया था। उन्होंने साक्ष्य सहित न्यायालय को घटनाक्रम से अवगत कराया था। उन्होंने कहा था कि मेरा भी सक्सेना चौक पर मकान और दुकान थी। प्रशासन ने जबरन मकान पर बुलडोजर चलाया था।
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13 सितंबर को नेशनल हाईवे निर्माण के दौरान उनका पुश्तैनी मकान गिरा दिया गया था। इससे पहले न तो जमीन का अधिग्रहण हुआ और न ही उन्हें अतिक्रमण को लेकर कोई नोटिस दिया गया था। यहां तक कि घर में रखा सामान हटाने तक का मौका नहीं दिया गया।
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वर्ष 2019 की बात करें तो उस समय हाईवे निर्माण के दौरान सड़क के दायरे में आने वाले मकान बगैर नोटिस तोड़ दिए गए थे। अब मामले में मोड़ आने के बाद जिनका घर टूटा है, उनको उम्मीद जगी है कि उन्हें भी मुआवजा मिल जाएगा। वे लोग भी अब न्यायालय जाने की तैयारी में हैं। सक्सेना चौक पर शैल जायसवाल का मकान भी टूटा था। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट का यह ऐतिहासिक फैसला है।
उस वक्त दहशत बनाकर घर तोड़ दिए गए थे। हमीदनगर के बद्रीश धर द्विवेदी कहते हैं कि करोड़ों रुपये खर्च कर गेस्ट हाउस बनाया था। दुकानें भी ठीक से बनाई गई थीं। इन सभी को तोड़वा दिया गया। नुकसान होने के साथ ही मानसिक समस्या भी हुई थी। अब तो किसी तरह से ठीक कराने के बाद काम शुरू किया गया है। लवकुश निगम भी समस्याओं का जिक्र करते हुए गुजरे समय की बात कर आक्रोशित हो गए।
उन्होंने बताया कि तीन दुकानें तोड़ दी गईं। दुकान से ही आजीविका चल रही थी। इसे व्यवस्थित करने में अब तक समस्या हो रही है। उस समय सड़क के किनारे घरों पर बुलडोजर चल रहे थे। कुछ लोग तो डर के कारण स्वयं ही तोड़ने लगे थे।
पुलिस भी काफी सख्ती बरत रही थी। यह जो कुछ हुआ है, ठीक है। इससे हर पीड़ित को न्याय मिलने में आसानी होगी।