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पूर्व प्रधान के साथ ही उनकी पत्नी की मौत
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खाई थीं साथ जीने और मरने की कसमें, निभाया भी
पति की मौत के आधे घंटे बाद पत्नी ने भी दम तोड़ा
संजय कुमार पांडेय
अमर उजाला ब्यूरो
महराजगंज। शादी के सात फेरे के दौरान ली गई कसमें आखिरकार पूरी हो गई। साथ जीने मरने की कसमें पूरी हुई तो वह तस्वीर देख हर किसी की आंख नम हो गई। रात में पति ने दम तोड़ा फिर आधे घंटे बाद पत्नी भी आखिरी सांस ली। पति पत्नी की अर्थी एक साथ गांव से उठी तो नम आंखों से सभी उन्हे अंतिम विदाई दी। परिजनों का करूण क्रंदन देख हर कोई ढांढस बंधा रहा था। वहीं पति-पत्नी की एक साथ होने वाली मौत को लेकर चर्चा कर रहे थे कि सात फेरे के वक्त लिए गए कमस पूरे हो गए। ग्राम सभा मिठौरा हरखोड़ा टोले के रहने वाले जगदीश (50) लखनऊ से इलाज करा कर आने के बाद घर पर ही थे। साथ में पत्नी शांति देवी (48) उनका देख भाल करती थी। परिजनों के मुताबिक समय से दवा देना और उनकी सेवा करने में जरा भी देरी नहीं होती थी। पति को सामने ही मरते देख यह सदमा शांति बर्दाश्त नहीं कर पायी और सदा के लिए शांत होकर पति के साथ ही अंतिम यात्रा निकल पड़ी। पांच पुत्र एवं एक बेटी का भरा-पूरा परिवार माता पिता की एक साथ मौत स्तब्ध हैं। छोटे बेटे रिंकू की शादी अभी नहीं हुई। अन्य सभी की शादी हो चुकी है। हरिकेश, बबलू, राजू, पिंटू एवं बेटी पूजा सभी का रो- रो कर बुरा हाल है। गांव के प्रधानपति सुनील गुप्ता कहते हैं कि जगदीश काफी व्यवहार कुशल थे। उनकी पत्नी भी उनके जैसे ही काफी व्यवहार कुशल थी। गांव में सभी के सुखदुख में शरीक होना दोनों नहीं भूलते थे। दिग्विजय मौर्य, मोहम्मद अली बताते हैं कि वह हमेशा हंसकर सभी से हालचाल पूछते थे। लखनऊ से इलाज कराकर आने के बाद बातचीत वह बोले रहे थे कि चार दिन की जिंदगी में सभी को हंसी खुशी जीवन बिताना चाहिए। उनकी बातों से ऐसा लग रहा था कि मानो उन्हें अपनी मौत का आभास हो गया था। मिठौरा उप डाकघर में अभी उनकी नौकरी दो साल और बाकी थी।
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पति की मौत के आधे घंटे बाद पत्नी ने भी दम तोड़ा
संजय कुमार पांडेय
अमर उजाला ब्यूरो
महराजगंज। शादी के सात फेरे के दौरान ली गई कसमें आखिरकार पूरी हो गई। साथ जीने मरने की कसमें पूरी हुई तो वह तस्वीर देख हर किसी की आंख नम हो गई। रात में पति ने दम तोड़ा फिर आधे घंटे बाद पत्नी भी आखिरी सांस ली। पति पत्नी की अर्थी एक साथ गांव से उठी तो नम आंखों से सभी उन्हे अंतिम विदाई दी। परिजनों का करूण क्रंदन देख हर कोई ढांढस बंधा रहा था। वहीं पति-पत्नी की एक साथ होने वाली मौत को लेकर चर्चा कर रहे थे कि सात फेरे के वक्त लिए गए कमस पूरे हो गए। ग्राम सभा मिठौरा हरखोड़ा टोले के रहने वाले जगदीश (50) लखनऊ से इलाज करा कर आने के बाद घर पर ही थे। साथ में पत्नी शांति देवी (48) उनका देख भाल करती थी। परिजनों के मुताबिक समय से दवा देना और उनकी सेवा करने में जरा भी देरी नहीं होती थी। पति को सामने ही मरते देख यह सदमा शांति बर्दाश्त नहीं कर पायी और सदा के लिए शांत होकर पति के साथ ही अंतिम यात्रा निकल पड़ी। पांच पुत्र एवं एक बेटी का भरा-पूरा परिवार माता पिता की एक साथ मौत स्तब्ध हैं। छोटे बेटे रिंकू की शादी अभी नहीं हुई। अन्य सभी की शादी हो चुकी है। हरिकेश, बबलू, राजू, पिंटू एवं बेटी पूजा सभी का रो- रो कर बुरा हाल है। गांव के प्रधानपति सुनील गुप्ता कहते हैं कि जगदीश काफी व्यवहार कुशल थे। उनकी पत्नी भी उनके जैसे ही काफी व्यवहार कुशल थी। गांव में सभी के सुखदुख में शरीक होना दोनों नहीं भूलते थे। दिग्विजय मौर्य, मोहम्मद अली बताते हैं कि वह हमेशा हंसकर सभी से हालचाल पूछते थे। लखनऊ से इलाज कराकर आने के बाद बातचीत वह बोले रहे थे कि चार दिन की जिंदगी में सभी को हंसी खुशी जीवन बिताना चाहिए। उनकी बातों से ऐसा लग रहा था कि मानो उन्हें अपनी मौत का आभास हो गया था। मिठौरा उप डाकघर में अभी उनकी नौकरी दो साल और बाकी थी।